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Bihar News: मुजफ्फरपुर में धूमधाम से हुआ सिंदूर खेला, कई दशकों से निभाई जा रही आस्था की अनोखी रस्म

Thu, 02 Oct 2025 03:46 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Thu, 02 Oct 2025 03:46 PM IST
सार

Bihar News: आयोजन समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि दशकों से हरिसभा की दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को जोड़ने का प्रतीक रही है। विवाहित महिलाओं के अनुसार, सिंदूर खेला केवल एक रस्म नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है।

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Muzaffarpur Bihar news : sindoor khela culture is held on vijaydashmi unique custom by married women
सिंदूर खेला संस्कृति का अनोखा समागम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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मुजफ्फरपुर जिले में विजयादशमी के अवसर पर हरिसभा बंगाली दुर्गा पूजा समिति में इस बार भी भव्यता और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला। सौ साल से भी अधिक पुरानी परंपरा के तहत मां दुर्गा की विदाई की बेला पर सुहागिन महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सिंदूर खेला की रस्म निभाई।

लाल पार की बनारसी साड़ी पहनकर, माथे पर बड़ी बिंदी सजाकर महिलाएं थाल में सिंदूर और मिठाई लेकर मां दुर्गा के चरणों तक पहुंचीं। मां को सिंदूर अर्पित करने के बाद उन्होंने एक-दूसरे को भी सिंदूर लगाकर सौभाग्य और समृद्धि की मंगलकामना की। इस दौरान पूरा वातावरण लाल रंग से सराबोर हो उठा और मां की जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा।

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आयोजन समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि दशकों से हरिसभा की दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को जोड़ने का प्रतीक रही है। विवाहित महिलाओं के अनुसार, सिंदूर खेला केवल एक रस्म नहीं बल्कि आस्था और विश्वास का प्रतीक है। यह परंपरा न सिर्फ सुहागिनों के सौभाग्य के लिए मानी जाती है, बल्कि पतियों की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि का आशीर्वाद भी देती है।

पहले यह परंपरा केवल बंगाली समुदाय तक सीमित थी, लेकिन अब अन्य समुदाय की महिलाएं भी इसमें शामिल होकर इसे सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सद्भाव का उत्सव बना रही हैं। यही कारण है कि हरिसभा का सिंदूर खेला हर साल और भी रंगीन और भव्य होता जा रहा है। इस मौके पर सुहागिन महिलाओं ने मां दुर्गा की विशेष पूजा की और माता को सिंदूर अर्पित किया। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर धर्म और संस्कृति की इस अनूठी परंपरा को निभाया गया।

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