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मांग : जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा- केंद्र सरकार में सहयोगियों को मिले सम्मान
Sat, 12 Jun 2021 10:57 PM IST
योगेश साहू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना।
Published by: योगेश साहू
Updated Sat, 12 Jun 2021 10:57 PM IST
सार
केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के बीच नीतीश के बाद पार्टी अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने भी इस संबंध में बयान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में जद(यू) दूसरा सबसे बड़ा घटक है।
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आरसीपी सिंह (फाइल फोटो)
- फोटो : Facebook
विस्तार
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) ने शनिवार को कहा कि केंद्रीय मंत्रिपरिषद में राजग के भागीदारों को 'सम्मानित' हिस्सा मिलना चाहिए। इसके बाद सियासी हलकों में केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा हवा मिल गई है। बहरहाल, केंद्र में मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा के बीच नीतीश के बाद पार्टी अध्यक्ष आरसीपी सिंह ने भी इस संबंध में बयान दिया है।
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उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में जद(यू) दूसरा सबसे बड़ा घटक है। इस साल की शुरुआत में अपने कार्यकाल की समाप्ति से कुछ पहले मुख्यमंत्री द्वारा पार्टी के शीर्ष पद को छोड़ने के बाद सिंह जद (यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष बने थे।
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एक सवाल के जवाब में सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि हम राजग का हिस्सा हैं... (केंद्र में नरेंद्र मोदी नेतृत्व वाली सरकार में) सभी घटक सम्मानित हिस्से के हकदार हैं। लोकसभा में 16 सांसदों वाला जद(यू) क्या केंद्रीय मंत्रिमंडल के संभावित विस्तार में अपने लिए सम्मानित हिस्से की मांग करेगा, यह पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मांग करने का सवाल कहां से आ गया? यह समझने की बात है। यह स्वाभाविक रूप से होना चाहिए।
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जद(यू) प्रमुख का बयान केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की अटकलों के बीच आया है। ऐसे में राजग से शिवसेना के बाहर होने के बाद संसद में जद(यू) भाजपा का सबसे बड़ा सहयोगी है। जद (यू) के राज्यसभा में पांच सदस्य हैं। केंद्र में अपनी बदौलत बहुमत हासिल करने के कारण मंत्रिमंडल में भाजपा द्वारा सहयोगी दलों के केवल एक सदस्य को मौका दिए जाने से उस समय कुमार नाखुश थे।
खैर, कोरोना के कारण देश के बदलते हालात के बीच उत्तर प्रदेश से लेकर पश्चिम बंगाल पर सियासी माहौल गर्म है। ऐसी परिस्थितियों में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में यदि जदयू को कुछ और अधिक भागीदारी मिल पाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।