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ASI संतोष हत्याकांड: डेढ़ साल बाद आठ दोषी करार, सजा के बाद कोर्ट में हंगामा; पुलिसकर्मियों से भिड़े आरोपी
Mon, 24 Aug 2026 09:32 PM IST
मुंगेर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंगेर
Published by: मुंगेर ब्यूरो
Updated Mon, 24 Aug 2026 09:32 PM IST
सार
Bihar News: मुंगेर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में होली के दिन 2025 में डायल-112 के ASI संतोष कुमार सिंह की हत्या के मामले में अदालत ने आठ अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। सजा के बाद आरोपियों ने कोर्ट परिसर में हंगामा किया और पुलिसकर्मियों से उलझ गए।
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पुलिस हिरासत में आरोपी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने होली के दिन वर्ष 2025 में दो पक्षों के बीच हुए विवाद में डायल-112 के पुलिस पदाधिकारी सहायक अवर निरीक्षक (ASI) संतोष कुमार सिंह की हत्या के मामले में अदालत ने आठ अभियुक्तों को दोषी करार दिया है। एडीजे चतुर्थ कुमारी मनीषा की अदालत ने सोमवार को दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद सभी आठ अभियुक्तों को दोषी पाया। दोषियों की सजा के बिंदु पर 7 सितंबर को सुनवाई होगी।
विवाद शांत कराने पहुंचे थे ASI, शाम को फिर हुआ बवाल
मामला 14 मार्च 2025 का है। दोपहर करीब 2:05 बजे नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की सूचना पर डायल-112 के पुलिस पदाधिकारी एएसआई संतोष कुमार सिंह सिपाही दीपक कुमार के साथ मौके पर पहुंचे थे। दोनों ने मामला शांत कराया। शाम करीब 7:30 बजे गश्ती के दौरान दोनों पक्षों को फिर गाली-गलौज करते देखा गया।
लोहे की रॉड और धारदार हथियार से हमला
पुलिस पदाधिकारी संतोष कुमार सिंह एक पक्ष को समझाने के बाद दूसरे पक्ष के आंगन में पहुंचे। आरोप है कि वहां राजीव कुमार, रणवीर कुमार, राजू कुमार, गुड्डू कुमार, विकास कुमार, रेखा देवी, सरिता देवी और मौसम कुमारी ने एकजुट होकर लोहे की रॉड, दबिया, हुक और लात-मुक्कों से उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल संतोष कुमार सिंह को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां पारस अस्पताल, पटना में उनकी मौत हो गई। सिपाही दीपक कुमार की सूचना पर मुफस्सिल थाना में मामला दर्ज किया गया था।
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डेढ़ साल में आया फैसला
राज्य की ओर से लोक अभियोजक मुंगेर संजय कुमार सिंह ने मामले में बहस की। एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि यह मामला पुलिस महकमे के लिए बड़ी चुनौती था। पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान का सहारा लिया और अभियोजन पक्ष ने भी प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि स्पीडी ट्रायल के तहत करीब डेढ़ साल में अदालत ने आठ आरोपियों को दोषी करार दिया है।
सजा के बाद कोर्ट में आरोपियों का हंगामा
अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद सभी अभियुक्तों ने कोर्ट परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। पुलिसकर्मी जब उन्हें कोर्ट परिसर में बने हाजत में ले जाने लगे तो आरोपी पुलिसकर्मियों से उलझ गए। इस दौरान एएसआई विनोद कुमार, सिपाही विनोद कुमार झा और हवलदार बिंदेश्री मांझी को चोटें लगीं।
यह भी पढ़ें: सरकारी अफसर ने आंदोलनकारियों पर की आपत्तिजनक टिप्पणी; माफी मांगी, मगर CM नाराज
अतिरिक्त बल बुलाकर भेजा जेल
