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सरकारी-प्राइवेट के खेल में मौत: एम्बुलेंस बदली तो मरीज पहुंची सरकारी डॉक्टर के प्राइवेट क्लीनिक, जिंदगी हारी

Tue, 10 Sep 2024 09:22 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Tue, 10 Sep 2024 09:22 PM IST
सार

Supaul News: सुपौल में सरकारी और प्राइवेट अस्पताल के खेल में प्रसूता की मौत हो गई। आरोप है कि हालत बिगड़ने के बाद प्रसूता को जबरन निजी अस्पताल की एंबुलेंस में भेज दिया गया। लेकिन क्लीनिक पहुंचने से पहले ही उसकी जान चली गई।

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Supaul: Pregnant woman died after changing ambulance from government hospital, family members create ruckus
मामले की जांच में जुटी पुलिस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सुपौल के लौकहा एपीएचसी से रेफर एक प्रसूता की मंगलवार को जिला मुख्यालय स्थित एक अवैध नर्सिंग होम में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद मृतका के परिजनों ने जमकर हंगामा किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर परिजनों को समझाया और शांति बहाल की। साथ ही पुलिस ने कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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जानकारी के मुताबिक, सदर प्रखंड के गढ़ बरुआरी पंचायत के वार्ड-12 निवासी शंकर कुमार की पत्नी सीता देवी (20) को सोमवार शाम प्रसव पीड़ा के कारण लौकहा एपीएचसी में भर्ती कराया गया था। मंगलवार सुबह उसने बच्चे को जन्म दिया। लेकिन बुखार की स्थिति में ड्यूटी पर तैनात एएनएम ने उसे सदर अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।
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ससुर दुखा तांती ने आरोप लगाया कि एपीएचसी से मिली सरकारी एंबुलेंस में जाते वक्त, परिजनों को जबरन एक निजी एंबुलेंस में सवार कर दिया गया। यह एंबुलेंस उन्हें जिला मुख्यालय स्थित एक निजी क्लीनिक ले गई। कुछ घंटों बाद, जब मरीज को दूसरी निजी एंबुलेंस में सवार करने का प्रयास किया गया, तो परिजनों ने देखा कि प्रसूता का शरीर ठंडा पड़ चुका था। इसके बाद हंगामा शुरू हो गया।
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वहीं, सूचना मिलने पर पुलिस ने परिजनों को समझाया और हंगामा शांत कराया। क्लीनिक पर डॉ. अभिषेक कुमार बच्चन का बोर्ड लगा हुआ था, जो सदर प्रखंड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी हैं। हालांकि, यह क्लीनिक पंजीकृत नहीं है। वहीं, क्लीनिक के कर्मी मामले पर टिप्पणी करने को तैयार नहीं हैं। इधर, सिविल सर्जन डॉ. ललन ठाकुर ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है। लेकिन उचित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए जांच की जाएगी।

 
इस घटना ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था पर सवाल खड़ा कर दिया है। साथ ही इस घटना से संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।
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