{"_id":"689e8a8084d7e1350a0a32f7","slug":"independence-day-people-hoisted-the-tricolor-at-midnight-in-purnia-bihar-a-tradition-going-on-since-1947-2025-08-15","type":"story","status":"publish","title_hn":"Independence Day: बिहार के इस जिले में आधी रात में लोगों ने फहराया तिरंगा, 1947 चली आ रही परंपरा; जानिए कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Independence Day: बिहार के इस जिले में आधी रात में लोगों ने फहराया तिरंगा, 1947 चली आ रही परंपरा; जानिए कहानी
Fri, 15 Aug 2025 06:46 AM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
Published by: आदित्य आनंद
Updated Fri, 15 Aug 2025 06:46 AM IST
सार
Purnea News: आधी रात को आजादी का जश्न मनाने बड़ी संख्या में लोग पूर्णिया के झंडा चौक पर इकट्ठा हुए। 12 बजकर एक मिनट पर तिरंगा फहराया। इसके बाद एक- दूसरे को जलेबियां खिलाकर लोगों ने आजादी का जश्न मनाया। स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी।
विज्ञापन
पूर्णिया के झंडा चौक पर रात के 12 बजे फहराया गया तिरंगा।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
भारत आज अपना 79वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। पूरे देश में 15 अगस्त सुबह में तिरंगे को सलामी देने की परंपरा है। लेकिन, बिहार का पूर्णिया एक जिला ऐसा है, जहां आधी रात को तिरंगे को सलामी दी जाती है। पूर्णिया शहर के झंडा चौक पर 14 अगस्त की मध्य रात्रि 12 बजकर एक मिनट पर तिरंगा फहराया गया। लोगों ने भारत माता के जयकारे लगाए। सन 1947 से चली आ रही परंपरा को कायम रखते हुए स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह के पोते विपुल प्रसाद सिंह ने ध्वजारोहण कर स्वतंत्रता दिवस समारोह मनाया। खुद को इस खास मौके का साक्षी बनाने बड़ी संख्या में लोग झंडा चौक पर इकट्ठा हुए। एक दूसरे को जलेबियां खिलाकर लोगों ने आजादी का जश्न मनाया। स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दी।
स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह के पोते विपुल प्रसाद सिंह ने कहा कि यह परंपरा हमारे उन पूर्वजों की याद दिलाती है, जिन्होंने हमें आजादी दिलाने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। यह एक ऐसा क्षण है जो पूरे देश को भावुक कर देता है और हमें अपनी आजादी की कीमत का एहसास दिलाता है। इस अनोखी परंपरा से जुड़ी एक गहरी और भावुक कहानी है, जो 1947 के गौरवशाली इतिहास को आज भी जिंदा रखे हुए है। यह बात साल 1947 की है, जब भारत को आजादी मिली थी। उस वक्त पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह, रामनारायण साह और शमशुल हक अपने साथियों के साथ मिलकर आजादी की खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
स्वतंत्रता दिवस और कृष्ण जन्माष्टमी पर सीएम नीतीश कुमार ने दी बधाई, चेहल्लुम पर दी श्रद्धांजलि
विज्ञापन
झंडा चौक पर तिरंगा फहरा दिया
जैसे ही 14 अगस्त की आधी रात को 12 बजकर एक मिनट पर रेडियो पर भारत की आजादी की घोषणा हुई, इन वीर सपूतों ने उसी वक्त भट्टा बाजार स्थित झंडा चौक पर जोश और जुनून के साथ तिरंगा फहरा दिया। तब से यह परंपरा हर साल निभाई जाती है और यह स्थान देश के उन चुनिंदा जगहों में से एक बन गया है, जहां रात में ध्वजारोहण होता है। यह परंपरा सिर्फ पूर्णिया में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बाघा बॉर्डर की तरह एक अद्वितीय पहचान बन चुकी है। हर साल की तरह इस साल भी रात के 12 बजकर एक मिनट पर यह ध्वजारोहण किया गया।
हर वर्ष रात्रि के 12:01 में हम झंडा फहराते हैं
वहीं समाजसेवी अनिल चौधरी ने कहा कि हमारे वीर सपूतों ने अपनी कुर्बानियां देकर देश को आजाद किया। कितनी माताओं के मांग का सिंदूर मिट गया। कितनी बहनों ने अपने भाइयों को खो दिया। तब जाकर देश आजाद हुए। यहां के स्वर सेनानियों ने हमें यह अवसर प्रदान किया है। हर वर्ष रात्रि के 12:01 में हम झंडा फहराते हैं। पूरे भारतवर्ष में एक बाघा बॉर्डर पर रात्रि में झंडा फहराया जाता है दूसरा पूर्णिया के झंडा चौक पर झंडा फहराया जाता है। इस मौके पर शहर के कई गणमान्य लोग, जैसे सदर विधायक विजय खेमका, नगर निगम मेयर विभा कुमारी, भाजपा नेता सह अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक, वार्ड पार्षद नवल जायसवाल सहित अन्य मौजूद थे।
विज्ञापन
स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह के पोते विपुल प्रसाद सिंह ने कहा कि यह परंपरा हमारे उन पूर्वजों की याद दिलाती है, जिन्होंने हमें आजादी दिलाने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया था। यह एक ऐसा क्षण है जो पूरे देश को भावुक कर देता है और हमें अपनी आजादी की कीमत का एहसास दिलाता है। इस अनोखी परंपरा से जुड़ी एक गहरी और भावुक कहानी है, जो 1947 के गौरवशाली इतिहास को आज भी जिंदा रखे हुए है। यह बात साल 1947 की है, जब भारत को आजादी मिली थी। उस वक्त पूर्णिया के स्वतंत्रता सेनानी रामेश्वर प्रसाद सिंह, रामनारायण साह और शमशुल हक अपने साथियों के साथ मिलकर आजादी की खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
विज्ञापन
स्वतंत्रता दिवस और कृष्ण जन्माष्टमी पर सीएम नीतीश कुमार ने दी बधाई, चेहल्लुम पर दी श्रद्धांजलि
विज्ञापन
झंडा चौक पर तिरंगा फहरा दिया
जैसे ही 14 अगस्त की आधी रात को 12 बजकर एक मिनट पर रेडियो पर भारत की आजादी की घोषणा हुई, इन वीर सपूतों ने उसी वक्त भट्टा बाजार स्थित झंडा चौक पर जोश और जुनून के साथ तिरंगा फहरा दिया। तब से यह परंपरा हर साल निभाई जाती है और यह स्थान देश के उन चुनिंदा जगहों में से एक बन गया है, जहां रात में ध्वजारोहण होता है। यह परंपरा सिर्फ पूर्णिया में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में बाघा बॉर्डर की तरह एक अद्वितीय पहचान बन चुकी है। हर साल की तरह इस साल भी रात के 12 बजकर एक मिनट पर यह ध्वजारोहण किया गया।
हर वर्ष रात्रि के 12:01 में हम झंडा फहराते हैं
वहीं समाजसेवी अनिल चौधरी ने कहा कि हमारे वीर सपूतों ने अपनी कुर्बानियां देकर देश को आजाद किया। कितनी माताओं के मांग का सिंदूर मिट गया। कितनी बहनों ने अपने भाइयों को खो दिया। तब जाकर देश आजाद हुए। यहां के स्वर सेनानियों ने हमें यह अवसर प्रदान किया है। हर वर्ष रात्रि के 12:01 में हम झंडा फहराते हैं। पूरे भारतवर्ष में एक बाघा बॉर्डर पर रात्रि में झंडा फहराया जाता है दूसरा पूर्णिया के झंडा चौक पर झंडा फहराया जाता है। इस मौके पर शहर के कई गणमान्य लोग, जैसे सदर विधायक विजय खेमका, नगर निगम मेयर विभा कुमारी, भाजपा नेता सह अधिवक्ता दिलीप कुमार दीपक, वार्ड पार्षद नवल जायसवाल सहित अन्य मौजूद थे।