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Fulwari Rape : राष्ट्रीय आयोग की सदस्य ने पुलिस की जांच पर उठाए सवाल, पूछा- दो बच्चियों से एक ने कैसे किया रेप

Wed, 17 Jan 2024 04:09 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Wed, 17 Jan 2024 04:09 PM IST
सार

Bihar : सरकार का पुलिस पर नियंत्रण नहीं है। पुलिस सही से काम नहीं कर रही है। अगर समय रहते पुलिस अपनी कार्रवाई सही ढंग से की होती तो फुलवारी शरीफ में दो नाबालिग लड़कियों के साथ जो घटना हुई वह न हुई होती। 
 

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National Scheduled Caste Commission member targeted government, Government has no control over Bihar police.
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य डॉ. अंजू बाला। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

फुलवारी शरीफ में दो लड़कियों के साथ हुए रेप की घटना को 'अमर उजाला' ने प्रमुखता से प्रकाशित किया, जिसमें इस बात पर बल दिया गया था कि इस घटना को अंजाम देने वाले एक नहीं बल्कि एक से अधिक लोग हैं। लेकिन पटना पुलिस यही कहती रही कि इस घटना में आरोपी सिर्फ एक है। अब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य डॉ. अंजू बाला भी यही कह रही हैं कि आरोपी एक नहीं बल्कि एक से अधिक हैं। उन्होंने बिहार सरकार और सरकार के पुलिस पर हमला करते हुए कहा कि सरकार का पुलिस पर नियंत्रण नहीं है। पुलिस सही से काम नहीं कर रही है। अगर समय रहते पुलिस अपनी कार्रवाई सही ढंग से की होती तो फुलवारी शरीफ में दो नाबालिग लड़कियों के साथ जो घटना हुई वह न हुई होती। डॉ. अंजू बाला ने कहा कि यह पुलिस प्रशासन की और बिहार सरकार की गलती है।

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दो लड़कियों के साथ हुई थी घटना 
फुलवारीशरीफ थाना क्षेत्र के एक गांव की रहने वाली दो सहेलियां एक साथ लापता हो गईं थी। उनमें एक की उम्र लगभग 10 वर्ष और दूसरी की आठ साल थी। दोनों अपने-अपने घर के लिए जलावन लाने निकली थीं। दोनों के लापता होने के बाद परिवार वालों ने उनकी खोजबीन शुरू की, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिला। अगले दिन दोनों लापता सहेलियों में एक का शव एक चवर में मिला, जहां दूसरी बच्ची बदहवास पड़ी हुई थी। ग्रामीणों के द्वारा सूचना देने पर फुलवारीशरीफ थाने की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची। पुलिस ने घायल बच्ची को इलाज के लिए पटना एम्स में भर्ती कराया, जहां उसका इलाज चल रहा है।
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यह दावे भी हुए सच 
उसी गांव में एक 73 साल की अधेड़ महिला के साथ रेप और फिर उसकी निर्मम तरीके से हत्या की गई थी। उस घटना में भी शुरूआती समय में पुलिस का कहना था कि रेप नहीं हुआ है लेकिन 'अमर उजाला' इस बात का दावा करती रही कि उस अधेड़ महिला के साथ भी घिनौना काम किया गया था। 'अमर उजाला' के इस दावे को पुलिस तब तक गलत ही मानती रही लेकिन अब आये जांच रिपोर्ट में 'अमर उजाला' के उस दावे को पुलिस ने सही का मोहर लगा दिया। जांच रिपोर्ट ने माना कि सिन्दुनी गांव की 73 वर्षीय की महिला के साथ अपराधियों ने पहले निर्भया जैसा दुष्कर्म किया और फिर उसकी    निर्दयतापूर्वक हत्या कर दी थी।
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पीड़िता और उसके पिता ने भी कहा-आरोपी एक नहीं दो 
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य डॉ. अंजू बाला ने बताया कि पुलिस क्या छुपाना चाहती है किसे बचाना चाहती है यह मुझे नहीं पता लेकिन जब कल हमने डीएम और एसपी के साथ मीटिंग किया तो यह बात मैंने उनके सामने रखा है। मैंने डीएम और स्पीकर को कहा कि जो बच्ची एम्स में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है, उसके पिता का कहना है कि कोई अकेला आदमी इस घटना को अंजाम नहीं दे सकता है। इसके साथ कोई और भी व्यक्ति है जो इस घटना में शामिल था। डॉ. अंजू बाला का कहना है कि पुलिस का कहना है कि आरोपी एक है जबकि बच्ची और उसके पिता ने मुझको बताया कि आरोपी एक नहीं बल्कि दो हैं। अगर आरोपी दो हैं तो फिर आने वाले समय में इलाजरत बच्ची के जान को खतरा हो सकता है। डॉ. अंजू बाला ने कहा कि जो आरोपी बाहर घूम रहा है वह एविडेंस मिटाने के उद्देश्य बच्ची पर हमला कर सकता है। इसलिए पुलिस इस मामले पर ध्यान देते हुए गिरफ्तार किए गए आरोपी को रिमांड पर लेकर उससे कड़ाई से पूछताछ कर इस घटना में शामिल दूसरे आरोपी के बारे में जानकारी हासिल कर उसे तुरंत गिरफ्तार करे। उन्होंने कहा कि इस मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में चलाकर दोनों आरोपी को फांसी की सजा का प्रावधान कराया जाय।


पुलिस पर नियंत्रण नहीं होता तो छोड़ दीजिये कुर्सी 
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग की सदस्य डॉ. अंजू बाला का कहना है कि पुलिस जिस तरह से गिरफ्तार किए गये शख्स को साइको बता रही है और यह भी कह रही है कि उसने पहले भी एक 73 साल की महिला की रेप कर हत्या कर चूका है तो फिर पुलिस ने उसको तत्काल उस घटना के बाद ही गिरफ्तार क्यों नहीं किया। अगर वह उस समय गिरफ्तार हो गया होता तो आज यह दूसरी घटना नहीं होती। उन्होंने पुलिस प्रशासन और सरकार पर हमला करते हुए कहा कि इन मामलों को देखते हुए यह स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन की यहां गलती है और बिहार सरकार की गलती है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार अपने पुलिस विभाग पर कंट्रोल नहीं कर पा रही है। अगर सरकार पुलिस को नियंत्रण में रखती तो आज जो घटनाएं घटी है वह नहीं होती। उन्होंने सरकार को स्पष्ट रूप से कहा कि पुलिस पर नियंत्रण कीजिए और अगर ऐसा नहीं कर पा रहे हैं तो आप अपनी कुर्सी छोड़ दीजिये।

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