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Bihar News: जंजीरों से आजादी! 21 दिन के आंदोलन के बाद खुला स्कूल का ताला, गांव ने जीत का जश्न मनाया
Fri, 23 Jan 2026 12:42 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वैशाली
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Fri, 23 Jan 2026 12:42 PM IST
सार
वैशाली जिले के गोरौल प्रखंड स्थित भटौलिया गांव में ग्रामीणों के 21 दिनों के आंदोलन के बाद उत्क्रमित मध्य विद्यालय का ताला खुल गया। जमीन दान होने के बावजूद वर्षों से रजिस्ट्री नहीं होने के कारण स्कूल का विकास रुका हुआ था, जिससे नाराज ग्रामीणों ने विद्यालय बंद कर दिया था।
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स्कूल के बाहर आंदोलन करते हुए लोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
वैशाली जिले के गोरौल प्रखंड अंतर्गत भटौलिया गांव में शिक्षा को आज़ाद कराने की एक अनोखी और ऐतिहासिक लड़ाई आखिरकार सफल हो गई। ग्रामीणों के 21 दिनों के लंबे आंदोलन के बाद उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलिया का ताला खुल गया। वर्षों से जंजीरों में जकड़ी शिक्षा ग्रामीणों के संघर्ष के बाद मुक्त हुई तो पूरे गांव में जश्न का माहौल देखने को मिला। फूल-मालाओं, ढोल-नगाड़ों और गाजे-बाजे के साथ ग्रामीण विद्यालय परिसर पहुंचे और बंद पड़े स्कूल का ताला खोला गया। इस ऐतिहासिक क्षण के साक्षी पूरा गांव बना, वहीं स्कूल खुलते ही बच्चों की खुशी देखते ही बन रही थी।
मामला उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलिया से जुड़ा है, जहां विद्यालय की जमीन गांव के ही ओमप्रकाश साह के पिता द्वारा दान में दी गई थी। इसके बावजूद वर्षों तक जिला प्रशासन जमीन की रजिस्ट्री नहीं करवा सका। रजिस्ट्री नहीं होने के कारण न तो विद्यालय भवन निर्माण के लिए फंड मिल पा रहा था और न ही किसी सरकारी योजना का लाभ विद्यालय को मिल सका।
वर्ष 2018 से ही जमीन मालिक और ग्रामीण लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काटते रहे। अधिकारियों से बार-बार जमीन की रजिस्ट्री कराने की मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रशासनिक उदासीनता से नाराज होकर ग्रामीणों ने विद्यालय के गेट में ताला जड़ दिया। विद्यालय में 21 दिनों तक ताला लटका रहा, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई। इस दौरान छात्रों को अस्थायी रूप से दूसरे विद्यालय में शिफ्ट किया गया। हालांकि, ग्रामीणों का आंदोलन जारी रहा और आखिरकार 21 दिनों बाद उनकी मांगें मान ली गईं।
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शनिवार की सुबह जैसे ही विद्यालय का ताला खोला गया, पूरा गांव उत्सव में बदल गया। ढोल-नगाड़ों के साथ ग्रामीण स्कूल पहुंचे और शिक्षकों व बच्चों का गर्मजोशी से स्वागत किया। स्कूल खुलने के बाद शिक्षक हों या छात्र, सभी के चेहरे पर मुस्कान साफ नजर आई। लंबे संघर्ष के बाद बच्चों की पढ़ाई फिर से अपने विद्यालय में शुरू हो गई है। विद्यालय खुलने के साथ ही ग्रामीणों को अब उम्मीद जगी है कि जल्द ही जमीन की रजिस्ट्री पूरी होगी और स्कूल का बेहतर भवन भी बनेगा। ग्रामीणों का कहना है कि उनका संघर्ष शिक्षा के भविष्य के लिए था, और आज उसी शिक्षा की जीत हुई है।
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मामला उत्क्रमित मध्य विद्यालय भटौलिया से जुड़ा है, जहां विद्यालय की जमीन गांव के ही ओमप्रकाश साह के पिता द्वारा दान में दी गई थी। इसके बावजूद वर्षों तक जिला प्रशासन जमीन की रजिस्ट्री नहीं करवा सका। रजिस्ट्री नहीं होने के कारण न तो विद्यालय भवन निर्माण के लिए फंड मिल पा रहा था और न ही किसी सरकारी योजना का लाभ विद्यालय को मिल सका।
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वर्ष 2018 से ही जमीन मालिक और ग्रामीण लगातार प्रशासनिक कार्यालयों के चक्कर काटते रहे। अधिकारियों से बार-बार जमीन की रजिस्ट्री कराने की मांग की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। प्रशासनिक उदासीनता से नाराज होकर ग्रामीणों ने विद्यालय के गेट में ताला जड़ दिया। विद्यालय में 21 दिनों तक ताला लटका रहा, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई। इस दौरान छात्रों को अस्थायी रूप से दूसरे विद्यालय में शिफ्ट किया गया। हालांकि, ग्रामीणों का आंदोलन जारी रहा और आखिरकार 21 दिनों बाद उनकी मांगें मान ली गईं।
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शनिवार की सुबह जैसे ही विद्यालय का ताला खोला गया, पूरा गांव उत्सव में बदल गया। ढोल-नगाड़ों के साथ ग्रामीण स्कूल पहुंचे और शिक्षकों व बच्चों का गर्मजोशी से स्वागत किया। स्कूल खुलने के बाद शिक्षक हों या छात्र, सभी के चेहरे पर मुस्कान साफ नजर आई। लंबे संघर्ष के बाद बच्चों की पढ़ाई फिर से अपने विद्यालय में शुरू हो गई है। विद्यालय खुलने के साथ ही ग्रामीणों को अब उम्मीद जगी है कि जल्द ही जमीन की रजिस्ट्री पूरी होगी और स्कूल का बेहतर भवन भी बनेगा। ग्रामीणों का कहना है कि उनका संघर्ष शिक्षा के भविष्य के लिए था, और आज उसी शिक्षा की जीत हुई है।