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Pitru Paksha: बागेश्वरधाम वाले बाबा को बिहार के पंडित ने दी नसीहत, कहा- इस विधान को न भूलें धीरेंद्र शास्त्री
Sat, 21 Sep 2024 05:50 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
Published by: आदित्य आनंद
Updated Sat, 21 Sep 2024 05:50 PM IST
सार
Bihar News: पितृपक्ष मेला-2024 के दौरान 26 सितंबर को पंडित धीरेंद्र शास्त्री गया धाम पहुंचेंगे। जहां बोधगया के संबोधि रिसोर्ट में उनकी सभा का आयोजन होगा। इस दौरान वें अपने विशेष भक्तों को विधि विधान के साथ पिंडदान कराएंगे।
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पंडित धीरेंद्र शास्त्री को पंडित कुंदन पाठक ने दी नसीहत।
- फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
पितृपक्ष मेला-2024 के दौरान भक्तो के पुरखों का पिंडदान कराने 26 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय धर्म नगरी सह मोक्ष नगरी गया आ रहे बागेश्वर धाम के सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री को औरंगाबाद के एक पंडित ने बड़ी नसीहत दी है। उन्हे यह नसीहत औरंगाबाद के जम्होर के पास स्थित आदि गंगा पुनपुन के तट पर पितृपक्ष में पिंडदानियों को गयाजी में पिंडदान के पूर्व सर्वप्रथम पहला पिंड दिलाने वाले पंडित कुंदन पाठक ने दी है। कहा है कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री अपने भक्तों के पुरखों का पिंडदान कराने जरूर गयाजी आए लेकिन पुनपुन नदी में प्रथम पिंड दिलाने के पौराणिक विधान को नहीं भूले। यह भूल उनके भक्तों के लिए महंगा पड़ेगा। उनके भक्त यदि गयाजी में पुरखों का पिंडदान करने के पहले गया श्राद्ध तर्पण के प्रवेश द्वार पुनपुन नदी में पित्तरों को सर्वप्रथम पिंड नही देंगे, तो उनके द्वारा गयाजी में पुरखों को किया गया पिंडदान व्यर्थ चला जाएगा। यह उनके पुरखों को प्राप्त नही होगा और पुरखें अतृप्त रह जाएंगे। कहा कि धीरेंद्र शास्त्री अपने भक्तों के साथ इतना बड़ा अनर्थ नहीं होने दें।
पुनपुन में पित्तरों को प्रथम पिंड दिए बिना गया श्राद्ध व्यर्थ
पंडित कुंदन पाठक ने कहा कि उन्हें दुःख इस बात का है गयाजी के सभी पंडे-पुरोहित यह भलीभांति जानते और मानते भी हैं कि पितृपक्ष में गया में श्राद्ध तर्पण के पूर्व सर्वप्रथम आदि गंगा पुनपुन में पित्तरों को प्रथम पिंड देने का पौराणिक विधान है, जो सदियों से चला आ रहा है। इसके बावजूद गयाजी के पंडे-पुरोहित पुनपुन नदी के बदले वहां के गोदावरी सरोवर में पूरक विधि से पिंडदानियों से उनके पित्तरों को प्रथम पिंड दिला देते है। पूरक विधान से पित्तरों को गया में प्रथम पिंड दिला देने से गया श्राद्ध दोषपूर्ण और अपूर्ण रह जाता है तथा यह पुरखों को प्राप्त नही होता है और वें संतृप्त नही होते है। इसलिए उनकी धीरेंद्र शास्त्री से करबद्ध प्रार्थना है कि भक्तों के पुरखों का पिंडदान कराने गया आने के पहले पुनपुन नदी के किसी भी घाट पर पित्तरों को पहला पिंड दिलाए। इसके बाद ही गया में विधि विधान से श्राद्ध तर्पण कराए।
