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Bihar: शिक्षा विभाग की अजीबोगरीब कार्यशैली! एक तरफ शिक्षक पर कार्रवाई का आदेश तो दूसरी तरफ दी पदोन्नति; जानें
Wed, 05 Mar 2025 06:17 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मोतिहारी
Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो
Updated Wed, 05 Mar 2025 06:17 PM IST
सार
Motihari News: DEO संजीव कुमार ने भी स्वीकार किया कि यह गलत है। उन्होंने कहा कि एक आरोपी शिक्षक को प्रधानाध्यापक बनाना गलत फैसला है। हम पूरे मामले की जांच कराएंगे और उचित कार्रवाई होगी। पढ़ें पूरी खबर...।
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स्कूल की कक्षा में बनियान पहने सो रहे शिक्षक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मोतिहारी जिले में शिक्षा विभाग के अजीबोगरीब फैसले ने लोगों को हैरान कर दिया है। एक ओर शिक्षा विभाग एक शिक्षक पर अनुशासनहीनता और दागी आचरण का आरोप लगाकर उसके खिलाफ कार्रवाई का आदेश निकालता है, वहीं दूसरी ओर उसी शिक्षक को पदोन्नति देकर प्रभारी प्रधानाध्यापक बना दिया जाता है।
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शिक्षक परेशान, पर आरोपी को मिला प्रमोशन
जानकारी के मुताबिक, पूरा मामला चकिया प्रखंड के राजकीय मध्य विद्यालय विशुनपुरा का है, जहां नियोजित शिक्षक शंकर सिंह पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। विद्यालय के अन्य शिक्षक-शिक्षिकाएं उनके आचरण से परेशान हैं। शंकर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने विद्यालय की एक शिक्षिका पर अपने बेटे से शादी करने का दबाव बनाया। इसके अलावा विद्यालय परिसर में अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने और बिना शर्ट पहने खुले बदन बैठने जैसी घटनाओं के चलते उनका एक फोटो भी वायरल हुआ था। इस मामले में चकिया एसडीएम ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा था।
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जांच रिपोर्ट में दोषी ठहराया गया
इस पूरे मामले की जांच के लिए जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (DPO) को भेजा गया था। जांच अधिकारी ने अपने पत्रांक 168, दिनांक 9/12/24 के जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से लिखा कि विद्यालय के शिक्षकों, ग्रामीणों और छात्रों द्वारा लगाए गए आरोप सही प्रतीत हो रहे हैं। लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि जांच रिपोर्ट के बाद भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। शिक्षा विभाग ने इस रिपोर्ट को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
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मीडिया के सवालों के बाद निकला कार्रवाई का आदेश
जब इस मामले को लेकर अमर उजाला की टीम ने सवाल उठाए, तब जाकर डीपीओ स्थापना ने शिक्षक शंकर सिंह के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई का आदेश जारी किया। लेकिन इससे भी ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि जिस शिक्षक पर कार्रवाई का आदेश निकाला गया, उसी को विद्यालय का प्रभारी प्रधानाध्यापक बना दिया गया।
शिक्षा विभाग पर उठे सवाल
इस घटनाक्रम के बाद पूरा जिला हैरान है। लोग पूछ रहे हैं कि अगर शिक्षक दोषी थे तो उन्हें पदोन्नति क्यों दी गई? अगर वे निर्दोष थे तो उन पर कार्रवाई का आदेश क्यों निकला? इस मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) संजीव कुमार ने भी स्वीकार किया कि यह गलत है। उन्होंने कहा कि एक आरोपी शिक्षक को प्रधानाध्यापक बनाना गलत फैसला है। हम पूरे मामले की जांच कराएंगे और उचित कार्रवाई होगी।