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Bihar: लद्दाख में हादसे ने उजाड़ दिए दो परिवार, दीवार व छत गिरने से पश्चिमी चंपारण के दो राजमिस्त्रियों की मौत

Sun, 28 Jun 2026 11:36 AM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पश्चिमी चंपारण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पश्चिमी चंपारण Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Sun, 28 Jun 2026 11:36 AM IST
सार

रोजी-रोटी की तलाश में लद्दाख पहुंचे पश्चिम चंपारण के दो परिवारों के कमाऊ सदस्यों की एक हादसे ने जिंदगी छीन ली। इस दुर्घटना ने न केवल दो घरों के चिराग बुझा दिए, बल्कि प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

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Tragedy in Ladakh Two Masonry Workers from Bihar West Champaran Killed After Wall and Roof Collapse
दो राजमिस्त्रियों की दर्दनाक हादसे में हुई मौत - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

बेहतर रोजगार और परिवार का भविष्य संवारने की उम्मीद लेकर लद्दाख गए पश्चिमी चंपारण के दो राजमिस्त्रियों की एक दर्दनाक हादसे में मौत हो गई। पुराने मकान की मरम्मत के दौरान दीवार और छत अचानक भरभराकर गिर गई, जिसके मलबे में दबने से दोनों मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की खबर जैसे ही उनके पैतृक गांव पहुंची, दोनों परिवारों में कोहराम मच गया और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
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मृतकों की पहचान पश्चिम चंपारण निवासी मो. फारूक (पिता- कुरैश देवान) और साठी थाना क्षेत्र के लछनौता गांव के बौद्ध टोला पोस्ट- धमौरा निवासी ओजीर बैठा पिता- इमाम मियां के रूप में हुई है।
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राजमिस्त्री कर रहे थे मकान की मरम्मत
जानकारी के अनुसार, दोनों राजमिस्त्री लद्दाख के यंथाग गांव के पास एक पुराने मकान की मरम्मत का कार्य कर रहे थे। इसी दौरान मकान की जर्जर दीवार और छत अचानक ढह गई। हादसा इतना भीषण था कि दोनों मजदूर भारी मलबे के नीचे दब गए और उन्हें संभलने का कोई मौका नहीं मिला। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद दोनों मजदूरों को मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।
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परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्थ थे दोनों
बताया जा रहा है कि दोनों अपने-अपने परिवार के मुख्य कमाऊ सदस्य थे। उनकी असामयिक मौत से परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। गांव में मातम पसरा हुआ है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। दोनों के शवों के पैतृक गांव पहुंचने का इंतजार किया जा रहा है।

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इस हादसे ने दोनों गरीब परिवारों को गहरे आर्थिक संकट में डाल दिया है। ग्रामीणों और परिजनों ने बिहार सरकार और जिला प्रशासन से मृतकों के शवों को सुरक्षित उनके गांव तक पहुंचाने की व्यवस्था करने तथा पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा और हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है।

रोजगार की तलाश में घर से हजारों किलोमीटर दूर गए इन दोनों मेहनतकश मजदूरों की दर्दनाक मौत ने एक बार फिर प्रवासी श्रमिकों की सुरक्षा और कार्यस्थलों पर सुरक्षा मानकों को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
 
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