बार-बार की गई भूल अक्षम्य
उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम के सरकार धीरेंद्र शास्त्री पिछले साल 2023 में भी पितृपक्ष में भक्तों के पुरखों का पिंडदान कराने गया आए थे। पिछली बार भी वें भक्तों के पुरखों को आदि गंगा पुनपुन में प्रथम पिंड दिलाने के धार्मिक विधान को पूरा कराने का दायित्व और कर्तव्य भूल गए। इस बार यह भूल न हो, इस बात का उन्हें वें स्मरण करा रहे है क्योकि बार-बार की गई भूल अक्षम्य होती है और ईश्वर भी इसे माफ नही करते। इसलिए उनसे आग्रह है कि इस बार भूल की पुनरावृति नही होने दे। कहा कि आप सनातन धर्म और सनातनी परंपरा के झंडाबरदार है। आपसे बड़ी उम्मीदें। आपसे उम्मीद है कि निःसंदेह आप अपने भक्तों से पुरखों का पिंडदान कराने के दौरान आदि गंगा पुनपुन में पित्तरों को प्रथम पिंड दिलाने की पौराणिक मान्यता को कायम रखेंगे और इसकी पुर्नस्थापना पर भी काम करेंगे। उन्होने कहा कि त्रेता में प्रभु श्रीराम, द्वापर में युधिष्ठिर और कलियुग में विक्रमादित्य जैसे युग पुरूषों द्वारा पुनपुन नदी में ही पित्तरों को प्रथम पिंड देने का धार्मिक पुस्तकों में वर्णन है। पुनपुन नदी की धार्मिक महत्ता का वर्णन 'पुनपुन महात्मय' में भी है। इन कारणों से पुनपुन नदी में गया श्राद्ध के पूर्व पुनपुन नदी में ही पित्तरों को प्रथम पिंड देना अनिवार्य माना गया है।
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गया में पंडित धीरेंद्र शास्त्री का यह है कार्यक्रम
पितृपक्ष मेला-2024 के दौरान 26 सितंबर को बागेश्वर धाम के सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री गया धाम पहुंचेंगे। जहां बोधगया के संबोधि रिसोर्ट में उनकी सभा का आयोजन होगा। इस दौरान वें अपने विशेष भक्तों को विधि विधान के साथ पिंडदान कराएंगे। साथ ही भागवत कथा भी करेंगे। साथ ही उनके देखरेख में विभिन्न पिंडवेदियों पर पिंडदान व तर्पण कराया जाएगा। श्राद्ध कर्मकांड कराने के बाद वें विष्णुपद मंदिर के गर्भ गृह का भी दर्शन करेंगे।पिछले वर्ष भी पितृपक्ष मेला के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री अपने भक्तो के साथ गया पहुंचे थे। जहां उन्होने बोधगया के संबोधि रिसोर्ट में ही पिंडदान कराया था। इस दौरान उन्होंने पितृपक्ष मेला में भी अपना दरबार लगाने की घोषणा की थी। कतिपय कारणों से पिछ्ले साल उनका दरबार नही लग सका था। इस बार भी उनके द्वारा दरबार नहीं लगाया जाएगा।
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पुनपुन में पित्तरों को प्रथम पिंड दिए बिना गया श्राद्ध व्यर्थ
