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Bihar News: पश्चिम चंपारण में ठंड और कोहरे का कहर, जनजीवन ठप; बढ़ा प्रदूषण और स्वास्थ्य का खतरा

Tue, 06 Jan 2026 12:58 PM IST
तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुजफ्फरपुर Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Tue, 06 Jan 2026 12:58 PM IST
सार

पश्चिम चंपारण में कड़ाके की ठंड और घने कोहरे ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। तापमान में गिरावट, तेज सर्द हवाओं और कम दृश्यता के कारण यातायात, स्वास्थ्य और दैनिक गतिविधियों पर व्यापक असर पड़ा है।

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Bettiah bihar news Double attack of cold and fog life disrupted today news in hindi
सड़क पर घना कोहरा। फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम चंपारण जिले में कड़ाके की ठंड के चलते आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। लगातार गिरते तापमान के कारण लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। बीते 24 घंटों में न्यूनतम तापमान एक डिग्री की गिरावट के साथ 10 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। इसके साथ ही 8 से 12 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही सर्द हवाओं ने ठंड का असर और बढ़ा दिया है, जिससे सुबह और शाम के समय ठिठुरन तेज महसूस की जा रही है।

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सुबह के समय घना कोहरा छाए रहने से सड़क और रेल यातायात बुरी तरह प्रभावित रहा। मंगलवार को भी जिले के कई इलाकों में कोहरे का असर देखने को मिला। दृश्यता कम होने के कारण मुख्य सड़कों पर वाहन हेडलाइट जलाकर रेंगते नजर आए। कई स्थानों पर सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा और वाहन चालकों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

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दृश्यता घटकर 0.5 से 1 किलोमीटर तक सिमट गई
मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इस दौरान हवा की औसत रफ्तार लगभग 10 किलोमीटर प्रति घंटा रही। वहीं सापेक्ष आर्द्रता 80 से 85 प्रतिशत के बीच दर्ज की गई, जबकि दृश्यता घटकर 0.5 से 1 किलोमीटर तक सिमट गई। इन परिस्थितियों ने ठंड और कोहरे के असर को और गहरा कर दिया है।

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वरिष्ठ नागरिक शमीम आलम और शिक्षक दिलीप कुमार सहित अन्य जानकारों का कहना है कि फिलहाल इस मौसम से फसलों को कोई बड़ा नुकसान होने की आशंका नहीं है। उन्होंने बताया कि कुहासा पड़ने से गेहूं, सरसों सहित अन्य रबी फसलों को लाभ मिल रहा है। ऐसे मौसम में हल्की सिंचाई से फसलों की बढ़वार बेहतर होती है और उत्पादन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

ठंड से बचाव के लिए लोग लकड़ी, कचरा और टायर जलाकर अलाव जला रहे हैं। इससे निकलने वाला धुआं वातावरण को और अधिक प्रदूषित कर रहा है, जिसका सीधा असर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) पर पड़ रहा है। प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी सामने आ रही हैं।

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AQI स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक
सीएचसी मैनाटाड़ के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विजय कुमार चौधरी ने बताया कि ठंड के मौसम में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम के मरीजों की संख्या पहले से ही अधिक रहती है। इसके साथ ही AQI स्तर बढ़ने के कारण दमा और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या में भी लगातार इजाफा हो रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, 50 से ऊपर का AQI स्तर स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कोहरा, पुराने वाहन, उड़ते धूलकण, अलाव और फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं AQI बढ़ने के प्रमुख कारण हैं। वायु गुणवत्ता को नियंत्रित रखने के लिए धूल उड़ने वाले स्थानों पर नियमित पानी का छिड़काव, खुले में कचरा जलाने पर सख्ती और पुराने वाहनों की नियमित जांच जरूरी है।

फिलहाल मौसम के तेवर सख्त बने हुए हैं और आने वाले दिनों में ठंड व कोहरे के कारण लोगों की परेशानियां और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

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