PATNA HC: एडवोकेट एसोसिएशन का चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न, आज आएंगे परिणाम
पटना उच्च न्यायालय के एडवोकेट एसोसिएशन का चुनाव शांतिपूर्ण संपन्न हो गया। इसमें 30 पदों की उम्मीदवारी के लिए कुल 148 उम्मीदवारों ने अपनी दावेदारी पेश की। 3904 मतदाताओं के बीच कुल 52 बूथों पर लगभग 68.3 फीसदी मतदान हुए।
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विस्तार
उपाध्यक्ष पद की प्रत्याशी छाया मिश्रा
पूर्व संयुक्त सचिव और उच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता छाया मिश्रा उपाध्यक्ष पद की प्रत्याशी हैं जिनसे अमर उजाला ने बात की। छाया मिश्रा का कहना है कि वह पूर्व में संयुक्त सचिव रह चुकी हैं,उन्हें काम करने का बेहतर अनुभव है। इसलिए चुनाव जीतने के बाद वह एडवोकेट एसोसिएशन के लिए बहुत काम करेंगीं। उन्होंने कहा कि सबसे पहले लॉ के नए बच्चों को मिलने वाले स्टैपन को 25 हजार करवाउंगी। ग्रुप समूह का बीमा करवाउंगी। उन्होंने कहा मुख्य रूप से राजस्थान में लागू प्रोटेक्शन एक्ट को यहां प्रोवाइड करवाउंगी।
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार रविन्द्र कुमार चौबे
अध्यक्ष पद की उम्मीदवारी का दावा कर रहे रविन्द्र कुमार चौबे का कहना है कि आज तक जितने भी हमारे अध्यक्ष हुए वे हमारे अधिवक्ताओं के साथ कल्याण की बातें कह कर भी उन्होंने सिर्फ झूठे कल्याण का वादा किया और आज तक उन्हें ठगते रहे हैं। आज जब हमारी कमिटी बनेगी उस कमिटी में सही ढंग से अधिवक्ताओं के कार्य होंगे। उनकी समस्याओं का निदान करने के लिए सदैव तत्पर रहूंगा। उन्होंने कहा कि यहां ऐसे भी अधिवक्ता हैं जो बार काउन्सिल के अधिवक्ता हैं और आज अध्यक्ष पद के उम्मीदवार बने हुए हैं, कल वे मुखिया के चुनाव में भी खड़े रहेंगे तो लोग अपनी समस्या किसको सुनायेंगे। हाई कोर्ट में आये दिन समस्याओं को झेलना पड़ता है।
संयुक्त सचिव के पद की दावेदार रंजना श्रीवास्तव
संयुक्त सचिव के पद की दावेदारी करने वाली रंजना श्रीवास्तव का कहना है कि मैं अपने जूनियरों और साथ में काम करने वाले अधिवक्ताओं की समस्याओं को दूर करने की कोशिश करूंगी।यहां महिलाओ के बैठने की एक गंभीर समस्या है जिसे मैं दिलवाने की कोशिश करूंगी। साथ ही हमारे अधिवक्ता भाईयों और बहनों को मेडिक्लेम नहीं मिलता है जिसे दिलवाने की कोशिश करूंगी। रंजन श्रीवास्तव का यह भी कहना है कि कोरोना काल में बहुत से साथियों की मौत हो गई जिनके परिवार वालों के लिए भी हम कुछ करेंगे।
महासचिव पद के उम्मीदवार अंगद कुंवर
महासचिव पद के उम्मीदवार अंगद कुंवर का कहना है कि हाई कोर्ट के जितने भी अधिवक्ता हैं सभी काफी समझदार हैं, सभी बुद्धिजीवी वर्ग हैं। सब लोग सोच समझ कर वोट देते हैं। जो काम करने वाले होते हैं उन्हीं को ये लोग जीत दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि जिन्हें दस वोट नहीं आता है वह यहां आकर माहौल खराब करते हैं। उन्होंने कहा कि जीतने के बाद यहां का इन्फ्रास्ट्रक्चर को बदल देंगे। हमारे पास पूरा विजन है। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं को किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होने दूंगा।
संजीव मिश्रा
संयुक्त सचिव के पद की दावेदारी करने वाले संजीव मिश्रा का कहना है कि मैं लीगल कार्य के अलावे सामाजिक कार्य भी करता हूं। उन्होंने कहा कि मैं घर-घर गीता जन जन गीता अभियान चलाता हूं। मैं जीतने के बाद अधिवक्ताओं के बैठने,शौचालय, वैसे दिवंगत अधिवक्ताओं जिनका रुपया अब तक निकल नहीं पाया है उनसबों के हित के लिए काम करूंगा।
उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार अनुज कुमार श्रीवास्तव
उपाध्यक्ष पद के उम्मीदवार अनुज कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि अधिवक्ताओं के बैठने के लिए सीट नहीं हैं। दो साल पूर्व भी चुनाव हुए थे जिसमें बहुत कुछ सुधार हुए लेकिन अभी भी कुछ काम बच गए हैं जिसका विकास अब जीतने के बाद किया जायेगा।
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार कौशलेश चौधरी
अध्यक्ष पद के उम्मीदवार कौशलेश चौधरी का कहना है कि सामजिक सुरक्षा के लिए प्रयास करूंगा, आकस्मिक कोष की व्यवस्था करवाने की कोशिश की जाएगी। वकीलों की सुरक्षा कैसे हो इसपर ध्यान दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि अधिवक्ताओं के बैठने की समस्या है और उधर नया भवन भी बन कर तैयार हो गया है। लेकिन वहां बिजली का कनेक्शन नहीं किया गया है। इसलिए मेरी कोशिश यह रहेगी कि बिजली और पानी वहां फ्री में उपलब्ध हो सके।
महिला अधिवक्ता से जानें क्या हैं महिला अधिवक्ताओं की समस्याएं
पटना उच्च न्यायालय के एडवोकेट एसोसिएशन के हो रहे चुनाव के बीच अमर उजाला ने कुछ वैसी महिला अधिवक्ताओं से भी बातचीत की जो उम्मीदवार नहीं हैं। अमर उजाला का सवाल यह है कि क्या चुनाव जीतने के लिए जिस तरह के दावे और वादे किये जा रहे हैं वे दावे चुनाव जीत जाने के बाद धरातल पर उतर पाएंगे क्या? इस संबंध में उच्च न्यायालय की पंचायती राज्य विभाग की पैनल अधिवक्ता श्वेता सिंह का कहना है कि यहां महिलाओं के लिए परेशानी ही परेशानी है। महिलाओं के लिए शौचालय की साफ सफाई की समुचित व्यवस्था नहीं है। कार पार्किंग की गंभीर समस्या है। परेशानी यह है कि चार पार्किंग के अभाव में हमलोगों को महिला आयोग, म्यूजियम या फिर भाजपा कार्यालय के पास अपनी कार पार्किंग करनी पडती है। और फिर वहां से पैदल आना पड़ता है। यह समस्याज से नहीं है। इसके अलावे सीनियर अधिवक्ता शैली कुमारी सहित कई महिला अधिवक्ता ने भी इस बात को कहा कि शौचालय की व्यवस्था है लेकिन उसे भी एक दायरे में रखना जरुरी है। हम पुरुषों के साथ काम जरुर करते हैं लेकिन हमें उतने अधिकार आज भी नहीं हैं जितने होने चाहिए।