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बिहार में चुनाव से पहले ही बिखरने लगा एनडीए

Mon, 24 Aug 2015 05:19 PM IST
Updated Mon, 24 Aug 2015 05:19 PM IST
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NDA in big trouble before election

बिहार में चुनावों से पूर्व ही भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए पर संकट के बादल खड़े हो गए हैं। उसके सहयोगी दल ही उसकी मुसीबत बन रहे हैं। पप्पू यादव के बाद अब लोजपा और आरएलएसपी ने भी अब भाजपा को जल्द से जल्द सीटों के बंटवारे की घोषणा करने का अल्टीमेटम दे दिया है।

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दोनों पार्टियों की ओर से सोमवार को पटना में संयुक्त प्रेस कान्फ्रेंस कर भाजपा पर निशाना साधा गया। इस दौरान भाजपा नेताओं पर अकेले लड़ने और आक्रामक बयान देने का आरोप भी लगाया गया।
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विधानसभा चुनावों से पूर्व ही बिहार में भाजपा की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। लोकसभा चुनावों में बिहार की 30 सीटों पर लड़कर 27 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली भाजपा को सहयोगी दल इस बार इतनी छूट न देने की फिराक में हैं।
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हफ्तेभर में करें सीटों का बंटवारा

NDA in big trouble before election

यही कारण है कि 243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में इस बार भाजपा के सहयोगी द उसे बैकफुट पर धकेलने की तैयारी कर चुके हैं। चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में एनडीए को बढ़त मिलती देख सहयोगी दलों ने ज्यादा से ज्यादा सीटों पर दावा ठोंकना शुरू कर दिया है।

सूत्रों की मानें तो बिहार में एनडीए के प्रमुख घटक राम विलास पासवान और उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टियों ने भाजपा को 102 सीटों पर लड़ने और बाकी सीटें सहयोगियों को छोड़ने की नसीहत दे डाली है।

जानकारों की मानें तो राम विलास पासवान की लोजपा ने 75 और उपेन्द्र कुशवाहा की आरएलएसपी ने 67 सीटों पर अपना दावा ठोंक दिया है। वहीं पूर्व मुख्‍यमंत्री जीतन राम मांझी का हिंदुस्तान अवाम मोर्चा भी 40 सीटों पर चुनाव लड़ने के लिए ताल ठोक रहा है।

जबकि लालू यादव के दाहिने हाथ रहे पप्पू यादव भी अपनी पार्टी के साथ मैदान में हैं और वो भी एनडीए की छतरी तले ही आना चाहते हैं। ऐसे में कुछ सीटों पर उनकी भी दावेदारी रहेगी। जबकि भाजपा खुद अच्छे संकेत देख 150-160 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है।

सीएम उम्‍मीदवारी पर भी फंस सकता है पेंच

NDA in big trouble before election

लेकिन उसकी राह में सबसे बड़ा रोड़ा उसके ये दोनों सहयोगी दल ही हैं जो केन्द्र में उसकी सरकार में साझीदार भी हैं। बड़ी बात ये है कि दोनों ही पार्टियों के नेता खुद को मुख्यमंत्री पद की रेस में भी शामिल कर रहे हैं।

केन्द्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएसपी तो बकायदा उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्‍मीदवार बनाने की मांग कर चुकी है। वहीं दो दिन पहले लोक जनशक्ति पार्टी अध्यक्ष राम विलास पासवान तो पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के बहाने अपना नाम भी सीएम उम्‍मीदवार के तौर पर उछाल चुके हैं।

अब दोनों ही पार्टियों ने भाजपा को एक हफ्ते में सीटों के बंटवारे की घोषणा करने का अल्टीमेटम भी दे डाला है। ऐसे में देखना रोचक होगा कि भाजपा कैसे इस मुश्किल चुनौती से निपट पाती है।

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