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Darbhanga: श्यामा माई मंदिर में बलि प्रथा पर रोक, धार्मिक न्यास बोर्ड के फैसले पर लोगों में आक्रोश

Thu, 14 Dec 2023 05:34 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 14 Dec 2023 05:34 PM IST
सार

Darbhanga: जिले में महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर स्थापित मां श्यामा माई मन्दिर परिसर में पूजा के दौरान होने वाले बलि प्रदान को रोकने का आदेश बिहार राज्य धार्मिक न्यास बोर्ड ने दरभंगा के डीएम सह सचिव श्यामा माई मंदिर को दिया है। इसको लेकर दरभंगा के सनातन प्रेमियों में काफी आक्रोश है। लोगों का कहना है यह मंदिर तंत्रोध विधि पर संचालित है। जिस कारण यहां परिसर में बलि वरदान की प्रथा रही है। इतना ही नहीं यह मंदिर दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर बना हुआ है। जबकि महाराज रामेश्वर सिंह बहुत बड़े तांत्रिक हुआ करते थे।

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Religious Trust Board bans sacrifice practice in Shyama Mai Temple
श्यामा माई मंदिर में बलि प्रथा पर लगाई रोक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

धार्मिक न्यास बोर्ड द्वारा भेजे गए पत्र में कहा गया है कि श्यामा माई मन्दिर एक धार्मिक न्यास है, जिसका नियोजन संख्या 3813 है। मंदिर के उपाध्यक्ष पंडित कमलाकांत झा के द्वारा बताया गया है श्रृंगार एवं बलि प्रथा के लिए एक चतुर्थ वर्गीय कर्मचारी की नियुक्ति की गई है। यह गलत की गई है, क्योंकि यह कार्य न केवल अधार्मिक है, बल्कि मूक बाध्य के जीवन के साथ उनकी हत्या करने का लाइसेंस प्रदान होगा जो कार्य केवल अनैतिक ही नहीं बल्कि असंवैधानिक भी है। लिहाजा की गई नियुक्ति को वापस लेते हुए दूसरी संसोधित सूचना निकाली जाय। इस बात का भी ध्यान रखने का आदेश दिया गया है कि मंदिर परिसर न तो कोई बलि प्रदान करने की व्यवस्था रहे और न ही कोई राशि या मंदिर प्रशासन कोई अनुमति इस तरह के कार्य के लिए दे।

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इसको बंद करना सनातन धर्म पर कुठाराघात है
बता दें कि इस पत्र के मिलते ही लोगों खलबली मच गई है। इस संबंध में आदित्य चौधरी मन्ना ने कहा कि यह श्यामा माई मन्दिर तो दरभंगा महाराज रामेश्वर सिंह की चिता पर बनाया गया था। यह मंदिर पूर्ण रूपेण तंत्रोध विधि महाराज के द्वारा संचालित किया जा रहा था। आज भी मन्दिर में तंत्रोध विधि पर ही चल रहा है।

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श्री चौधरी का कहना है जिस मन्दिर में भी तंत्रोध विधि से पूजा की जाती है, वहाँ बलि प्रदान की प्रथा सदियों से रही है। यहाँ भी श्यामा माई मन्दिर परिसर में सदियों से बलि प्रदान होता आया है। इसको बंद करना सनातन धर्म पर कुठाराघात है। महाराज रामेश्वर सिंह खुद बहुत बड़े तांत्रिक हुआ करते थे। उन्होंने कहा कि महाराज ने कामख्या में भी मन्दिर की स्थापना की है वहाँ भी तंत्रोध विधि से पूजा होती है और बलि प्रदान भी की जाती है। अगर बलि वरदान की प्रथा अगर सभी जगहों की जाती है तो यहां भी बन्द हो जाये। 

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