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Upendra Kushwaha News : JDU छोड़ने से पहले कुशवाहा की बैठक में प्रस्ताव, कहा- नीतीश दूसरे के हाथों की कठपुतली

Mon, 20 Feb 2023 11:08 AM IST
कुमार जितेंद्र ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कुमार जितेंद्र ज्योति Updated Mon, 20 Feb 2023 11:08 AM IST
सार

Bihar : जनता दल यू की संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के साथ आज पार्टी के लिए भी अहम दिन रहा। कुशवाहा जदयू को बीमार बताते हुए इलाज की बात पर कायम रहे और इसी बात पर बैठक का दूसरा दिन था। उन्होंंने बैठक में नीतीश कुमार के पाेस्टर हटवा दिए। 

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Upendra Kushwaha News future of jdu nitish kumar bihar with lalan singh luv-kush factor
कल तक नीतीश थे पोस्टर में, अब सिर्फ कुशवाहा...ऊपर जार्ज फर्नांडीस। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जनता दल यू की संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के साथ आज पार्टी के लिए भी अहम दिन रहा। कुशवाहा जदयू को बीमार बताते हुए इलाज की बात पर कायम रहे और इसी बात पर बैठक का दूसरा दिन था। उन्होंंने बैठक में नीतीश कुमार के पाेस्टर हटवा दिए। उपेंद्र कुशवाहा ने जदयू की सदस्यता और एमएलसी पद से इस्तीफा दे दिया। बैठक में ही उपेंद्र कुशवाहा ने 3 पेज का पत्र जारी किया है।

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इस पत्र में लिखा है कि जदयू के समर्पित साथियों के लिए प्रस्ताव लाया गया है। इसमें सर्वसम्मती से उपेंद्र कुशवाहा को नई पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष घोषित कर दिया गया है। सर्वसम्मति से नई पार्टी के राष्ट्राध्यक्ष के रूप में उपेंद्र कुशवाहा का चयन किया गया है। पार्टी के सभी कार्यकर्ता उपेंद्र कुशवाहा को पार्टी का नाम झंडा और कमेटी के निर्माण की जिम्मेदारी देते हैं।
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कुछ माह से जदयू कार्यकर्ताओं में भ्रम और घोर निराशा
पत्र के जरिए नीतीश कुमार पर जमकर निशाना साधा गया। इसमें लिखा है कि नीतीश कुमार जो कर रहे हैं उस पर उनका नियंत्रण नहीं होता है। वह खुद पार्टी नहीं चला रहे हैं। ज्यादातर फैसले दूसरे लोग ले रहे हैं। पिछले कुछ दिन से राजद के लोग एक डील की चर्चा कर रहे हैं। यही नहीं कई अवसरों पर राजद के नेता तेजस्वी यादव को सत्ता सौंपने की डील का भी दावा कर चुके हैं। यह कथित डील बिहार के वर्तमान राजनीति समाज और विकास को पीछे धकेल कर वहां ले जाने का प्रयास है। जिसे हम कतई स्वीकार नहीं कर सकते हैं। पिछले कुछ माह से ना सिर्फ जदयू कार्यकर्ताओं को भ्रम और घोर निराशा है।
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कुछ लोग इस विरासत को बर्बाद करने की मुहिम में जुटे हैं
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी उन लोगों से घिरे हुए हैं। उनके कुचक्रों से या विरासत खतरे में है और हम इस विरासत को उनके हाथ से जाने नहीं दे सकते हैं। इनके खिलाफ लड़कर बिहार को आगे ले जाना संभव हुआ है। कुछ लोग इस विरासत को बर्बाद करने की मुहिम में जुटे हुए हैं। जबकि बिहार में समता मूलक समाज की परिकल्पना को ध्वस्त करने वाले और परिवार ही सर्वोच्च है। इस सोच बनाम जननायक कर्पूरी ठाकुर के सपनों को साकार करने वालों के बीच संघर्ष आज भी कायम है।


बिहार को एक नए मंच और राजनीतिक दल की आवश्यकता
बिहार की राजनीतिक विरासत को खौफनाक मंजर के पर्याय और परिवारवाद की उपज उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को सौंपने के किसी भी साजिश को सफल नहीं होने दिया जा सकता। चुनौती बड़ी है और जिम्मेदारी भी। इसलिए बिहार को एक नए मंच मोर्चा और राजनीतिक दल की आवश्यकता है। बिहार में नई परिस्थिति से उबरने के लिए सर्वसम्मति से एक नई पार्टी के गठन का फैसला लिया गया है। निश्चित तौर पर यह पार्टी बड़े उद्देश्य की पूर्ति और राज्य को बेहतर विकल्प देने के लिए अधिकतम प्रयास करेगी।

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