बिहार में थमा तीसरे चरण का चुनाव प्रचार
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बिहार विधानसभा चुनाव के तीसरे चरण के मतदान के लिए सोमवार को प्रचार का शोर थम गया। पटना, सारण, वैशाली, नालंदा समेत कुल 6 जिलों की 50 सीटों पर 28 अक्तूबर को मतदान होगा।
तीसरे चरण की 10 सीटों पर शाम 4 बजे और बाकी सीटों पर सोमवार को शाम पांच बजे प्रचार का शोर बंद हो गया। इस चरण में एक करोड़ 45 लाख से अधिक मतदाता 71 महिलाओं समेत कुल 808 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला करेंगे। शांतिपूर्ण मतदान के लिए 75 हजार से अधिक सुरक्षा कर्मिंयों को तैनात किया गया है। वहीं, दूसरे चरण के दो बूथों पर फिर से वोट डाले जाएंगे।
तीसरे चरण में पटना जिले की 14, नालंदा की 7, भोजपुर की 7, बक्सर की 4, सारण की 10 और वैशाली की 8 सीटों पर चुनाव होना है। इस चरण में खास सीटों में मोकामा की सीट भी है, जहां बाहुबलियों के बीच मुकाबला है।
पिछली बार जदयू के टिकट पर जीते अनंत सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। अनंत सिंह का मुकाबला सूरजभान सिंह के भाई कन्हैया से हैं, जबकि जदयू ने नीरज कुमार को यहां से मौका दिया है।
लालू के दोनों बेटों के भाग्य पर फैसला इसी चरण में होगा। महुआ सीट से लालू प्रसाद के बेटे तेजप्रताप की किस्मत दांव पर है। यह सीट लालू के लिए भी प्रतिष्ठा का सवाल बना हुआ है। इसी प्रकार राघोपुर सीट से लालू के दूसरे पुत्र तेजस्वी मैदान में उतरे हैं।
छह जिलों की कुल 50 सीटों पर मतदान
इसके अलावा राजगीर से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे सत्यदेव नारायण आर्य छह बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। जदयू से अलग होने के बाद नीतीश के गढ़ में उनके लिए इस बार कड़ी चुनौती है।
वहीं तरारी सीट से सुनील पांडेय ने पिछली बार जीत हासिल की थी। इस बार लोजपा के टिकट पर उनकी पत्नी गीता पांडेय मैदान में हैं। जिन सीटों पर जीत हार का फैसला महत्वपूर्ण होगा, उनमें पटना साहिब क्षेत्र प्रमुख है।
भाजपा के दिग्गज उम्मीदवार नंदकिशोर यादव छठी बार यहां से चुनावी मैदान में है। वहीं नालंदा सीट से पांच बार विधायक रहे श्रवण कुमार भी छठी बार चुनाव मैदान में हैं। श्रवण कुमार नीतीश के करीबी नेताओं में से एक हैं।
फुलवारी शरीफ (सुरक्षित) विधानसभा से जदयू के दिग्गज श्याम रजक मैदान में हैं। श्याम रजक इस क्षेत्र का पांच बार प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
वैशाली विधानसभा का 6 बार प्रतिनिधित्व कर चुके वृषिण पटेल इस बार ‘हम’ के टिकट पर चुनावी मैदान में हैं। पहले दो चरणों के मुकाबले इस चरण में कई नए मुद्दे लोगों के बीच लाए गए, जिनमें महंगाई और तंत्र-मंत्र शामिल है, लेकिन पिछले दो चरणों की तरह ही इस बार भी जाति और विकास के बीच ही सीधी लड़ाई देखी जा रही है।