फिर पलटे साधु, पढ़े नीतीश की तारीफ में कसीदे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
लालू यादव के साले और राबड़ी देवी के भाई साधु यादव एक बार फिर पलटी मार गए हैं। इस बार उन्होंने नीतीश की तारीफ की है। इससे पहले वो मोदी की भी तारीफ कर चुके हैं।
बुधवार को उन्होंने महाराजगंज सीट से चुनाव ना लड़ने का फैसला किया और अपना नामांकन वापस ले लिया। इससे पहले वो सारण से भी चुनाव लड़ने का फैसला टाल चुके हैं।
क्या हैं नीतीश की तारीफ के मायने
अब साधु यादव ने नीतीश कुमार और उनके बिहार मॉडल की तारीफ की है। इससे पहले उन्होंने मोदी से मुलाकात की थी और गुजरात मॉडल की तारीफ की थी।
माना जा रहा है हर ओर से निराश साधु को अपनी हार दिख रही थी और बिना पार्टी के उनका गुजारा भी नहीं था। ऐसे में उनको जरूरत थी एक झंडे की जिसके लिए वो ऐसा कर रहे हैं।
राबड़ी के खिलाफ नहीं लड़े
पहले साधु यादव ने अपनी बहन और पूर्व सीएम राबड़ी देवी के खिलाफ चुनाव लड़ने का ऐलान किया था जिसके बाद बिहार भर की निगाहें सारण सीट पर लगी थीं।
राबड़ी देवी ने भी उनको टक्कर देने की तैयारी कर ली थी लेकिन ऐन वक्त पर साधु ने पलटी मार ली और महाराजगंज से चुनाव लड़ने का एलान किया। उन्होंने कहा कि जनता ने उनको महाराजगंज सीट से लड़ने का आदेश दिया है।
बीजेपी से भी मिली निराशा
कांग्रेस में रहते हुए भी साधु यादव ने मोदी से मुलाकात की थी और तब तय माना जा रहा था कि वो बीजेपी में शामिल हो जाएंगे।
उन्होंने मोदी की जैसे और जितनी तारीफ की थी उसके बाद बिहार की राजनीति को समझने वाले कयास लगा रहे थे कि बिहार बीजेपी में साधु बड़े कद के नेता के तौर पर उभरेंगे।
लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ, साधु की इमेज के कारण बिहार बीजेपी में उनका विरोध हुआ और उनकी एंट्री संभव नहीं हो पाई।
पलटी मारने के लिए रहे हैं मशहूर
वक्त बदला और बदल गई साधु यादव की निष्ठा भी। उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा लेकिन वो अपनी हार से बच ना सके।
मोदी की तारीफ की लेकिन बीजेपी में जगह नहीं मिली। निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की वो भी राबड़ी के सामने। फिर पलटी मार कर महाराजगंज पहुंच गए।
अब नीतीश की तारीफ कर रहे हैं हालांकि जेडीयू नेताओं ने इस पर प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया है।