Bihar: भरत भूषण तिवारी मामले में मानवाधिकार आयोग सख्त, मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर एसपी से मांगी रिपोर्ट
भोजपुर के भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है। मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार अधिवक्ता डॉ. एस.के. झा द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर एसपी से चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट मांगी है।
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बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग (बीएचआरसी) ने संज्ञान लिया है। मामले को गंभीर मानते हुए आयोग ने बिहार के मुख्य सचिव, डीजीपी और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।
मानवाधिकार अधिवक्ता की याचिका पर हुई कार्रवाई
मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार मामलों के अधिवक्ता डॉ. एस.के. झा ने भोजपुर एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए आयोग ने संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अनंत मनोहर बदर 13 जुलाई 2026 को इस मामले की समीक्षा करेंगे।
बिलौटी गांव में हुई थी भरत भूषण तिवारी की मौत
गौरतलब है कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद पुलिस की कार्यशैली और कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठे थे तथा लापरवाही के आरोप भी सामने आए थे।
राष्ट्रीय और राज्य मानवाधिकार आयोग में दायर की गई याचिका
डॉ. एस.के. झा ने इस मामले को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग, पटना में अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं। याचिका में मांग की गई है कि एनकाउंटर में शामिल सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए और किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
दोषियों पर कार्रवाई और मुआवजे की मांग
याचिका में दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने तथा मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा देने की भी मांग की गई है।
आयोग के कदम का स्वागत
डॉ. एस.के. झा ने बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग की कार्रवाई का स्वागत करते हुए कहा कि आयोग राज्य में मानवाधिकारों की रक्षा को लेकर काफी सजग है। उन्होंने कहा कि आयोग पूरे मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है और उच्च अधिकारियों से जवाब मांगकर सख्त रुख अपनाया है।
चार सप्ताह में देनी होगी रिपोर्ट
मानवाधिकार आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित अधिकारियों से चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। अब सभी की नजरें 13 जुलाई को होने वाली अगली सुनवाई और आयोग की समीक्षा पर टिकी हुई हैं।