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Bihar : प्रख्यात चिकित्सक का दिल्ली में निधन, उत्तर बिहार की पहचान बने डॉक्टर बेगूसराय के रहने वाले थे
Sat, 17 Jan 2026 09:43 AM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jan 2026 09:43 AM IST
सार
Dr. DP Singh : 1990 के दशक में सर्जनों की कमी से जूझ रहे उत्तर बिहार में खास पहचान बनाने वाले डॉ. डीपी सिंह का दिल्ली में निधन हो गया। शव मुजफ्फरपुर आया तो बेगूसराय निकलने से पहले उन्हें भावभीनी विदाई दी गई।
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नम आंखों से दी गई विदाई
विस्तार
मुजफ्फरपुर जिले ने शनिवार सुबह उत्तर बिहार के सुप्रसिद्ध सर्जन डॉक्टर धीरेन्द्र प्रसाद सिंह को नम आंखों से दी। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव नेवला डीह (बेगूसराय) में संपन्न होगा। डॉ. डी.पी. सिंह का शुक्रवार देर रात दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया था। उनके निधन की खबर मिलते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। आज जब उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन के लिए लाया गया, तो ऐसा प्रतीत हुआ मानो पूरा शहर ठहर-सा गया हो।
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लंबी बीमारी के बाद दिल्ली में ली अंतिम सांस
मुजफ्फरपुर के विख्यात सर्जन डॉ. डी.पी. सिंह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। शुक्रवार को दिल्ली के एक अस्पताल में उपचार के दौरान उन्होंने अंतिम सांस ली। शुक्रवार देर रात उनके पार्थिव शरीर को मुजफ्फरपुर के बैरिया स्थित 'मां जानकी अस्पताल' लाया गया। शनिवार सुबह उनके पार्थिव शरीर को अंतिम दर्शन हेतु जूरन छपरा स्थित 'मॉडर्न नर्सिंग होम' और 'सदर अस्पताल' ले जाया गया, जहाँ चिकित्सा जगत से जुड़े लोगों और आम नागरिकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्हें उनके कलमबाग चौक स्थित आवास पर ले जाया गया, जहाँ से अंतिम संस्कार हेतु उन्हें बेगूसराय स्थित उनके पैतृक गांव ले जाया गया।
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उत्तर बिहार के चिकित्सा जगत में धाक
90 के दशक से ही चिकित्सा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय रहा है। वह न केवल मुजफ्फरपुर बल्कि पूरे उत्तर बिहार के सबसे प्रतिष्ठित सर्जनों में से एक थे। विशेष रूप से गोली लगने जैसी गंभीर स्थितियों में ऑपरेशन कर जान बचाने के लिए वह मरीजों और उनके परिजनों की पहली पसंद हुआ करते थे। आज भी कई लोग उन्हें अपनी जान बचाने वाला 'मसीहा' मानते हैं।
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शिष्यों और सहयोगियों के लिए थे मार्गदर्शक
इस मौके पर डॉ. गौरव ने उन्हें याद करते हुए बताया कि डॉ. डी.पी. सिंह न केवल एक उत्कृष्ट चिकित्सक थे, बल्कि सामाजिक न्याय के पुरोधा भी थे। वह अपने अधीनस्थ चिकित्सकों को सदैव सिखाते रहते थे। डॉ. गौरव ने कहा, "वे काम में त्रुटि होने पर हमें डांटते-फटकारते भी थे ताकि कोई चूक न हो, लेकिन उनका स्नेह और मार्गदर्शन हमेशा बना रहता था। इतने अनुभवी होने के बावजूद उनमें सीखने की ललक बनी रहती थी। आज उनकी कमी को पूरा उत्तर बिहार महसूस कर रहा है।"

नम आंखों से दी गई विदाई।

नम आंखों से दी गई विदाई।

नम आंखों से दी गई विदाई।