बिहार: 100 अंकों के सूचकांक से तय हुई बैंकों की रैंकिंग, जानें कौन किस स्थान पर?
बिहार में बैंकों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए पहली बार 100 अंकों पर आधारित मापन सूचकांक लागू किया गया है। इसके आधार पर बैंकों को ग्रीन, येलो और रेड जोन में बांटा गया है। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 74 अंकों के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि भारतीय स्टेट बैंक को 32 अंक मिलने पर रेड जोन में रखा गया।
विस्तार
बिहार में बैंकों के प्रदर्शन का आकलन करने के लिए पहली बार 100 अंकों पर आधारित मापन सूचकांक लागू किया गया है। इसके आधार पर बैंकों को उनके कामकाज के अनुसार ग्रीन, येलो और रेड जोन में बांटा गया है। इस रैंकिंग में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 74 अंकों के साथ शीर्ष पर रहा, जबकि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) को 32 अंक मिले और वह रेड जोन में शामिल हुआ। बिहार के विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने बैंकों को वार्षिक साख योजना के लक्ष्य मिशन मोड में पूरा करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बिहार में जमा होने वाली राशि का निवेश राज्य के कृषि, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे के विकास में होना चाहिए।
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को पटना स्थित पुराने सचिवालय के मुख्य सभाकक्ष में उच्चस्तरीय समिति की तीसरी समीक्षा बैठक हुई। इसमें राज्य के समग्र बैंकिंग प्रदर्शन, वार्षिक साख योजना के लक्ष्यों की प्राप्ति, साख-जमा अनुपात और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के तहत ऋण वितरण की विस्तार से समीक्षा की गई।
पहली बार 100 अंकों के सूचकांक से बैंकों का मूल्यांकन
बैठक की प्रमुख विशेषता बैंकों के प्रदर्शन को मापने के लिए 100 अंकों के वैज्ञानिक मापन सूचकांक की शुरुआत रही। इसके तहत अलग-अलग मानकों के लिए अंक निर्धारित किए गए हैं, जिनके आधार पर बैंकों की रैंकिंग और प्रदर्शन का आकलन किया गया। राज्य सरकार ने ऋण वितरण की निगरानी को अधिक व्यापक बनाने के लिए चार नई महत्वपूर्ण कल्याणकारी योजनाओं को भी इस व्यवस्था से जोड़ा है। इससे विभिन्न योजनाओं के तहत ऋण प्रवाह की अधिक सटीक निगरानी की जा सकेगी।
4.95 लाख करोड़ रुपये की वार्षिक साख योजना
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए बिहार की वार्षिक साख योजना का लक्ष्य बढ़ाकर 4,95,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है। यह राशि राज्य के करीब 1,25,000 करोड़ रुपये के वार्षिक योजना बजट से लगभग चार गुना है। सरकार को उम्मीद है कि इस ऋण प्रवाह से राज्य के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की वृद्धि और रोजगार सृजन को गति मिलेगी।
30 सितंबर 2026 तक राज्य ने इस लक्ष्य के मुकाबले 1,89,343.52 करोड़ रुपये का ऋण वितरण हासिल किया है, जो कुल लक्ष्य का 38.25 प्रतिशत है। विकास आयुक्त के अनुसार, यह उपलब्धि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 की इसी अवधि की तुलना में 46,228.29 करोड़ रुपये अधिक है। इसे राज्य में निवेश और
आर्थिक गतिविधियों में तेजी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
एमएसएमई क्षेत्र में 52.68 प्रतिशत लक्ष्य हासिल
क्षेत्रवार प्रदर्शन में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र सबसे आगे रहा। इस क्षेत्र के लिए 1,59,632 करोड़ रुपये का लक्ष्य निर्धारित किया गया था, जिसके मुकाबले 84,091.21 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। यह लक्ष्य का 52.68 प्रतिशत है। कृषि क्षेत्र में 1,57,015 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 43,967.17 करोड़ रुपये का ऋण प्रवाह हुआ, जो 28 प्रतिशत है। वहीं, प्राथमिकता प्राप्त क्षेत्र के लिए निर्धारित 3,55,532 करोड़ रुपये के लक्ष्य के मुकाबले 1,30,619 करोड़ रुपये का ऋण वितरित किया गया। यह कुल लक्ष्य का 36.74 प्रतिशत है।
बिहार का साख-जमा अनुपात 60.17 प्रतिशत
वित्तीय वर्ष 2025-26 के अंत में बिहार ने पहली बार 60.21 प्रतिशत का साख-जमा अनुपात हासिल किया था। यह अनुपात चालू वित्तीय वर्ष में भी लगभग उसी स्तर पर बना हुआ है। 30 सितंबर 2026 तक राज्य का साख-जमा अनुपात 60.17 प्रतिशत दर्ज किया गया। इस अवधि में बिहार में कुल जमा राशि बढ़कर 6,49,225 करोड़ रुपये और कुल बकाया ऋण 3,90,655 करोड़ रुपये हो गया। पिछले वर्ष की तुलना में जमा राशि में 33,797 करोड़ रुपये और ऋण प्रवाह में 20,092 करोड़ रुपये की वृद्धि दर्ज की गई।
किसान क्रेडिट कार्ड से 8,344 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण
