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Bihar Elections : नालंदा में आचार संहिता लागू, 22 लाख मतदाता तय करेंगे सियासी भविष्य; समझें सीटों का गणित
Mon, 06 Oct 2025 07:06 PM IST
पटना ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नालंदा
Published by: पटना ब्यूरो
Updated Mon, 06 Oct 2025 07:06 PM IST
सार
Bihar Election : नालंदा जिले में इस बार कुल 22,33,999 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह आंकड़ा जिले की बढ़ती आबादी और राजनीतिक जागरूकता का प्रतीक है। जानें सियासी गणित।
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बिहार विधानसभा चुनाव 2025
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार की राजनीति में एक बार फिर चुनावी सरगर्मी का माहौल बन गया है। भारतीय निर्वाचन आयोग ने सोमवार शाम चार बजे आयोजित प्रेसवार्ता के बीच दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों की औपचारिक घोषणा कर दी है। इस घोषणा के साथ ही नालंदा समेत पूरे बिहार में आदर्श आचार संहिता लागू हो गई है, जिसके तहत अब सभी राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों को चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों का अनिवार्य रूप से पालन करना होगा।
मतदान और मतगणना की तारीखें
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नालंदा जिले में पहले चरण में 6 नवंबर को मतदान संपन्न कराया जाएगा। मतगणना की प्रक्रिया 14 नवंबर को पूरी होगी। चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत 10 अक्तूबर को गैजेट जारी होने के साथ होगी, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर निर्धारित की गई है। इस छोटी सी अवधि में राजनीतिक दल और उम्मीदवार अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।
22.33 लाख मतदाता तय करेंगे नालंदा का भाग्य
नालंदा जिले में इस बार कुल 22,33,999 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह आंकड़ा जिले की बढ़ती आबादी और राजनीतिक जागरूकता का प्रतीक है। मतदाताओं में पुरुषों की संख्या 11,77,411 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 10,56,535 है। विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बात यह है कि 53 अन्य श्रेणी के मतदाता भी इस बार मतदान में हिस्सा लेंगे। महिला मतदाताओं की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि इस चुनाव में महिला वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
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सात विधानसभा सीटों का विस्तृत विवरण
नालंदा जिले की सात विधानसभा सीटों पर होने वाले इस चुनाव में प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट पहचान है।
अस्थावां (विधानसभा क्षेत्र संख्या-171)* में कुल 3,01,833 मतदाता हैं, जिनमें 1,59,726 पुरुष और 1,42,100 महिलाएं शामिल हैं। यह सीट ऐतिहासिक रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है और यहां किसानों के मुद्दे चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं।
बिहारशरीफ (विधानसभा क्षेत्र संख्या-172)* नालंदा जिले की सबसे बड़ी विधानसभा सीट है, जहां 3,88,095 मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करेंगे। इनमें 2,02,407 पुरुष और 1,85,670 महिला मतदाता हैं। जिला मुख्यालय होने के कारण यह सीट राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
राजगीर (विधानसभा क्षेत्र संख्या-173)* अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट नालंदा की सबसे छोटी सीट है, जहां 2,98,030 मतदाता हैं। पर्यटन स्थल होने के कारण यहां रोजगार और विकास के मुद्दे प्रमुख रहते हैं।
