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Bihar News: होली खेली तो होगी अनहोनी! मुंगेर के इस गांव में 400 साल से रंग पर पाबंदी

Tue, 03 Mar 2026 06:58 PM IST
मुंगेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर Published by: मुंगेर ब्यूरो Updated Tue, 03 Mar 2026 06:58 PM IST
सार

Bihar News: मुंगेर जिले के सजुआ पंचायत स्थित सती स्थान गांव में करीब 400 वर्षों से होली नहीं मनाई जाती। गांव में फागुन के महीने में कोई रंग-गुलाल या पकवान नहीं बनते, जबकि वैशाख में ‘विशुआ’ के दिन उत्सव मनाया जाता है।

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Holi Brings Misfortune This Munger Village Has Avoided Festival for 400 Years
मुंगेर जिले का गांव - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जहां मुंगेर जिले में 4 मार्च को होली की धूम रहेगी, वहीं यहां के असरगंज प्रखंड की सजुआ पंचायत का एक गांव ऐसा भी है, जहां ऐसा कुछ नहीं होगा। इसके पीछे वजह है यहां पिछले लगभग 400 वर्षों से चली आ रही होली नहीं मनाने की परंपरा। दरअसल, यह गांव ‘सती स्थान’ के नाम से जाना जाता है। यहां फागुन के पूरे महीने न तो रंग-गुलाल उड़ता है और न ही पुआ-पकवान बनते हैं।

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400 साल पुरानी है परंपरा
ग्रामीणों के अनुसार, यह परंपरा गांव के बीच स्थित सती स्थान मंदिर से जुड़ी एक प्राचीन मान्यता के कारण चली आ रही है। बताया जाता है कि करीब चार शताब्दी पूर्व गांव में होली के दौरान एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई थी। जब उसकी अर्थी उठी, तो उसकी पत्नी ने भी प्राण त्यागने का संकल्प लिया। ग्रामीणों का कहना है कि महिला अत्यंत दैविक शक्ति वाली थी और उसके शरीर में स्वयं अग्नि प्रकट हो गई। अंतिम समय में उसने गांववालों से दो वचन लिए पहला, गांव में कभी होली नहीं मनाई जाएगी; दूसरा, उसकी पुत्री से कोई जूठे बर्तन या अपमानजनक कार्य नहीं कराया जाएगा।

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ग्रामीणों ने आगे क्या बताया?
कहा जाता है कि महिला की मृत्यु के कुछ दिनों बाद गांववालों ने उसकी पुत्री से जूठे बर्तन मंगवाए। तभी कथित रूप से अनहोनी हुई और पुत्री भी अग्नि में समा गई। जहां मां-बेटी की समाधि बनी, वही स्थान आज सती स्थान मंदिर के रूप में पूजनीय है। ग्रामीण दुर्गी यादव, कपिल देव सिंह, शंकर यादव, कंपनी यादव और सुभाष यादव ने बताया कि उन्हें याद नहीं कि गांव में कभी होली खेली गई हो। कुछ वर्ष पूर्व एक व्यक्ति ने होली पर मालपुआ बनाने की कोशिश की, तो कढ़ाई से तेल उछलकर छप्पर में आग लग गई और घर जल गया। इसे लोग इस मान्यता से जोड़ते हैं।

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ससुराल में होली मना सकती हैं गांव की बेटियां
गांव की बेटियां ससुराल में होली मना सकती हैं, लेकिन गांव के पुरुष यदि वे बाहर रहते हों तो भी होली के दिन कोई उत्सव नहीं मनाते। यहां होली साधारण दिन की तरह गुजरती है। ग्रामीण वैशाख महीने में ‘विशुआ’ के दिन पुआ-पकवान बनाकर उत्सव मनाते हैं।

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