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सत्ता का संग्राम: सवालों से कन्नी काट गए नबीनगर विधायक, पूर्व एमएलए ने भी किया किनारा; जानें किन पर हुई चर्चा

Mon, 04 Aug 2025 03:52 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरंगाबाद Published by: शबाहत हुसैन Updated Mon, 04 Aug 2025 03:52 PM IST
सार

जन सुराज की नेत्री अर्चना चंद्र ने कहा कि नबीनगर विधानसभा क्षेत्र में नहरें तो पहुंच चुकी हैं, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उनका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। कई जगह नहर ऊंची है तो खेत नीचे और कहीं इसके उलट स्थिति है, जिससे सिंचाई बाधित होती है।

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Bihar Satta ka Sangram 2025: Nabinagar MLA dodged questions And former MLA also stayed away News in Hindi
सत्ता का संग्राम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर ‘अमर उजाला’ द्वारा चलाए जा रहे विशेष जनसंवाद कार्यक्रम ‘सत्ता का संग्राम 2025’ के तहत रविवार को औरंगाबाद जिले के नबीनगर विधानसभा क्षेत्र की जमीनी समस्याओं पर खुली चर्चा की गई। इस मंच के माध्यम से स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भावी उम्मीदवारों के सामने क्षेत्र की ज्वलंत समस्याएं रखी गईं।

हालांकि चर्चा में शामिल होने को लेकर सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों ओर से कुछ नेता अनुत्तरदायी दिखे। क्षेत्र के मौजूदा राजद विधायक ने कई बार कॉल करने के बावजूद फोन नहीं उठाया। वहीं उनके पूर्ववर्ती, जदयू के पूर्व विधायक और पूर्व सांसद वीरेंद्र कुमार सिंह ने चर्चा शुरू होने से पहले ही अपना मोबाइल स्विच ऑफ कर लिया। भाजपा के औरंगाबाद प्रभारी और नबीनगर सीट से संभावित उम्मीदवार त्रिविक्रम नारायण सिंह ने हालांकि पूर्व सूचना देकर अपनी व्यस्तता के कारण असमर्थता जताई।

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सिंचाई और कृषि की समस्याएं
जन सुराज की नेत्री अर्चना चंद्र ने कहा कि नबीनगर विधानसभा क्षेत्र में नहरें तो पहुंच चुकी हैं, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उनका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है। कई जगह नहर ऊंची है तो खेत नीचे और कहीं इसके उलट स्थिति है, जिससे सिंचाई बाधित होती है। उन्होंने सोनौरा गांव का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां नहर का पानी निकासी नहीं होने के कारण लगभग 100 एकड़ भूमि डूबी हुई है।

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पलायन और रोजगार सबसे बड़ी चुनौती
स्वतंत्र राजनीतिक विश्लेषक मिथिलेश कुमार दीपक ने कहा कि यहां की सबसे गंभीर समस्या रोजगार और पलायन की है, जो एनटीपीसी के पावर प्लांट आने से पहले भी थी और आज भी बनी हुई है। उद्योग विहीन यह क्षेत्र आज भी विकास की दौड़ में पीछे है। उन्होंने तकनीकी शिक्षा की कमी, सरकारी अस्पतालों की बदहाली और निजी अस्पतालों की अनुपलब्धता को भी प्रमुख मुद्दा बताया।


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स्वास्थ्य व शिक्षा की स्थिति
उन्होंने कहा कि नबीनगर को छोड़कर पूरे विधानसभा क्षेत्र में कोई सरकारी डिग्री कॉलेज नहीं है और वित्त रहित कॉलेज खस्ताहाल स्थिति में हैं। राजनीति पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि सत्ता में चेहरे नहीं, सिर्फ पार्टियां बदलती हैं। जो लोग पहले किसी पार्टी में थे, सत्ता बदलते ही नई पार्टी में शामिल हो जाते हैं। यही राजनीतिक सच्चाई है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि विपक्षी विधायक होने के कारण क्षेत्रीय विधायक सिर्फ अपनी निधि तक सीमित हैं, जबकि राज्य सरकार में मंत्री तक निर्णय लेने में असमर्थ हैं।

नदियों के अस्तित्व पर चिंता
राजनीतिक विश्लेषक दीपक ने पुनपुन, सोन और बटाने नदियों के अस्तित्व पर मंडरा रहे संकट पर भी चिंता जताई और सामुदायिक भागीदारी से संरक्षण की बात की। उन्होंने पुल-पुलियों के निर्माण की सराहना की, लेकिन गुणवत्ता को लेकर सवाल भी उठाए। वहीं, भाजपा नेता अनिल कुमार सिंह ने कहा कि पहले नबीनगर में सिंचाई व्यवस्था बेहद खराब थी, लेकिन अब सुधार हुआ है और धान का बेहतर उत्पादन हो रहा है। स्वास्थ्य व्यवस्था में भी पहले की तुलना में काफी सुधार हुआ है। आयुष्मान योजना और जन औषधि केंद्रों से गरीबों को लाभ मिल रहा है। जदयू के प्रदेश उपाध्यक्ष संजीव कुमार सिंह ने भी विभिन्न समस्याओं पर अपने विचार रखे और अपनी पार्टी की योजनाओं की जानकारी दी।

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