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क्या इस बार नहीं पड़ेगी ठंड? अल-नीनो हो रहा है शक्तिशाली, मौसम पर मंडरा रहा खतरा
Sat, 10 Oct 2026 07:48 PM IST
धर्मेंद्र कुमार सिंह
फीचर डेस्क, अमर उजाला
फीचर डेस्क, अमर उजाला
Published by: धर्मेंद्र कुमार सिंह
Updated Sat, 10 Oct 2026 07:48 PM IST
सार
विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने अल नोनी को लेकर चेतावनी दी है। संगठन का कहना है कि अल नीनो 2027 तक रह सकता है। इसके कारण कई इलाकों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने और बारिश के तरीके में बदलाव आने का अनुमान है।
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क्या इस बार नहीं पड़ेगी ठंड? अल-नीनो हो रहा है शक्तिशाली
- फोटो : AI
विस्तार
दुनिया के मौसम को अल-नीनो प्रभावित कर रहा है। प्रशांत महासागर में समुद्र के तापमान में तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है, जो दिसंबर 2026 तक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है। इससे दुनिया का मौसम प्रभावित होगा, जिसके कारण कई इलाकों में सामान्य से अधिक गर्मी पड़ने और बारिश के तरीके में बदलाव आने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर सूखा पड़ सकता है, तो कुछ हिस्सों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ने की संभावना है।
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विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) का कहना है कि अल-नीनो फरवरी 2027 तक रह सकता है। अनुमान है कि यह दुनिया के सबसे मजबूत अल-नीनो में से एक होगा। मौसम पर बड़ा प्रभाव पड़ सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में इस साल ठंड कम होगी। भारत में सर्दी पर अल नीनो का प्रभाव कितना होगा। अलग-अलग इलाकों के मौसम पर निर्भर होगा।
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अल-नीनो की ताकत का पता लगाने के लिए वैज्ञानिक प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के तापमान पर नजर रखते हैं। इसके लिए वह नीनो 3.4 इंडेक्स का इस्तेमाल करते हैं। इसके पता चलता है कि समुद्र का तापमान सामान्य से कितना अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, जून 2026 में इस क्षेत्र का तापमान सामान्य से 1.6 डिग्री सेल्सियस अधिक था। अगस्त में यह बढ़कर 2.5 डिग्री सेल्सियस हो गया।
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वैज्ञानिको का अनुमान है कि अक्तूबर से दिसंबर के बीच यह तापमान सामान्य से करीब 3.7 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने का अनुमान है। अगर ऐसा होता है, तो यह अभी तक का सबसे ऊंचा स्तर होगा। नवंबर 2015 से जनवरी 2016 के बीच तापमान सामान्य से 2.6 डिग्री सेल्सियस अधिक था। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल पुराना रिकॉर्ड टूट सकता है।
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क्या 2026 में कम पड़ेगी ठंड?
अल नीनो के कारण समुद्र और हवा के बीच गर्मी के आदान-प्रदान में बदलाव आता है। इससे दुनिया के कई इलाकों में तापमान और बारिश प्रभावित होती है। हालांकि, हर देश और क्षेत्र में इसका असर एक तरह का नहीं होता है। अल-नीनो के आधार पर नहीं बताया जा सकता है कि इस बार ठंड कम पड़ेगी या ज्यादा। फिलहाल जारी अनुमान में यह नहीं बताया गया है कि भारत में सर्दी कमजोर होगी।