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Satta Ka Sangram: बेगूसराय की जनता का चुनावी मिजाज किधर? एनडीए या महागठबंधन! चर्चा में किसका सियासी शोर

Fri, 24 Oct 2025 09:09 AM IST
तरुणेंद्र चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बेगूसराय Published by: तरुणेंद्र चतुर्वेदी Updated Fri, 24 Oct 2025 09:09 AM IST
सार

Bihar Assembly ELectin 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर प्रदेश की राजनीति अपने चरम पर है। बेगूसराय की गलियों में हर दिन नए चेहरे, गठबंधन और राजनीतिक कहानियां जन्म ले रही हैं। अमर उजाला का चुनाली रथ सुबह की हल्की धूप के बीच चाय की चुस्कियों के साथ यहां स्थानीय लोगों के पास पहुंचा। इनकी जब्ज टटोली। चलिए बताते हैं किसने क्या कहा...?

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bihar assembly election 2025 Satta Ka Sangram Amar Ujala's election chariot reaches Begusarai, which way is it
बिहार विधानसभा चुनाव 2025। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार की राजनीति में इस वक्त चुनावी तापमान अपने उफान पर है। हर दिन नए चेहरे, नए गठजोड़ और दिलचस्प सियासी कहानियां बेगूसराय की  गलियों में गूंज रही हैं। यही वो धरती है, जहां राजनीति सिर्फ की नहीं जाती बल्कि जी जाती है। अमर उजाला का चुनावी रथ ‘सत्ता का संग्राम’ आज 24 अक्तूबर को पहुंचा है बेगूसराय में, जहां चौपालों में बहस जोरों पर है, नुक्कड़ों पर चर्चाओं का शोर है, और हर ज़ुबान पर बस एक सवाल “इस बार किसके साथ है बेगूसराय?” सुबह की चाय से लेकर शाम की पंचायत तक जनता का मूड लगातार बदल रहा है। तो आइए, चलते हैं उन गलियों में, जहां से तय होगी सत्ता की नई कहानी  सिर्फ ‘सत्ता का संग्राम’ पर।

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‘बेगूसराय की सियासत महागठबंधन की ओर’
चाय पर चर्चा के दौरान एक युवा महागठबंधन समर्थक ने कहा कि बिहार की सियासत महागठबंधन की ओर जाती हुई दिखाई दे रही है। उन्होंने दावा किया कि बेगूसराय की सभी सात विधानसभा सीटों पर महागठबंधन की जीत तय है।

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उनका कहना था कि राहुल गांधी का मिशन सिर्फ बिहार के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए है। महागठबंधन के नेताओं ने जनता का दुख-दर्द समझा है और लोगों से जुड़ने का काम किया है। हमारे नेता तेजस्वी यादव हैं, यह हम शुरू से मानते आए हैं। अब इसकी आधिकारिक घोषणा भी हो गई है। विपक्ष को हमने तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित करके करारा जवाब दिया है।

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‘बेगूसराय की सातों सीटों पर महागठबंधन जीतेगा’
बेगूसराय जिले की सभी सात सीटों पर महागठबंधन की जीत होगी। ऐसा कहना है एक अन्य महागठबंधन समर्थक का। उनका कहना है कि यहां अमिताभ भूषण के सामने कोई चुनौती नहीं है। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी कुछ भी बोल देते हैं। कभी कहते हैं कि तीन दिन में विश्वविद्यालय बनाएंगे, तो कभी हर सप्ताह ‘विक्रांत’ बनाने की बात करते हैं। लेकिन हकीकत में कुछ नहीं होता। तेजस्वी यादव ने जो कहा, वह करके दिखाया है। शिक्षकों की बहाली कराई गई है और जनता से किए वादे पूरे किए हैं।” उन्होंने आगे कहा, “पिछले 20 वर्षों से बिहार में भाजपा और जदयू की सरकार रही है, लेकिन कोई खास काम नहीं हुआ। हमारा नेता तेजस्वी यादव ही है।”

‘बेगूसराय में विकास हो रहा है, एनडीए फिर जीतेगा’

वहीं, एक एनडीए समर्थक ने कहा कि बेगूसराय को जो जरूरत है, वह सब मिल रहा है। पुल बन रहे हैं, सड़कें बन रही हैं। “जय नीतीश, जय मोदी” का नारा इसलिए है क्योंकि विकास हो रहा है। उन्होंने कहा, “अनाज मिला, शौचालय मिला, बिजली 125 यूनिट तक मिल रही है। अब क्या नहीं मिल रहा? जो जुल्मी और अपराधी हैं, वे मुख्यमंत्री नहीं बन सकते।” उन्होंने जिले की सातों सीटों पर एनडीए की जीत का दावा भी किया।

सोनू कुमार नाम के एक व्यक्ति ने कहा, “नीतीश कुमार और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जिले में लगातार विकास हो रहा है। बिहार की 14 करोड़ जनता नीतीश कुमार के साथ है। सरकार बेहतर तरीके से तभी चल सकती है जब नीतीश और मोदी दोनों साथ हों। अपराधों में कमी आई है।”

पिंटू सोनी ने कहा, “2005 से पहले खगड़िया पहुंचने में 2 से 3 घंटे लगते थे, अब सिर्फ 45 मिनट लगते हैं। नीतीश कुमार के नेतृत्व में जो जरूरतें थीं, वे पूरी हुई हैं। जो काम बाकी हैं, वे भी पूरे होंगे। आने वाले समय में युवाओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। उन्होंने एक करोड़ नौकरियां देने की बात कही थी, अब उसे पूरा करना चाहिए।”

ये भी पढ़ें-  Bihar Election: बिहार आने से पहले पीएम मोदी का महागठबंधन पर हमला, कहा- 'लठबंधन' को युवाओं की परवाह नहीं



‘एक विश्वविद्यालय होना चाहिए’

वहीं, छात्र दिव्यांश ने कहा कि जो विकास किया गया है, हम उसके साथ हैं। यहां की छात्रों-छात्राओं की मांग है कि बेगूसराय में एक विश्वविद्यालय होना चाहिए, लेकिन इस मुद्दे पर सभी पार्टियां सिर्फ बातें कर रही हैं। स्थानीय विधायक और सांसदों ने अब 35 कमरों वाला क्लास रूम बनवाया है, जबकि पहले एक भी क्लास रूम नहीं था। आजादी के बाद पहली बार छात्रों के कक्षाएं मिली हैं। इससे काफी राहत मिली है। पठन-पाठन कार्य आसान हुआ है।

इसी बीच, राजद के कार्यकाल के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर एक व्यक्ति ने सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि उस समय बिहार की हालत देखकर आज भी रूह कांप जाती है।

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