{"_id":"575d5da54f1c1b0e4211b7a6","slug":"first-herlequin-babay-born-in-ndia","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"लता मंगेशकर अस्पताल में पैदा हुई भारत की पहली हर्लेक्विन बच्ची","category":{"title":"Bizarre News","title_hn":"हटके खबर","slug":"bizarre-news"}}
लता मंगेशकर अस्पताल में पैदा हुई भारत की पहली हर्लेक्विन बच्ची
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sun, 12 Jun 2016 07:03 PM IST
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महीनों के इंतजार के बाद गायत्री (बदला हुआ नाम) ने जब अपनी पहली बेटी को जन्म दिया तो उसे देखकर डाॅक्टर सहित सभी लोग आश्चर्य में पड़ गये। इस नवजात बच्ची के शरीर पर कोई चमड़ा नहीं है, ना ही इसके शरीर के बाहरी अंग विकसित हैं। इसकी आंखें और होंठ लाल हैं।
डाॅक्टरों ने जांच के बाद बताया कि गायत्री ने एक हर्लेक्विन बच्चे को जन्म दिया है। यह बच्चा नागपुर के लता मंगेशकर अस्पताल में पैदा हुआ है। डॉ. यश भारती के मुताबिक, वंशानुगत रोग के चलते यह बच्ची ऐसा पैदा हुई है। अगर शुरुअात में ही बच्चे की मां ने जांच करायी होती तो शायद ये बच्चा आज सामान्य होता।
डॉ. बनैत ने कहा कि हर्लेक्विन एक बेहद दुर्लभ गंभीर किस्म का अनुवांशिक त्वचा रोग है, जिसके कारण बाहरी त्वचा की सबसे बाहरी परत यानी ‘स्ट्रेटम कॉर्नियम’ मोटी हो जाती है। ऐसे मामलों में बच्चे का पूरा बदन त्वचा की मोटी सफेद प्लेटों, जो गहरी दरारों से अलग हो जाती हैं, के एक ‘कवच’ में लिपट जाता है। इसके अलावा, आंखें, कान, गुप्तांग और बाहरी हिस्से असामान्य तौर पर सिकुड़ जाते हैं।
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डाॅक्टरों ने जांच के बाद बताया कि गायत्री ने एक हर्लेक्विन बच्चे को जन्म दिया है। यह बच्चा नागपुर के लता मंगेशकर अस्पताल में पैदा हुआ है। डॉ. यश भारती के मुताबिक, वंशानुगत रोग के चलते यह बच्ची ऐसा पैदा हुई है। अगर शुरुअात में ही बच्चे की मां ने जांच करायी होती तो शायद ये बच्चा आज सामान्य होता।
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डॉ. बनैत ने कहा कि हर्लेक्विन एक बेहद दुर्लभ गंभीर किस्म का अनुवांशिक त्वचा रोग है, जिसके कारण बाहरी त्वचा की सबसे बाहरी परत यानी ‘स्ट्रेटम कॉर्नियम’ मोटी हो जाती है। ऐसे मामलों में बच्चे का पूरा बदन त्वचा की मोटी सफेद प्लेटों, जो गहरी दरारों से अलग हो जाती हैं, के एक ‘कवच’ में लिपट जाता है। इसके अलावा, आंखें, कान, गुप्तांग और बाहरी हिस्से असामान्य तौर पर सिकुड़ जाते हैं।
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30 लाख में से एक बच्चे को होती है यह बीमारी
डाॅक्टरों ने बताया कि यह एक दुर्लभ चर्मरोग है जो करीब 30 लाख में से एक बच्चे को होता है। इस वक्त बच्चे को उचित माॉस्चुराइजेशन की आवश्यकता है। पेट्रोलियम जेली और नारियल तेल के लिए अच्छा कार्य करता है। उन्होंने कहा कि अन्य मामलों के विपरीत, इस बच्चे को सांस लेने में कोई कठिनाई नहीं हो रही। डॉक्टर का कहना है कि फिलहाल बच्ची की हालत अभी ठीक है।
डॉ. अविनाश के मुताबिक, इस तरह की बच्ची पूरी दुनिया में अबतक दो ही जगह पैदा हुई है। एक जर्मनी और दूसरी पाकिस्तान में। भारत में जन्मी इस तरह की भारत की पहली और दुनिया की तीसरी बच्ची है। डॉक्टर ने बताया है कि अभी तक बच्ची की हालत ठीक है।
डॉ. अविनाश के मुताबिक, इस तरह की बच्ची पूरी दुनिया में अबतक दो ही जगह पैदा हुई है। एक जर्मनी और दूसरी पाकिस्तान में। भारत में जन्मी इस तरह की भारत की पहली और दुनिया की तीसरी बच्ची है। डॉक्टर ने बताया है कि अभी तक बच्ची की हालत ठीक है।