पंडित कुंदन पाठक ने कहा कि उन्हें दुःख इस बात का है गयाजी के सभी पंडे-पुरोहित यह भलीभांति जानते और मानते भी हैं कि पितृपक्ष में गया में श्राद्ध तर्पण के पूर्व सर्वप्रथम आदि गंगा पुनपुन में पित्तरों को प्रथम पिंड देने का पौराणिक विधान है, जो सदियों से चला आ रहा है। इसके बावजूद गयाजी के पंडे-पुरोहित पुनपुन नदी के बदले वहां के गोदावरी सरोवर में पूरक विधि से पिंडदानियों से उनके पित्तरों को प्रथम पिंड दिला देते है। पूरक विधान से पित्तरों को गया में प्रथम पिंड दिला देने से गया श्राद्ध दोषपूर्ण और अपूर्ण रह जाता है तथा यह पुरखों को प्राप्त नही होता है और वें संतृप्त नही होते है। इसलिए उनकी धीरेंद्र शास्त्री से करबद्ध प्रार्थना है कि भक्तों के पुरखों का पिंडदान कराने गया आने के पहले पुनपुन नदी के किसी भी घाट पर पित्तरों को पहला पिंड दिलाए। इसके बाद ही गया में विधि विधान से श्राद्ध तर्पण कराए।
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बार-बार की गई भूल अक्षम्य
उन्होंने कहा कि बागेश्वर धाम के सरकार धीरेंद्र शास्त्री पिछले साल 2023 में भी पितृपक्ष में भक्तों के पुरखों का पिंडदान कराने गया आए थे। पिछली बार भी वें भक्तों के पुरखों को आदि गंगा पुनपुन में प्रथम पिंड दिलाने के धार्मिक विधान को पूरा कराने का दायित्व और कर्तव्य भूल गए। इस बार यह भूल न हो, इस बात का उन्हें वें स्मरण करा रहे है क्योकि बार-बार की गई भूल अक्षम्य होती है और ईश्वर भी इसे माफ नही करते। इसलिए उनसे आग्रह है कि इस बार भूल की पुनरावृति नही होने दे। कहा कि आप सनातन धर्म और सनातनी परंपरा के झंडाबरदार है। आपसे बड़ी उम्मीदें। आपसे उम्मीद है कि निःसंदेह आप अपने भक्तों से पुरखों का पिंडदान कराने के दौरान आदि गंगा पुनपुन में पित्तरों को प्रथम पिंड दिलाने की पौराणिक मान्यता को कायम रखेंगे और इसकी पुर्नस्थापना पर भी काम करेंगे। उन्होने कहा कि त्रेता में प्रभु श्रीराम, द्वापर में युधिष्ठिर और कलियुग में विक्रमादित्य जैसे युग पुरूषों द्वारा पुनपुन नदी में ही पित्तरों को प्रथम पिंड देने का धार्मिक पुस्तकों में वर्णन है। पुनपुन नदी की धार्मिक महत्ता का वर्णन 'पुनपुन महात्मय' में भी है। इन कारणों से पुनपुन नदी में गया श्राद्ध के पूर्व पुनपुन नदी में ही पित्तरों को प्रथम पिंड देना अनिवार्य माना गया है।
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गया में पंडित धीरेंद्र शास्त्री का यह है कार्यक्रम
पितृपक्ष मेला-2024 के दौरान 26 सितंबर को बागेश्वर धाम के सरकार पंडित धीरेंद्र शास्त्री गया धाम पहुंचेंगे। जहां बोधगया के संबोधि रिसोर्ट में उनकी सभा का आयोजन होगा। इस दौरान वें अपने विशेष भक्तों को विधि विधान के साथ पिंडदान कराएंगे। साथ ही भागवत कथा भी करेंगे। साथ ही उनके देखरेख में विभिन्न पिंडवेदियों पर पिंडदान व तर्पण कराया जाएगा। श्राद्ध कर्मकांड कराने के बाद वें विष्णुपद मंदिर के गर्भ गृह का भी दर्शन करेंगे।पिछले वर्ष भी पितृपक्ष मेला के दौरान पंडित धीरेंद्र शास्त्री अपने भक्तो के साथ गया पहुंचे थे। जहां उन्होने बोधगया के संबोधि रिसोर्ट में ही पिंडदान कराया था। इस दौरान उन्होंने पितृपक्ष मेला में भी अपना दरबार लगाने की घोषणा की थी। कतिपय कारणों से पिछ्ले साल उनका दरबार नही लग सका था। इस बार भी उनके द्वारा दरबार नहीं लगाया जाएगा।