बिहार: गयाजी में मंच पर आमने-सामने हुए मंत्री-विधायक, ‘ठेकेदार’ वाले बयान पर विजय सिन्हा ने दिया जवाब
गयाजी में आयोजित इन्फ्रा बिल्ट एक्सपो के मंच पर जदयू विधायक मनोरमा देवी और कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा के बीच बयानों को लेकर सियासी नोकझोंक देखने को मिली।
विस्तार
गयाजी में आयोजित इन्फ्रा बिल्ट एक्सपो के मंच पर उस वक्त सियासी माहौल गर्म हो गया, जब बेलागंज की जदयू विधायक मनोरमा देवी के एक बयान पर बिहार सरकार के कृषि मंत्री सह गया के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सार्वजनिक तौर पर प्रतिक्रिया दे दी। मंत्री की टिप्पणी के बाद विधायक ने भी मंच से ही अपनी बात रखते हुए सफाई दी। दोनों नेताओं के बीच हुई इस शब्दों की जंग ने कार्यक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया।
‘अगर मैं ठेकेदार नहीं होती’ बयान से शुरू हुआ विवाद
इन्फ्रा बिल्ट एक्सपो कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बेलागंज की जदयू विधायक मनोरमा देवी ने अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा, “अगर मैं ठेकेदार नहीं होती, तो मनोरमा देवी नहीं होती।” उनका आशय अपने राजनीतिक सफर और सामाजिक पहचान से था, लेकिन यह टिप्पणी मंच पर मौजूद नेताओं के बीच चर्चा का विषय बन गई।
ईमानदारी बनाती है जनप्रतिनिधि
विधायक के बयान के बाद कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने अपने संबोधन में बिना नाम लिए कहा कि किसी व्यक्ति के विधायक या जनप्रतिनिधि बनने के लिए ठेकेदारी जरूरी नहीं होती। उन्होंने कहा कि ईमानदारी, कर्मठता, जनता की सेवा और समर्पण ही किसी जनप्रतिनिधि की असली पहचान होती है। मंत्री की इस टिप्पणी को विधायक के बयान पर जवाब के रूप में देखा गया और कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच इसकी खूब चर्चा होने लगी।
मनोरमा देवी ने दी अपनी सफाई
मंत्री की टिप्पणी के बाद मनोरमा देवी ने फिर से माइक संभाला और कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका आशय यह था कि ठेकेदारी के दौरान उन्होंने जनता के बीच काम किया, लोगों की समस्याओं को समझा और उसी अनुभव ने उन्हें राजनीति तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि ठेकेदारी ही जनप्रतिनिधि बनने की शर्त है।
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मंच पर दिखी सियासी नोकझोंक
कार्यक्रम विकास और आधारभूत संरचना से जुड़ा था, लेकिन कुछ देर के लिए पूरा माहौल राजनीतिक बहस में बदल गया। मंच पर मौजूद नेताओं और कार्यक्रम में शामिल लोगों के बीच दोनों नेताओं के बयान चर्चा का विषय बने रहे। हालांकि बाद में कार्यक्रम अपनी निर्धारित कार्यवाही के अनुसार आगे बढ़ा, लेकिन मंच से हुई यह शब्दों की नोकझोंक राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छोड़ गई।