इस्लामपुर (विधानसभा क्षेत्र संख्या-174)* में 3,00,911 मतदाता हैं। यह क्षेत्र सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता है और यहां मिश्रित आबादी है।
हिलसा (विधानसभा क्षेत्र संख्या-175)* में 3,03,198 मतदाता हैं। 2020 के चुनाव में यहां सबसे रोमांचक मुकाबला देखने को मिला था, जो महज 12 वोटों के अंतर से तय हुआ था।
नालंदा (विधानसभा क्षेत्र संख्या-176)* में 3,23,961 मतदाता हैं,
हरनौत (विधानसभा क्षेत्र संख्या-177)* में 3,17,971 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
2020 की कहानी: जदयू का प्रभुत्व
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में नालंदा जिले में जनता दल (यूनाइटेड) का स्पष्ट वर्चस्व देखने को मिला था। नाइटीश कुमार की पार्टी ने सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल को एक-एक सीट पर संतोष करना पड़ा था।
एनडीए के लिए इकलौती जीत दर्ज की थी
अस्थावां सीट पर जदयू के जितेंद्र कुमार ने आरजेडी के अनिल कुमार को 11,600 वोटों के अच्छे अंतर से पराजित किया था। बिहारशरीफ की प्रतिष्ठित सीट पर बीजेपी के डॉ. सुनील कुमार ने आरजेडी के सुनील कुमार को 15,102 वोटों से हराकर एनडीए के लिए इकलौती जीत दर्ज की थी।
राजगीर की अनुसूचित जाति आरक्षित सीट पर जदयू के कौशल किशोर ने कांग्रेस के रवि ज्योति कुमार को 16,048 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी थी। इस्लामपुर सीट पर आरजेडी के राकेश कुमार रौशन ने जदयू के चंद्रसेन प्रसाद को 3,698 वोटों के अपेक्षाकृत कम अंतर से हराकर महागठबंधन के लिए एकमात्र सीट बचाई थी।
हिलसा सीट का चुनावी मुकाबला बिहार के इतिहास में दर्ज हो गया। जदयू के कृष्णमुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया ने आरजेडी के अत्री मुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव को महज 12 वोटों के न्यूनतम अंतर से हराया था। यह राज्य के सबसे करीबी चुनावी मुकाबलों में से एक था, जिसने पुनर्मतगणना की मांग को भी जन्म दिया था।
ये भी पढ़ें- बिहार में छठ के नौ दिन बाद 6 नवंबर को पहली वोटिंग, 11 को दूसरे चरण का मतदान; नतीजे 14 को
16,077 वोटों से पराजित किया था
नालंदा सीट पर जदयू के श्रवण कुमार ने जनतांत्रिक विकास पार्टी के कौशलेन्द्र कुमार को 16,077 वोटों से पराजित किया था। हरनौत सीट पर जदयू के हरि नारायण सिंह ने लोक जनशक्ति पार्टी की ममता देवी को 27,241 वोटों के सबसे बड़े अंतर से हराकर अपना दबदबा कायम किया था।
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मतदान और मतगणना की तारीखें
निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, नालंदा जिले में पहले चरण में 6 नवंबर को मतदान संपन्न कराया जाएगा। मतगणना की प्रक्रिया 14 नवंबर को पूरी होगी। चुनावी प्रक्रिया की शुरुआत 10 अक्तूबर को गैजेट जारी होने के साथ होगी, जबकि नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 17 अक्टूबर निर्धारित की गई है। इस छोटी सी अवधि में राजनीतिक दल और उम्मीदवार अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।
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22.33 लाख मतदाता तय करेंगे नालंदा का भाग्य
नालंदा जिले में इस बार कुल 22,33,999 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। यह आंकड़ा जिले की बढ़ती आबादी और राजनीतिक जागरूकता का प्रतीक है। मतदाताओं में पुरुषों की संख्या 11,77,411 है, जबकि महिला मतदाताओं की संख्या 10,56,535 है। विशेष रूप से ध्यान देने योग्य बात यह है कि 53 अन्य श्रेणी के मतदाता भी इस बार मतदान में हिस्सा लेंगे। महिला मतदाताओं की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि इस चुनाव में महिला वोट बैंक निर्णायक भूमिका निभा सकता है।