हंगामे के दौरान अभियुक्तों ने कैदी वाहन के शीशे भी तोड़ दिए। घायल हवलदार बिंदेश्री मांझी ने बताया कि सभी अभियुक्तों को सजा सुनाए जाने के बाद हाजत में ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया और समझाने पर पुलिसकर्मियों से हाथापाई करने लगे। बाद में सभी को कैदी वाहन में बैठाया गया, लेकिन आगे जाकर वाहन का शीशा तोड़ दिया गया।
एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि हंगामे के दौरान एक पुलिसकर्मी को चोट लगी। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर सभी अभियुक्तों को सुरक्षा के साथ जेल भेज दिया गया। दोषियों की सजा के बिंदु पर अब 7 सितंबर को अदालत में सुनवाई होगी।
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विवाद शांत कराने पहुंचे थे ASI, शाम को फिर हुआ बवाल
मामला 14 मार्च 2025 का है। दोपहर करीब 2:05 बजे नंदलालपुर स्थित एलआईसी कार्यालय के सामने दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की सूचना पर डायल-112 के पुलिस पदाधिकारी एएसआई संतोष कुमार सिंह सिपाही दीपक कुमार के साथ मौके पर पहुंचे थे। दोनों ने मामला शांत कराया। शाम करीब 7:30 बजे गश्ती के दौरान दोनों पक्षों को फिर गाली-गलौज करते देखा गया।
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लोहे की रॉड और धारदार हथियार से हमला
पुलिस पदाधिकारी संतोष कुमार सिंह एक पक्ष को समझाने के बाद दूसरे पक्ष के आंगन में पहुंचे। आरोप है कि वहां राजीव कुमार, रणवीर कुमार, राजू कुमार, गुड्डू कुमार, विकास कुमार, रेखा देवी, सरिता देवी और मौसम कुमारी ने एकजुट होकर लोहे की रॉड, दबिया, हुक और लात-मुक्कों से उन पर हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल संतोष कुमार सिंह को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां पारस अस्पताल, पटना में उनकी मौत हो गई। सिपाही दीपक कुमार की सूचना पर मुफस्सिल थाना में मामला दर्ज किया गया था।
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डेढ़ साल में आया फैसला
राज्य की ओर से लोक अभियोजक मुंगेर संजय कुमार सिंह ने मामले में बहस की। एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि यह मामला पुलिस महकमे के लिए बड़ी चुनौती था। पुलिस ने तकनीकी अनुसंधान का सहारा लिया और अभियोजन पक्ष ने भी प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि स्पीडी ट्रायल के तहत करीब डेढ़ साल में अदालत ने आठ आरोपियों को दोषी करार दिया है।
सजा के बाद कोर्ट में आरोपियों का हंगामा
अदालत से दोषी करार दिए जाने के बाद सभी अभियुक्तों ने कोर्ट परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। पुलिसकर्मी जब उन्हें कोर्ट परिसर में बने हाजत में ले जाने लगे तो आरोपी पुलिसकर्मियों से उलझ गए। इस दौरान एएसआई विनोद कुमार, सिपाही विनोद कुमार झा और हवलदार बिंदेश्री मांझी को चोटें लगीं।
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अतिरिक्त बल बुलाकर भेजा जेल
हंगामे के दौरान अभियुक्तों ने कैदी वाहन के शीशे भी तोड़ दिए। घायल हवलदार बिंदेश्री मांझी ने बताया कि सभी अभियुक्तों को सजा सुनाए जाने के बाद हाजत में ले जाया जा रहा था। इसी दौरान उन्होंने हंगामा शुरू कर दिया और समझाने पर पुलिसकर्मियों से हाथापाई करने लगे। बाद में सभी को कैदी वाहन में बैठाया गया, लेकिन आगे जाकर वाहन का शीशा तोड़ दिया गया।
एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि हंगामे के दौरान एक पुलिसकर्मी को चोट लगी। इसके बाद अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर सभी अभियुक्तों को सुरक्षा के साथ जेल भेज दिया गया। दोषियों की सजा के बिंदु पर अब 7 सितंबर को अदालत में सुनवाई होगी।