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मुंगेर: एएनएम की अनदेखी से गई नवजात की जान, डॉक्टर के बिना चल रहे अस्पताल में रोते-बिलखते रहे परिजन
Fri, 30 Oct 2026 04:29 PM IST
मुंगेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
Published by: मुंगेर ब्यूरो
Updated Fri, 30 Oct 2026 04:29 PM IST
सार
बैजलपुर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के दौरान नवजात की मौत के बाद परिजनों ने हंगामा किया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात एएनएम पर समय पर इलाज और रेफर करने में लापरवाही का आरोप लगाया है।
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स्वास्थ्य केंद्र में मौजूद परिजन
विस्तार
मुंगेर के असरगंज प्रखंड के बैजलपुर अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव के बाद नवजात की मौत को लेकर परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने ड्यूटी पर तैनात एएनएम सरिता देवी पर लापरवाही बरतने, समय पर इलाज नहीं करने और दूसरे अस्पताल में रेफर करने में देरी करने का आरोप लगाया है। घटना के बाद स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्था और प्रसव के दौरान चिकित्सकीय सुविधाओं की उपलब्धता पर सवाल उठने लगे हैं।
मृत नवजात के माता-पिता दोनों दिव्यांग हैं। बच्चे की मां रुचि कुमारी सुनने और बोलने में असमर्थ हैं। बच्चे के पिता का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। केवल नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी थे। उनकी पत्नी को समय पर समुचित इलाज नहीं मिला और न ही दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया। परिजनों का दावा है कि समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई।
परिजन कंचन देवी ने आरोप लगाया कि प्रसव कक्ष में डिलीवरी कराने के बजाय सीधे बेड पर ही प्रसव कराया गया। उन्होंने कहा कि परिजनों ने एएनएम से मरीज को तत्काल दूसरे अस्पताल रेफर करने की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें इंतजार करने को कहा गया। परिजनों का यह भी आरोप है कि नवजात की मौत के बाद रोने पर एएनएम ने उन्हें डांटा और अस्पताल से भगा देने की धमकी दी।
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वहीं एक अन्य परिजन दीपा देवी ने बताया कि दोपहर 12 बजे तक बच्चा सुरक्षित था। इसके बाद मरीज की समुचित जांच नहीं की गई। परिजनों ने बार-बार डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों से मरीज की स्थिति की जानकारी मांगी तथा बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल भेजने की मांग की लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि रुचि कुमारी के दिव्यांग होने के कारण परिवार पहले से ही चिंतित था।
एएनएम ने आरोपों से किया इनकार
एएनएम सरिता देवी ने परिजनों के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि वे सो रही थीं और परिजनों से कहा था कि अभी प्रसव का समय नहीं हुआ है इसलिए सुबह तक इंतजार करें। उन्होंने किसी को डांटकर भगाने या धमकी देने के आरोपों से इनकार किया। एएनएम ने यह भी स्वीकार किया कि उस समय स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर मौजूद नहीं थे और वह अकेले ही मरीजों की देखरेख कर रही थीं।
अस्पताल में मौजूद नहीं थीं डॉक्टर
डॉक्टर मनीषा ने बताया कि मरीज के अस्पताल आने के समय वे वहां मौजूद नहीं थीं। डॉक्टर के अनुसार मरीज के अस्पताल आने या उसकी स्थिति के बारे में उन्हें कोई फोन अथवा सूचना नहीं मिली थी।
व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना की सूचना मिलने पर असरगंज थाना पुलिस,जनप्रतिनिधि और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। सभी ने मामले की जानकारी ली और परिजनों को समझाकर स्थिति शांत कराई। घटना के बाद बैजलपुर जैसे सुदूर ग्रामीण इलाके के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि रात के समय प्रसव संबंधी सेवाएं एएनएम के भरोसे चल रही हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और अस्पताल में 24 घंटे चिकित्सक की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
परिजनों ने कहा कि प्रसव के दौरान समय पर जांच, समुचित इलाज और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेफर करने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना नहीं करना पड़े। हालांकि नवजात की मौत के वास्तविक कारण और इलाज में कथित लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
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मृत नवजात के माता-पिता दोनों दिव्यांग हैं। बच्चे की मां रुचि कुमारी सुनने और बोलने में असमर्थ हैं। बच्चे के पिता का आरोप है कि अस्पताल में डॉक्टर मौजूद नहीं थे। केवल नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी थे। उनकी पत्नी को समय पर समुचित इलाज नहीं मिला और न ही दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया। परिजनों का दावा है कि समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं मिलने के कारण गर्भ में ही बच्चे की मौत हो गई।
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परिजन कंचन देवी ने आरोप लगाया कि प्रसव कक्ष में डिलीवरी कराने के बजाय सीधे बेड पर ही प्रसव कराया गया। उन्होंने कहा कि परिजनों ने एएनएम से मरीज को तत्काल दूसरे अस्पताल रेफर करने की गुहार लगाई, लेकिन उन्हें इंतजार करने को कहा गया। परिजनों का यह भी आरोप है कि नवजात की मौत के बाद रोने पर एएनएम ने उन्हें डांटा और अस्पताल से भगा देने की धमकी दी।
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वहीं एक अन्य परिजन दीपा देवी ने बताया कि दोपहर 12 बजे तक बच्चा सुरक्षित था। इसके बाद मरीज की समुचित जांच नहीं की गई। परिजनों ने बार-बार डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मियों से मरीज की स्थिति की जानकारी मांगी तथा बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल भेजने की मांग की लेकिन उनकी बात पर ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि रुचि कुमारी के दिव्यांग होने के कारण परिवार पहले से ही चिंतित था।
एएनएम ने आरोपों से किया इनकार
एएनएम सरिता देवी ने परिजनों के आरोपों का खंडन किया। उन्होंने कहा कि वे सो रही थीं और परिजनों से कहा था कि अभी प्रसव का समय नहीं हुआ है इसलिए सुबह तक इंतजार करें। उन्होंने किसी को डांटकर भगाने या धमकी देने के आरोपों से इनकार किया। एएनएम ने यह भी स्वीकार किया कि उस समय स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर मौजूद नहीं थे और वह अकेले ही मरीजों की देखरेख कर रही थीं।
अस्पताल में मौजूद नहीं थीं डॉक्टर
डॉक्टर मनीषा ने बताया कि मरीज के अस्पताल आने के समय वे वहां मौजूद नहीं थीं। डॉक्टर के अनुसार मरीज के अस्पताल आने या उसकी स्थिति के बारे में उन्हें कोई फोन अथवा सूचना नहीं मिली थी।
व्यवस्था पर उठे सवाल
घटना की सूचना मिलने पर असरगंज थाना पुलिस,जनप्रतिनिधि और ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे। सभी ने मामले की जानकारी ली और परिजनों को समझाकर स्थिति शांत कराई। घटना के बाद बैजलपुर जैसे सुदूर ग्रामीण इलाके के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रसव की व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं। परिजनों का कहना है कि रात के समय प्रसव संबंधी सेवाएं एएनएम के भरोसे चल रही हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और अस्पताल में 24 घंटे चिकित्सक की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
परिजनों ने कहा कि प्रसव के दौरान समय पर जांच, समुचित इलाज और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेफर करने की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना नहीं करना पड़े। हालांकि नवजात की मौत के वास्तविक कारण और इलाज में कथित लापरवाही की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।