बैठक में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी), पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, पीएम स्वनिधि और पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत ऋण वितरण की भी समीक्षा की गई। विकास आयुक्त ने इन योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाने का निर्देश दिया। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, किसान क्रेडिट कार्ड योजना के तहत 7,37,906 खातों के माध्यम से किसानों को 8,344.70 करोड़ रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है। इनमें 7,12,383 खातों का नवीनीकरण भी शामिल है। इसके अलावा, पशुपालन क्षेत्र में 605.01 करोड़ रुपये और मत्स्य पालन क्षेत्र में 11.12 करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है।
पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत राज्य में 13,911 आवेदन स्वीकृत किए गए हैं। इनके लिए 28,451.21 लाख रुपये की राशि से संबंधित वित्तीय प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया है। वहीं, रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों के लिए संचालित पीएम स्वनिधि योजना के तहत 2,17,731 आवेदन स्वीकृत किए गए और 2,09,959 लाख रुपये का ऋण वितरित किया गया। पीएम सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना के माध्यम से 2,748 उद्योगों को वित्तीय सहायता से जोड़ा गया है। वहीं, पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 28,625 से अधिक शिल्पकारों को वित्तीय मुख्यधारा में शामिल किया गया है।
ग्रीन जोन में 11 बैंक, IDFC फर्स्ट बैंक सबसे आगे
100 अंकों के मापन सूचकांक के आधार पर बैंकों को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। 50 या इससे अधिक अंक पाने वाले बैंकों को ग्रीन जोन में रखा गया है। इस श्रेणी में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक 74 अंकों के साथ पहले स्थान पर है। ग्रीन जोन में जम्मू एंड कश्मीर बैंक और आरबीएल बैंक को 68-68 अंक मिले हैं। एचडीएफसी बैंक को 65, बैंक ऑफ बड़ौदा को 64, उज्जीवन स्मॉल फाइनेंस बैंक को 63, पंजाब एंड सिंध बैंक को 58, बिहार ग्रामीण बैंक को 57, बैंक ऑफ महाराष्ट्र और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक को 53-53 तथा यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 52 अंक मिले हैं।
येलो जोन में सात बैंक
40 से 50 अंक के बीच प्रदर्शन करने वाले बैंकों को येलो जोन में रखा गया है। इस श्रेणी में आईसीआईसीआई बैंक और बैंक ऑफ इंडिया को 47-47 अंक मिले हैं। पंजाब नेशनल बैंक को 45, एक्सिस बैंक, यस बैंक और यूनिटी स्मॉल फाइनेंस बैंक को 42-42 अंक तथा इंडियन बैंक को 40 अंक मिले हैं।
रेड जोन में एसबीआई समेत कई बैंक
40 से कम अंक पाने वाले बैंकों को रेड जोन में शामिल किया गया है। इस श्रेणी में इंडियन ओवरसीज बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया को 37-37 अंक मिले हैं। यूको बैंक को 35, भारतीय स्टेट बैंक को 32, केनरा बैंक को 27 अंक मिले हैं। आईडीबीआई बैंक, बंधन बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक को 26-26 अंक मिले हैं। इनके अलावा भी कुछ बैंक रेड जोन में शामिल हैं।
रेड जोन के बैंकों को लक्ष्य पूरा करने की सख्त हिदायत
विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने राज्य के औसत प्रदर्शन यानी 38.25 प्रतिशत से कम उपलब्धि हासिल करने वाले बैंकों और रेड जोन में शामिल प्रमुख बैंकों को ऋण वितरण की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने एसबीआई, पीएनबी, सीबीआई, बैंक ऑफ इंडिया, यूको बैंक और आईडीबीआई बैंक सहित अन्य बैंकों से वित्तीय वर्ष के बचे हुए महीनों में वार्षिक साख योजना के लक्ष्यों को मिशन मोड में पूरा करने को कहा।
उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई कि राज्य में बड़ी मात्रा में जमा राशि रखने वाले कुछ प्रमुख बैंकों का साख-जमा अनुपात 50 प्रतिशत से कम है। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता की जमा पूंजी को बिहार के कृषि क्षेत्र, एमएसएमई, स्टार्टअप और बुनियादी ढांचे के विकास के लिए ऋण के रूप में वापस निवेश किया जाना चाहिए, ताकि राज्य की आर्थिक प्रगति को और गति मिल सके।
ऋण आवेदनों की लंबित प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश
विकास आयुक्त ने बैंकों को ऋण आवेदनों के लंबित मामलों का जल्द निपटारा करने की हिदायत दी। उन्होंने विशेष रूप से किसान क्रेडिट कार्ड, पीएम विश्वकर्मा और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों से जुड़ी योजनाओं में ऋण आवेदन खारिज होने की दर न्यूनतम रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पात्र लाभार्थियों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने और राज्य के आर्थिक विकास को गति देने के लिए बैंकों को अपनी जिम्मेदारी प्रभावी ढंग से निभानी होगी। बैठक में वित्त विभाग के प्रधान सचिव, राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) के मुख्य संयोजक, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के विभिन्न बैंकों के वरिष्ठ महाप्रबंधक तथा राज्य सरकार के संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।