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America Stray Dogs: अमेरिका में हर साल क्यों मार दिए जाते हैं लाखों आवारा कुत्ते? जानिए आखिर क्या है वजह

Fri, 22 Aug 2025 06:14 PM IST
धर्मेंद्र सिंह फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला Published by: धर्मेंद्र सिंह Updated Fri, 22 Aug 2025 06:14 PM IST
सार

Stray Dogs: अमेरिका में आपको सड़कों पर इंसान तो नजर आएंगे, लेकिन कुत्ते और दूसरे जानवर नहीं दिखेंगे। लेकिन करीब 19 वीं सदी में हालात बिल्कुल अलग थे। न्यूयॉर्क की सड़कों पर कुत्ते आपस में लड़ते या लोगों पर हमले करते नजर आते थे।

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अमेरिका में हर साल क्यों मार दिए जाते हैं लाखों आवारा कुत्ते? - फोटो : एएनआई

विस्तार

America Stray Dogs: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर शुक्रवार को अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि उन्हें शेल्टर होम में नहीं रखा जाएगा। हालांकि, आक्रामक और हिंसक कुत्तों को नहीं छोड़ा जाएगा और उन्हें अलग जगहों पर रखा जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पहले के आदेश में  संशोधन करते हुए कहा कि जिन आवारा कु्त्तों को पकड़ा गया है उनकी नसबंदी की जाएगी, उन्हें एंटी रेबीज टीका लगाया जाएगा। फिर उन कुत्तों को उन्हीं जगहों पर छोड़ा जाएगा जहां से उन्हें पकड़ा गया है। अब कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर अमेरिका और दुनिया के दूसरों में आवारा कुत्तों के साथ क्या किया जाता है? वहां पर सड़कों पर आवार कुत्ते क्यों नहीं नजर आते हैं? 

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अमेरिका में आपको सड़कों पर इंसान तो नजर आएंगे, लेकिन कुत्ते और दूसरे जानवर नहीं दिखेंगे। लेकिन करीब 19 वीं सदी में हालात बिल्कुल अलग थे। न्यूयॉर्क की सड़कों पर कुत्ते आपस में लड़ते या लोगों पर हमले करते नजर आते थे। इसी समय न्यूयॉर्क सिटी के प्रशासन ने कई आक्रामक नियम बनाए और फैसला लिया सड़कों पर कुत्तों पर नहीं रहेंगे। 
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इसके सड़कों पर घूमते कुत्तों को रखने के लिए डॉग पाउंड बनाए गए। लेकिन यह उनका ध्यान रखने के लिए कोई शेल्टर नहीं था, बल्कि उन्हें नदियों में डुबोकर उनको मारा जाने लगा। न्यूयॉर्क से लेकर दूसरों शहरों तक ऐसा किया जाने लगा। अब इसने और भयानक रूप ले लिया। जानवरों को मारकर उनकी चरबी और हड्डियों का कमर्शियल इस्तेमाल किया जाने लगा। 
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बढ़ती इन घटनाओं के बाद पशुप्रेमी सक्रिय हो गए और अमेरिकन सोसायट फॉर प्रिवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल्स ने इसका विरोध शुरू कर दिया। फिर डॉग पाउंड की जगह मॉडर्न शेल्टर बनाने की योजना तैयार की गई। अब हर शहर में एनिमल कंट्रोल डिपार्टमेंट है, जिनकी टीम शिकायत मिलने पर या रूटीन पेट्रोलिंग के दौरान कुत्तों को पकड़कर एनिमल शेल्टर ले जाती है। यहां पर कुत्तों की जांच की जाती है। 


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यह पताया लगाया जाता है कि वह किसी का पालतू कुत्ता तो नहीं है, जिसके लिए माइक्रोचिपिंग का सिस्टम बनाया गया है। अधिकतर पालतू जानवरों में माइक्रोचिप लगाई जाती है। इससे मालिक पता करने में आसानी होती है और पता चलने पर कुत्तों को लौटा दिया जाता है। अगर कोई आवारा कुत्ता है, तो अडॉप्शन लिस्ट में डाला जाता है। फिर सोशल मीडिया पर कुत्तों को गोद लेने के लिए प्रेरित किया जाता है। कम उम्र के कुत्तों को लोग गोंद ले लेते हैं, लेकिन बूढ़े, बीमार और आक्रामक नस्ल के कुत्तों को कम लोग ही लेना चाहते हैं। 

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बीते साल अमेरिका में 6 लाख कुत्तों और बिल्लियों को मार दिया गया

अमेरिका में बीते साल छह लाख से ज्यादा आवारा और बिल्लियों को मार दिया गया। अमेरिका के अलावा कई देशों में यूथेनेशिया चलन में है।  यूथेनेशिया का मतलब है कि किसी जानवर को बिना दर्द के मारना। हालांकि, अमेरिकन सोसायटी फॉर प्रिवेंशन ऑप क्रुएलिटी टू एनिमल्स ने बताया है कि हर साल कुत्तों को मारने की संख्या घट रही है और गोंद लेने की प्रक्रिया बढ़ रही है। 

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