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Bihar News: मंत्री प्रेम कुमार बोले- को-ऑपरेटिव संस्थाओं के जरिए पहली बार विदेशों में जा रही बिहार की सब्जियां

Mon, 09 Jun 2025 08:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: अमर उजाला ब्यूरो Updated Mon, 09 Jun 2025 08:33 PM IST
सार

Aurangabad News: मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व बिहार से 1500 किलो सब्जियां और फल दुबई भेजे गए। इसमें परवल, करैला, बैगन, कटहल, केला और जर्दालु आम समेत कुल 10 प्रकार की फल-सब्जियां शामिल थीं।

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Minister Prem Kumar says Bihar's vegetables are going abroad for first time through cooperative institutions
कार्यशाला का उद्घाटन करते मंत्री, मंत्री का स्वागत करते को-ऑपरेटिव बैंक के चेयरमैन

विस्तार

बिहार में सहकारी संस्थाएं अब वैश्विक मंच पर अपने उत्पादों के साथ पहचान बना रही हैं। राज्य में पहली बार सहकारी संस्थाओं के माध्यम से किसानों द्वारा उत्पादित सब्जियों और फलों का निर्यात किया जा रहा है। यह जानकारी बिहार सरकार के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 के तहत सहकारिता में सहकार अभियान के अंतर्गत आयोजित जिला स्तरीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए दी।

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‘विदेशों में बढ़ी बिहार की सब्जियों की मांग’
मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व बिहार से 1500 किलो सब्जियां और फल दुबई भेजे गए। इसमें परवल, करैला, बैगन, कटहल, केला और जर्दालु आम समेत कुल 10 प्रकार की फल-सब्जियां शामिल थीं। उन्होंने बताया कि नेपाल से 5000 किलो फल-सब्जियों की मांग प्राप्त हुई है और सिंगापुर से भी संपर्क स्थापित किया गया है। इसके अतिरिक्त हिंदुस्तान लिवर लिमिटेड वैशाली जिले के टमाटर उत्पादक किसानों से खरीदी की प्रक्रिया में है।
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डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि यह केवल एक शुरुआत है। फिलहाल 45 मीट्रिक टन फल और सब्जी हर सप्ताह विदेश भेजने की दिशा में ट्रायल किया जा रहा है। भविष्य में यह मात्रा कई गुना बढ़ेगी और इसका लाभ सीधे किसानों और विपणन करने वाली सहकारी समितियों को मिलेगा।
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‘प्रत्येक प्रखंड में बनेंगे आधुनिक कोल्ड स्टोरेज’
सब्जियों और फलों के सुरक्षित भंडारण को लेकर सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रत्येक प्रखंड में 10-10 मीट्रिक टन क्षमता के कोल्ड स्टोरेज का निर्माण कराया जा रहा है। प्रत्येक यूनिट में 20 मीट्रिक टन का गोदाम, कार्यालय और वाहन पार्किंग की सुविधा होगी। इस योजना के तहत प्रथम चरण में 52 प्रखंडों को स्वीकृति दी गई है, जिसमें प्रत्येक कोल्ड स्टोरेज पर ₹1 करोड़ 14 लाख की लागत आएगी। यह संरचना किसानों को उनकी उपज को बेहतर मूल्य पर बेचने में सहायता करेगी।
 
सहकारी समितियों को डिजिटल और आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की योजना
कार्यशाला में मंत्री ने सहकारिता विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पैक्स कम्प्यूटराइजेशन, कॉमन सर्विस सेंटर की स्थापना, पेट्रोल-डीजल आउटलेट, जन औषधि केंद्र, कृषक समृद्धि केंद्र, नई राष्ट्रीय सहकारी समितियों से संबद्धता, किसान क्रेडिट कार्ड, और माइक्रो एटीएम सुविधा जैसे कई कार्यक्रम सहकारी समितियों को आर्थिक और तकनीकी रूप से सशक्त बना रहे हैं।
 
डोर स्टेप बैंकिंग बनी ग्रामीणों की बड़ी सहूलियत
डॉ. प्रेम कुमार ने सहकारी समितियों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए बैंक मित्र और डीएमए योजना के क्रियान्वयन की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि डोर स्टेप बैंकिंग सेवा विशेष रूप से महिलाओं और बुजुर्गों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो घर से बाहर जाकर बैंक जाना नहीं चाहते। अब माइक्रो एटीएम की मदद से सहकारी समितियों के प्रतिनिधि गांवों में जाकर बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। इस मौके पर औरंगाबाद जिले की 12 सहकारी समितियों को माइक्रो एटीएम भी वितरित किए गए। इससे ये समितियां बैंक मित्र के रूप में कार्य करते हुए ग्रामीण अंचलों तक वित्तीय सेवाएं पहुंचा सकेंगी।


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जिला स्तरीय इस कार्यशाला में डिस्ट्रिक्ट सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन संतोष कुमार सिंह, सहकारिता विभाग के संयुक्त निबंधक, सहायक निबंधक, जिला सहकारिता पदाधिकारी, जिला केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक, नाबार्ड के डीडीएम, सहकारिता प्रसार पदाधिकारी, सभी पैक्स अध्यक्ष, व्यापार मंडल और दुग्ध उत्पादन सहकारी समितियों के अध्यक्ष सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे।
 
‘अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष से बदलेगी तस्वीर’
सहकारिता मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता वर्ष 2025 बिहार में सहकारी संगठनों के लिए एक स्वर्णिम युग की शुरुआत है। पहले जहां सहकारी संस्थाएं अपने उत्पादों को देश के बाहर भेजने की कल्पना भी नहीं कर सकती थीं, वहीं आज वे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कदम रख चुकी हैं। यह किसानों की मेहनत, राज्य सरकार की दूरदर्शिता और सहकारी ढांचे की ताकत का परिणाम है।

 

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