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बिहार: शरद पूर्णिमा पर बाबा बैद्यनाथ धाम में उमड़े श्रद्धालु, हर-हर महादेव के जयकारों से गूंजा मंदिर

Sun, 25 Oct 2026 02:42 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुज्जफरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Sun, 25 Oct 2026 02:42 PM IST
सार

शरद पूर्णिमा पर रविवार को बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह पांच बजे मंदिर का पट खुलने के बाद भक्तों ने जलार्पण किया। श्रद्धालुओं ने सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर प्रशासन ने सुविधाओं के लिए विशेष इंतजाम किए।

 

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devotees gather at baba garibnath temple on sharad poornima special festival performed jalabhishek
शरद पूर्णिमा मंदिर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शरद पूर्णिमा का पर्व रविवार को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होकर अमृतमयी किरणें बिखेरता है। इस अवसर पर श्रद्धालु चंद्रमा की रोशनी में खीर रखकर भगवान को भोग लगाते हैं और अगले दिन सुबह इसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं।

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शरद पूर्णिमा के अवसर पर रविवार को बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। सुबह पांच बजे बाबा मंदिर का पट आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। पट खुलते ही श्रद्धालुओं की कतार मंदिर से कुछ दूर तक पहुंच गई। पूजा-अर्चना शुरू होते ही मंदिर परिसर में 'ओम नमः शिवाय' और 'बोल बम' के जयकारे गूंजने लगे।

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श्रद्धालु कतारबद्ध होकर बाबा मंदिर में प्रवेश करते रहे और जलार्पण किया। दिनभर पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी रहा। बाद में कतार छोटी होने से श्रद्धालुओं को राहत मिली और उन्हें जलार्पण के लिए अधिक देर तक इंतजार नहीं करना पड़ा। मंदिर प्रशासन की ओर से श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। इस दौरान भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला।

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बाबा गरीबनाथ धाम मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक ने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की पूजा करने और खीर का भोग लगाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दूध या खीर को चंद्रमा की रोशनी में रखने के बाद प्रसाद के रूप में ग्रहण किया जाता है।

इस अवसर पर मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की आराधना के साथ श्रीसूक्त, कनकधारा स्तोत्र और विष्णुसहस्रनाम का पाठ करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर में सुख-समृद्धि आती है और मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। शरद पूर्णिमा पर श्रद्धालु सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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