फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   kids change socity

बच्चों ने उठाया बाल विवाह रोकने का बीड़ा

Mon, 10 Feb 2014 02:01 PM IST
Updated Mon, 10 Feb 2014 02:01 PM IST
विज्ञापन
kids change socity

अमनी गांव के मुन्नी पासवान टोला पहुंचने पर संजो अपने हम उम्र दोस्तों के साथ पिट्ठो खेलते मिलीं। ठंड के कारण सलवार-कमीज़ पहने संजो ने अपना सर चादर से ढँक रखा था। लगभग चौदह साल की संजो को खेलते-कूदते देखने का मौका इस कारण मिल पाया क्योंकि वह बाल-वधु बनने से बच गई हैं। नहीं तो संजो के जिन हाथों में पिट्ठो खेल की कपड़े की गेंद थी उनमें चूड़ियां होतीं और मांग लाल सिंदूर से भरी होती।

विज्ञापन


बिहार के खगड़िया ज़िले की दो पंचायतों अमनी और बलहा के दर्जन भर गांवों में पिछले तीन सालों के दौरान ऐसी दसियों संजुओं का बचपन खोने से बचा है। बाल विवाह रोकने का काम ख़ुद बच्चों के प्रयास से सफ़ल हो रहे हैं। संजो की बात करें तो उसका बचपन लौटाने में उसकी ही हमउम्र काजल कुमारी का अहम योगदान है। जैसा कि संजो की मां ललिता देवी ने बताया भी।
विज्ञापन


शादी से जुड़े सवालों पर संजो तो गुमसुम ही रही लेकिन ललिता के अनुसार उन्हें बाल-विवाह के खतरों के बारे में जानकारी नहीं थी। दो बेटियों की शादी उन्होंने कम उम्र में ही कर दी थी।
विज्ञापन
विज्ञापन


लेकिन इस बार जब काजल ने बाल-पंचायत के बच्चों और गांव वालों के साथ मिलकर उन्हें समझाया तो ललिता ने बेटी की शादी रोक दी। बच्चों के ज़रिए इस पहल की शुरुआत साल 2011 में हुई। अंतरराष्ट्रीय संस्था सेव द चिल्ड्रेन ने अमनी और बलहा पंचायत में इसी के आसपास काम करना शुरु किया था।

समय के साथ संस्था का ‘बाल केंद्रित समुदाय आधारित आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यक्रम’ बाढ़ के खतरों के साथ-साथ कई सामाजिक कुरीतियों के प्रति लोगों को जागरूक करने लगा। बाल विवाह भी उनमें से एक है।

समझाते हैं बच्चों के मां बाप को

kids change socity

कार्यक्रम के तहत इन दोनों पंचायतों के सभी बारह गांवों में एक-एक बाल-पंचायत का गठन किया गया है। आठ साल से लेकर सत्रह साल तक के बच्चे इसके सदस्य होते हैं। यह समूह महीने में दो बार बैठक कर बच्चों के अधिकारों पर चर्चा करता है।

बाल-पंचायत के इन सदस्यों तक स्कूल में या खेल के मेल-जोल के दौरान जैसे ही यह ख़बर पहुंचती है कि किसी बच्चे की शादी होने वाली है तो वे सक्रिय हो जाते हैं।

पहले वे लड़की के माता-पिता से मिलकर उन्हें बाल-विवाह के खतरों के बारे में बताते हैं। अगर फिर भी उनकी बात नहीं मानी जाती है, जैसा कि अक्सर होता है, तो वे गांव में ही बनी बाल सुरक्षा समिति के सहारे ऐसे परिवारों को समझाने का काम करते हैं।

बीबीसी ने बाल-पंचायत के सदस्यों से बातचीत के दौरान पाया कि उन्हें स्कूल में पढ़ाई जानी वाली किसी कविता की तरह ही यह याद है कि बाल-विवाह के कारण बच्चों को कैसी शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

मायूसी भी लगती है हाथ

kids change socity

ऐसा नहीं है कि हर पहल पर बाल-विवाह रुक ही जाते हैं। अमनी गांव के बाल-पंचायत के अध्यक्ष अनिकेत अनुज ने ऐसे ही एक मामले के बारे में बताया। पिछले साल मार्च में बाल-पंचायत के सदस्य हरेराम पंडित के घर उन्हें यह समझाने गए थे कि वह अपनी चैदह साल की बेटी की शादी रोक दें।

तब हरेराम पंडित ने उन्हें डांट कर भगा दिया था और वे बाद में बाल सुरक्षा समिति के समझाने पर भी नहीं माने। बिहार में बाल-विवाह का प्रतिशत पूरे देश में सबसे ज्यादा है।

बाल-विवाह संबंधी, सबसे हालिया 2007-08 के जिला स्तरीय परिवार और सुविधा सर्वेक्षण, यानी डीएलएचएस के आंकड़े बताते हैं कि बिहार में बीस से चौबीस साल की विवाहित महिलाओं में से 68।2 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 साल से कम उम्र में हो जाती है। राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 42।9 प्रतिशत है।

जानकारों का मानना है कि ऐसे में बाल-विवाह रोकने के दृष्टिकोण से सबसे चुनौतीपूर्ण राज्य में सेव द चिल्ड्रेन की यह छोटी सी पहल बहुत महत्त्वपूर्ण प्रतीत होती है। संस्था के बिहार राज्य कार्यक्रम प्रबंधक राफ़े इजाज़ हुसैन इस सफलता को सामाजिक विकास में बच्चों की भागीदारी सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी के रूप में देखते हैं।

साथ ही वे यह भी जोड़ते हैं कि बच्चों के ज़रिए समाज, सरकार और संस्थाएं सूबे की अन्य पंचायतों में भी ऐसी पहल करे तो बाल-विवाह की रोकथाम में बिहार बड़ी कामयाबी हासिल कर सकता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed