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Hindi News ›   Bihar ›   Prashant Kishor Comments Will Not Contest Elections Myself but Give Better Options to Public Know Full Details

पीके का पैंतरा : प्रशांत किशोर ने कहा- खुद नहीं लड़ूंगा चुनाव, पर जनता को 'बेहतर विकल्प' जरूर दूंगा

Sun, 13 Nov 2022 09:49 AM IST
योगेश साहू पीटीआई, बेतिया।
पीटीआई, बेतिया। Published by: योगेश साहू Updated Sun, 13 Nov 2022 09:49 AM IST
सार

Prashant Kishor : प्रशांत किशोर ने कहा कि जद (यू) के नेता मुझे खरी-खोटी सुनाना पसंद करते हैं। उन्हें नीतीश कुमार से पूछना चाहिए कि अगर मुझे कोई राजनीतिक समझ नहीं थी तो मैं दो साल से उनके आवास पर क्या कर रहा था।

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Prashant Kishor Comments Will Not Contest Elections Myself but Give Better Options to Public Know Full Details
प्रशांत किशोर - फोटो : PTI

विस्तार

Prashant Kishor : राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने शनिवार को खुद चुनाव लड़ने की संभावना से इनकार किया, लेकिन अपने गृह राज्य बिहार के लिए एक 'बेहतर विकल्प' बनाने का वादा जरूर दोहराया। यहां एक संवाददाता सम्मेलन में संबोधित करते हुए उन्होंने जद (यू) के नेताओं को जमकर लताड़ लगाई।

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दरअसल, जद (यू) के नेताओं से पीके इस पर खासे खफा थे कि उन्होंने पीके पर थोड़े राजनीतिक कौशल के साथ एक 'धंधेबाज' (व्यापारी) जैसे आरोप लगाए थे। पीके ने इस दौरान जद (यू) के नेताओं को चुनौती देते हुए कहा कि वे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जाकर पूछें कि उन्होंने मुझे अपने आवास पर दो साल के लिए क्यों रखा था।
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संवाददाता सम्मेलन में आई-पीएसी (I-PAC) के संस्थापक प्रशांत किशोर से बार-बार यह सवाल पूछा गया कि क्या वह खुद चुनाव मैदान में उतरने की योजना बना रहे हैं? इस पर जवाब में उन्होंने कहा कि मैं चुनाव क्यों लड़ूंगा? मेरी ऐसी कोई आकांक्षा नहीं है। वह रविवार को होने वाले पश्चिम चंपारण के जिला सम्मेलन की पूर्व संध्या पर बोल रहे थे।
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इस सम्मेलन में लोगों की राय ली जाएगी कि क्या 'जन सुराज' अभियान को राजनीतिक दल बनाया जाना चाहिए। राज्य की 3,500 किलोमीटर लंबी 'पदयात्रा' पर आए किशोर ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों में इसी तरह से रायशुमारी होगी, जिसके आधार पर आगे की रणनीति तय की जाएगी।

किशोर ने दावा किया कि अगर नीतीश कुमार अपने 'राजनीतिक उद्यम' में शामिल होते हैं तो वह एक बार फिर उन पर यह उपकार करेंगे। उन्होंने कहा कि चूंकि मैंने अपने लिए एक स्वतंत्र राह चुनी है है, इसलिए वह और उनके साथी मुझसे नाखुश हैं। उन्होंने कहा कि जद (यू) के नेता मुझे खरी-खोटी सुनाना पसंद करते हैं। उन्हें नीतीश कुमार से पूछना चाहिए कि अगर मुझे कोई राजनीतिक समझ नहीं थी तो मैं दो साल से उनके आवास पर क्या कर रहा था।

एक सवाल के जवाब में किशोर ने कहा कि उन्हें नीतीश कुमार के साथ पहले काम करने का कोई मलाल नहीं है। उन्होंने कहा कि वह (कुमार) 10 साल पहले जो थे और अब जो हैं, उसमें बहुत अंतर है। उन्होंने लोकसभा चुनावों में अपनी पार्टी की हार की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 2014 में अपनी कुर्सी छोड़ दी थी। लेकिन अब सत्ता में बने रहने के लिए वह किसी भी तरह का समझौता करने को तैयार हैं।


महागठबंधन सरकार के सालाना 10 लाख नौकरियों के वादे का मजाक उड़ाते हुए किशोर ने कहा कि मैंने यह कई बार कहा है और फिर से कहता हूं- अगर वे वादा पूरा करते हैं तो मैं अपना अभियान छोड़ दूंगा।

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