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सात विधानसभा सीटों का विस्तृत विवरण
नालंदा जिले की सात विधानसभा सीटों पर होने वाले इस चुनाव में प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट पहचान है।
अस्थावां (विधानसभा क्षेत्र संख्या-171)* में कुल 3,01,833 मतदाता हैं, जिनमें 1,59,726 पुरुष और 1,42,100 महिलाएं शामिल हैं। यह सीट ऐतिहासिक रूप से कृषि प्रधान क्षेत्र है और यहां किसानों के मुद्दे चुनाव में अहम भूमिका निभाते हैं।
बिहारशरीफ (विधानसभा क्षेत्र संख्या-172)* नालंदा जिले की सबसे बड़ी विधानसभा सीट है, जहां 3,88,095 मतदाता अपने प्रतिनिधि का चुनाव करेंगे। इनमें 2,02,407 पुरुष और 1,85,670 महिला मतदाता हैं। जिला मुख्यालय होने के कारण यह सीट राजनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है।
राजगीर (विधानसभा क्षेत्र संख्या-173)* अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित यह सीट नालंदा की सबसे छोटी सीट है, जहां 2,98,030 मतदाता हैं। पर्यटन स्थल होने के कारण यहां रोजगार और विकास के मुद्दे प्रमुख रहते हैं।
इस्लामपुर (विधानसभा क्षेत्र संख्या-174)* में 3,00,911 मतदाता हैं। यह क्षेत्र सांप्रदायिक सौहार्द के लिए जाना जाता है और यहां मिश्रित आबादी है।
हिलसा (विधानसभा क्षेत्र संख्या-175)* में 3,03,198 मतदाता हैं। 2020 के चुनाव में यहां सबसे रोमांचक मुकाबला देखने को मिला था, जो महज 12 वोटों के अंतर से तय हुआ था।
नालंदा (विधानसभा क्षेत्र संख्या-176)* में 3,23,961 मतदाता हैं,
हरनौत (विधानसभा क्षेत्र संख्या-177)* में 3,17,971 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
2020 की कहानी: जदयू का प्रभुत्व
बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में नालंदा जिले में जनता दल (यूनाइटेड) का स्पष्ट वर्चस्व देखने को मिला था। नाइटीश कुमार की पार्टी ने सात में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल को एक-एक सीट पर संतोष करना पड़ा था।
एनडीए के लिए इकलौती जीत दर्ज की थी
अस्थावां सीट पर जदयू के जितेंद्र कुमार ने आरजेडी के अनिल कुमार को 11,600 वोटों के अच्छे अंतर से पराजित किया था। बिहारशरीफ की प्रतिष्ठित सीट पर बीजेपी के डॉ. सुनील कुमार ने आरजेडी के सुनील कुमार को 15,102 वोटों से हराकर एनडीए के लिए इकलौती जीत दर्ज की थी।
राजगीर की अनुसूचित जाति आरक्षित सीट पर जदयू के कौशल किशोर ने कांग्रेस के रवि ज्योति कुमार को 16,048 वोटों के बड़े अंतर से शिकस्त दी थी। इस्लामपुर सीट पर आरजेडी के राकेश कुमार रौशन ने जदयू के चंद्रसेन प्रसाद को 3,698 वोटों के अपेक्षाकृत कम अंतर से हराकर महागठबंधन के लिए एकमात्र सीट बचाई थी।
हिलसा सीट का चुनावी मुकाबला बिहार के इतिहास में दर्ज हो गया। जदयू के कृष्णमुरारी शरण उर्फ प्रेम मुखिया ने आरजेडी के अत्री मुनि उर्फ शक्ति सिंह यादव को महज 12 वोटों के न्यूनतम अंतर से हराया था। यह राज्य के सबसे करीबी चुनावी मुकाबलों में से एक था, जिसने पुनर्मतगणना की मांग को भी जन्म दिया था।
ये भी पढ़ें- बिहार में छठ के नौ दिन बाद 6 नवंबर को पहली वोटिंग, 11 को दूसरे चरण का मतदान; नतीजे 14 को
16,077 वोटों से पराजित किया था
नालंदा सीट पर जदयू के श्रवण कुमार ने जनतांत्रिक विकास पार्टी के कौशलेन्द्र कुमार को 16,077 वोटों से पराजित किया था। हरनौत सीट पर जदयू के हरि नारायण सिंह ने लोक जनशक्ति पार्टी की ममता देवी को 27,241 वोटों के सबसे बड़े अंतर से हराकर अपना दबदबा कायम किया था।