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Bihar: बिहार के इस अंचल कार्यालय की कार्यशैली बनी चर्चा का विषय, भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरीं सीओ; लोग परेशान

Fri, 21 Feb 2025 08:54 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Fri, 21 Feb 2025 08:54 PM IST
सार

Motihari News: मोतिहारी का कोटवा अंचल कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। यहां दाखिल-खारिज और अन्य भूमि संबंधी कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और अवैध उगाही के आरोप लग रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...।

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Motihari News: Working style of Kotwa Zone Office becomes topic of discussion allegations of corruption on CO
कोटवा अंचल कार्यालय भ्रष्टाचार मामला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार सरकार भले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कर रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। मोतिहारी जिले का कोटवा अंचल कार्यालय इन दिनों अपनी कार्यशैली को लेकर चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस अंचल में दाखिल-खारिज और अन्य भूमि संबंधी कार्यों में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और अवैध उगाही के आरोप लग रहे हैं। आम लोग इस स्थिति से त्रस्त हैं और भ्रष्टाचार के डर से या तो अंचल कार्यालय का रुख ही नहीं कर रहे या फिर रिश्वत देकर अपना काम करवाने को मजबूर हैं।

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दाखिल-खारिज में धांधली, डॉक्टर के मामले ने खोली पोल
कोटवा अंचल कार्यालय की मनमानी का सबसे ताजा मामला डॉ. रविंद्र नाथ ठाकुर का है। उन्होंने वाद संख्या 859/2024-25 के तहत दाखिल-खारिज के लिए आवेदन किया था। पहले कर्मचारी ने रिपोर्ट दी कि यह ज़मीन रैयती है और किसी प्रकार की रोक सूची में नहीं आती, जिसके बाद दाखिल-खारिज की अनुशंसा कर दी गई। लेकिन सीओ मोनिका आनंद ने खाता और खेसरा बदलकर इसे न्यायालय में विवादित दिखाते हुए आवेदन रिजेक्ट कर दिया।
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जब डॉ. ठाकुर ने अंचल कार्यालय में इस बारे में सवाल किया तो सीओ ने अपनी गलती स्वीकारते हुए सुधार करने की बात कही। इस पूरे मामले में डॉक्टर ने यह भी स्वीकार किया कि उनसे पैसे की मांग की गई थी। अगर एक प्रतिष्ठित डॉक्टर के साथ ऐसा हो सकता है, तो आम जनता को किस हद तक परेशान किया जाता होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
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एलपीसी आवेदन में भी मनमानी
एक अन्य मामला कोटवा बड़हरवा पूर्वी के निवासी पुनीत कुमार तिवारी का है। उन्होंने एलपीसी (भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र) के लिए आवेदन संख्या 287/2024-25 के तहत आवेदन किया, जिसे यह कहकर रिजेक्ट कर दिया गया कि शपथ पत्र पर हस्ताक्षर नहीं है।
 
पुनीत तिवारी का कहना है कि शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से हस्ताक्षर मौजूद था और इसी भूमि पर पूर्व सीओ ने 13 अप्रैल 2023 को एलपीसी निर्गत की थी, जिसकी संख्या 1106/23 है। सवाल यह उठता है कि अगर यह भूमि रैयती नहीं थी तो पूर्व सीओ ने कैसे एलपीसी जारी कर दिया?
 
अफसरशाही का डर, विरोध करने पर केस दर्ज
इस अंचल कार्यालय की कार्यशैली के खिलाफ आम लोग सीधे तौर पर आवाज उठाने से डर रहे हैं। क्षेत्र में चर्चा यह भी है कि एक मुखिया ने जब इस गड़बड़ी का विरोध किया था तो उनके खिलाफ बंधक बनाने का मामला दर्ज करवा दिया गया। इसके बाद से स्थानीय लोग रिजेक्शन के डर से चुपचाप रिश्वत देने को मजबूर हो गए हैं।
 
हर काम के लिए तय है रिश्वत की दर
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कोटवा अंचल में हर सरकारी काम की दर तय है। दाखिल-खारिज करवाने के लिए ₹10,000 से ₹15,000 और परिमार्जन (संशोधन) के लिए ₹30,000 से ₹35,000 तक वसूले जाते हैं। इसके अलावा अन्य कार्यों के लिए भी अलग-अलग रेट फिक्स हैं।
 
सीओ ने आरोपों को बताया निराधार
इस पूरे मामले में सीओ मोनिका आनंद ने कहा कि गलती से रिजेक्ट हुए मामलों को ठीक किया जा रहा है और बाकी सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि अगर किसी के पास प्रमाण हैं, तो उसकी शिकायत पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

 
बिहार सरकार ने दाखिल-खारिज अधिनियम 2011 और नियमावली 2012 के तहत आवेदन के 35 दिनों के भीतर निस्तारण का नियम बनाया है। लेकिन कोटवा अंचल में यह नियम सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह गया है। भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति भी इस कार्यालय में बेमानी साबित हो रही है।

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