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सुशील मोदी के खुलासे के बाद लालू यादव सहकारिता विभाग की जांच के दायरे में

Fri, 17 Nov 2017 09:40 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
टीम डिजिटल, अमर उजाला Updated Fri, 17 Nov 2017 09:40 PM IST
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RJD supremo Lalu Yadav now under the scanner of the Cooperative Department
लालू यादव
राष्ट्रीय जनता दल अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव एक साथ कई जांचों का सामना कर रहे हैं। सीबीआई और प्रवर्तन निदेशालय उनके खिलाफ कई मामलों की जांच में जुटी हुई है। लेकिन इन सबके बीच बिहार की राजनीति में ये सवाल पूछा जा रहा है कि क्या नीतीश कुमार की सरकार लालू यादव के नाम से एक से अधिक भूखंड का आवंटन रद्द करेगी या अपने मकान को किराये पर देने के लिए कोई जुर्माना लगाएगी?   
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दरअसल बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने सहकारिता सम्मेलन के आयोजन में एक खुलासा किया। उन्होंने बताया कि विधायक कोऑपरेटिव की जांच में सहकारिता विभाग ने कई अनियमितता का पता लगाया है। मोदी ने कहा कि विभागीय जांच में पाया गया कि पटना शहर के बीचोबीच स्थित विधायक कोऑपरेटिव में कई विधायकों ने नियमों का खुले आम उल्लंघन कर एक से अधिक प्लॉट ले लिए। 
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हालांकि सुशील मोदी ने अपने भाषण में लालू यादव का सीधे तौर पर नाम नहीं लिया। लेकिन विधायक कोऑपरेटिव में लालू यादव द्वारा सबसे ज्यादा नियमों को तोड़े जाने की चर्चा है। मोदी के मुताबिक सहकारिता विभाग की जांच में दो बातें उभर कर आई हैं। कई विधायक ने ना केवल नियमों के खिलाफ एक से ज्यादा भूखंड लिया, बल्कि कुछ विधायक अपने भूखंड का इस्तेमाल व्यावसायिक गतिविधियों में कर रहे हैं जो कि नियम के खिलाफ है। 
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सुशील मोदी का इशारा लालू यादव की तरफ था, ऐसा मानने के पीछे कई कारण हैं। इससे पहले सुशील मोदी ने संवाददाता सम्मेलन कर लालू यादव पर अपने पार्टी के विधायकों के भूखंड अपने या राबड़ी देवी के नाम गिफ्ट करवाने का आरोप लगाया था। गौरतलब है कि लालू यादव के अधिकृत मकान में पिछले कई सालों से किराये पर दफ्तर चल रहा है। 

बिहार के सियासी गलियारे में इस बात की चर्चा होती रही है कि जब महगठबंधन की सरकार थी तब लालू यादव के तमाम दबावों के बावजूद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधायक कोऑपरेटिव के फाइल पर अपनी सहमति नहीं दी थी। हालांकि इस विधायक कोऑपरेटिव के सचिव और अन्य पदों पर लालू यादव की पार्टी के लोगों का पिछले कई सालों से कब्जा रहा है। 


सुशील मोदी ने कहा कि कुछ लोग अपने रसूख का इस्तेमाल कर नियमों के विपरीत अपने भूखंड का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि क्या नीतीश कुमार की सरकार लालू यादव के नाम से एक से ज्यादा भूखंड का आवंटन रद्द करेगी या अपने मकान को  किराये पर देने के लिए कोई जुर्माना लगाएगी? 
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