मुजफ्फरपुर में फर्जी जमीन म्यूटेशन का मामला: निलंबित सीओ महेंद्र शुक्ला गिरफ्तार, विधायक समेत नौ पर आरोप
मुजफ्फरपुर में 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन के कथित फर्जी दाखिल-खारिज मामले में निलंबित सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला और राजस्व अधिकारी करुण कुमार गिरफ्तार किए गए। प्राथमिकी में बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू समेत नौ लोगों पर साजिश के आरोप लगाए गए हैं।
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बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में पुश्तैनी जमीन के कथित फर्जी दाखिल-खारिज और भू-माफियाओं के साथ सांठगांठ के मामले में निलंबित मुशहरी अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला को अहियापुर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। केंद्र सरकार के सेवानिवृत्त अवर सचिव विजय कुमार की 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन के कथित फर्जी म्यूटेशन को लेकर बीते 29 अगस्त को अहियापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इस मामले में सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला समेत कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
सीओ की गिरफ्तारी के बाद सिटी एसपी मोहिबुल्लाह अंसारी और अहियापुर थानेदार इंस्पेक्टर शरत कुमार समेत कई पुलिस पदाधिकारियों ने उनसे पूछताछ की। शुक्रवार देर शाम अहियापुर पुलिस आरोपी सीओ को सदर अस्पताल ले गई, जहां उनकी मेडिकल जांच कराई गई। इसके बाद उन्हें कोर्ट में पेश किए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई। कोर्ट के आदेश के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार करने का आरोप
अहियापुर थाना क्षेत्र के शहबाजपुर निवासी विजय कुमार ने प्राथमिकी में बताया कि उनके पिता दिवंगत जितेंद्र प्रसाद शाही और दादा योगेंद्र प्रसाद शाही के नाम पर खाता संख्या 53 और खेसरा संख्या 403 दर्ज है। इस खाते और खेसरे से जुड़ी 70 डिसमिल पुश्तैनी जमीन को कथित तौर पर कूटरचित और फर्जी दस्तावेज तैयार कर हड़पने की साजिश रची गई।
शिकायत के अनुसार, वैशाली जिले के सलेमपुर कुचुनदास कोर्ट निवासी कृष्ण नंदन पासवान ने निबंधन कार्यालय के दस्तावेजों का हवाला देकर खुद को उक्त जमीन का खरीदार बताया। हालांकि, शिकायतकर्ता ने जब निबंधन कार्यालय से दस्तावेजों का सत्यापन कराया तो पता चला कि संबंधित दस्तावेज संख्या किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर दर्ज है और उसका इस जमीन से कोई संबंध नहीं है। आरोप है कि इसके बावजूद मुशहरी अंचल कार्यालय के कर्मियों की मिलीभगत से जमीन का अवैध तरीके से दाखिल-खारिज कर जमाबंदी कायम कर दी गई।
जमीन दूसरे लोगों के नाम पर बेचने का भी आरोप
प्राथमिकी के अनुसार, कथित तौर पर फर्जी तरीके से दाखिल-खारिज कराने के बाद भू-माफियाओं ने जमीन को दूसरे लोगों के नाम पर हस्तांतरित करना शुरू कर दिया। जमीन को अभिनव कुमार, अरविंद कुमार मेहता और तुषार सिंह के नाम पर बेचने के बाद दोबारा दाखिल-खारिज कराने का प्रयास किए जाने का आरोप है।
इस मामले में कुल नौ लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। इनमें बेलसंड के विधायक अमित कुमार रानू, उनके भाई अभिनव कुमार, तत्कालीन सीओ महेंद्र कुमार शुक्ला, राजस्व अधिकारी करुण कुमार, अंचल कर्मी सुनील कुमार और अनुज कुमार समेत अन्य लोग शामिल हैं। आरोप है कि सभी ने आपसी सांठगांठ और आपराधिक साजिश के तहत कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को अंजाम दिया।
एसडीपीओ ने की गिरफ्तारी की पुष्टि
इस कार्रवाई को लेकर एसडीपीओ टाउन-2 के प्रभारी हिमांशु कुमार ने बताया कि फर्जी तरीके से केवाला कराकर जमीन हासिल करने के मामले में अहियापुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसमें अंचल अधिकारी और अंचल कार्यालय के कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
उन्होंने बताया कि मामले में निलंबित मुशहरी अंचलाधिकारी महेंद्र कुमार शुक्ला और राजस्व अधिकारी करुण कुमार को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा कई अन्य लोगों को भी आरोपी बनाया गया है। फरार आरोपियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई की जा रही है।