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चुनाव आयोग का शरद यादव को करारा झटका, बोला- चुनाव चिन्ह तीर के असली हकदार नीतीश
टीम डिजिटल, अमर उजाला
Updated Fri, 17 Nov 2017 04:32 PM IST
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नीतीश कुमार
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चुनाव आयोग ने जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) में नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले गुट को ही जेडीयू पार्टी की मान्यता दी है। साथ ही आयोग ने नीतीश के धड़े को ही पार्टी का चुनाव चिह्न 'तीर' इस्तेमाल करने का अधिकार दिया है।
गौरतलब है कि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नीतीश कुमार के गुट के एक प्रतिनिधिमंडल ने अक्टूबर के आखिर में चुनाव आयोग से मिलकर पार्टी के चुनाव चिह्न पर जल्द फैसला लेने की मांग की थी। जेडीयू में शरद यादव के नेतृत्व वाला गुट भी पार्टी के चुनाव चिह्न ‘तीर’ पर अपना दावा कर रहा था। इससे पहले जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा था कि शरद गुट इस फैसले को लटकाना चाहता है ताकि गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी के निशान का इस्तेमाल न हो सके।
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त्यागी ने आरोप लगाया कि शरद गुट जानबूझ कर इस मामले को आयोग में ले जाने की कोशिश कर रहा है, जिससे यादव राज्यसभा के सभापति से यह मामला आयोग में विचाराधीन होने के आधार पर उनकी सदस्यता रद्द करने के आवेदन पर कार्रवाई नहीं करने की मांग कर सकें। जदयू ने सभापति से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आधार पर यादव की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की थी।
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EC recognizes Nitish Kumar led faction as JD(U) & entitles them to use the arrow symbol. pic.twitter.com/BmWR0ZW8NP
— ANI (@ANI) November 17, 2017विज्ञापन
गौरतलब है कि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नीतीश कुमार के गुट के एक प्रतिनिधिमंडल ने अक्टूबर के आखिर में चुनाव आयोग से मिलकर पार्टी के चुनाव चिह्न पर जल्द फैसला लेने की मांग की थी। जेडीयू में शरद यादव के नेतृत्व वाला गुट भी पार्टी के चुनाव चिह्न ‘तीर’ पर अपना दावा कर रहा था। इससे पहले जदयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने कहा था कि शरद गुट इस फैसले को लटकाना चाहता है ताकि गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी के निशान का इस्तेमाल न हो सके।
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त्यागी ने आरोप लगाया कि शरद गुट जानबूझ कर इस मामले को आयोग में ले जाने की कोशिश कर रहा है, जिससे यादव राज्यसभा के सभापति से यह मामला आयोग में विचाराधीन होने के आधार पर उनकी सदस्यता रद्द करने के आवेदन पर कार्रवाई नहीं करने की मांग कर सकें। जदयू ने सभापति से पार्टी विरोधी गतिविधियों में लिप्त होने के आधार पर यादव की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की थी।