बिहार: बिहारशरीफ में आवारा कुत्तों का आतंक होगा कम, नगर निगम ने शुरू किया अभियान; पहले दिन 6 कुत्ते पकड़े
बिहारशरीफ शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक को देखते हुए नगर निगम ने स्ट्रीट डॉग्स को पकड़ने का अभियान शुरू किया है। अभियान के पहले दिन प्रशिक्षित टीम ने डॉग कैचर वाहन की मदद से छह आवारा कुत्तों को सुरक्षित पकड़ा और शहर की सीमा से बाहर भेज दिया।
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शहर की सड़कों और प्रमुख मोहल्लों में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। नगर निगम ने इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्ट्रीट डॉग्स को पकड़ने का अभियान शुरू कर दिया है। अभियान के पहले ही दिन नगर निगम की प्रशिक्षित टीम ने शहर के संवेदनशील इलाकों में कार्रवाई करते हुए डॉग कैचर वाहन की मदद से छह आवारा कुत्तों को सुरक्षित पकड़ा और उन्हें शहर की सीमा से बाहर भेज दिया। निगम की इस कार्रवाई से राहगीरों, स्कूली बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों ने राहत की सांस ली है।
नगर आयुक्त कृत्यानंद रंजन ने बताया कि पिछले कई दिनों से शहर के अलग-अलग वार्डों और मुख्य सड़कों पर आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। शहर के कई व्यस्त चौराहों पर कुत्तों के बड़े-बड़े झुंड जमा हो जाते थे। इससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए परेशानी के साथ-साथ दुर्घटना का खतरा भी बढ़ गया था।
कई बार कुत्तों के झुंड अचानक पैदल चलने वालों और बाइक सवारों पर झपट पड़ते थे। इससे घबराकर लोग वाहन से गिर जाते थे और सड़क हादसों का शिकार हो जाते थे। लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए नगर निगम ने अब इस समस्या से निपटने के लिए अभियान शुरू किया है। नगर आयुक्त के मुताबिक, यह अभियान चरणबद्ध तरीके से आगे भी जारी रहेगा।
सड़क हादसों और कुत्तों के काटने की घटनाओं पर लगेगा अंकुश
भैसासुर मोहल्ले के रहने वाले दामोदर मिस्त्री ने बताया कि शाम होते ही शहर के कई प्रमुख मोहल्लों में पैदल चलना मुश्किल हो गया था। रात में काम से लौटने वाले दोपहिया वाहन चालकों के पीछे आवारा कुत्तों का दौड़ना आम हो गया था। कई बार कुत्तों से बचने की कोशिश में वाहन चालक नियंत्रण खो देते थे और गिरकर घायल हो जाते थे।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, कुत्तों के काटने की घटनाओं के कारण अस्पतालों में एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने पहुंचने वाले मरीजों की संख्या भी बढ़ रही थी। नगर निगम के इस अभियान से उम्मीद है कि शहर की सड़कों पर लोगों की आवाजाही सुरक्षित होगी और आवारा कुत्तों के कारण होने वाले सड़क हादसों और डॉग बाइट की घटनाओं में भी कमी आएगी।