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Bihar News : मिश्रा को किसने मारा? घर वाले जहां फोटो लेकर बार-बार घूम रहे थे, वहीं लावारिस अंतिम क्रिया

Tue, 01 Aug 2023 01:08 PM IST
कृष्ण बल्लभ नारायण न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Tue, 01 Aug 2023 01:08 PM IST
सार

Bihar Police : दोस्त उसे प्यार से मिश्रा कहते थे। वैसे वह किसी के लिए उज्ज्वल था तो किसी का सौरभ भी। 'अमर उजाला’ के पास उसकी दर्दनाक कहानी सामने ला रहा है, ताकि आप खुद तय करें कि 28 साल के इस युवक की हत्या का दोषी किसे माना जाए।

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Drug robbery in Hyderabad-Patna train, Motihari Youth died due to negligence of Bihar Police and PMCH hospital
जरा सोचिये इस मौत का गुनाहगार कौन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दर्द की इस दास्तान को पढ़ने से पहले यह जान लें कि इसे मौत बताया जा रहा है, लेकिन है यह हत्या। परिवार का संघर्ष इतनी ही दूर गया कि जबतक परिजन उसके पास पहुंचते, उसकी लाश भी  लावारिस कहते हुए जला दी गई। मोतिहारी के दक्षिण भवानीपुर निवासी 28 साल के उज्जवल मिश्रा उर्फ सौरभ कुमार को कार्यस्थल के मित्र 'मिश्रा’ कहते थे। अब इस शादीशुदा युवक के परिजन उसकी लाश के बगैर उसका अंतिम संस्कार कर रहे हैं। जन्मदाता से लेकर जीवनसंगिनी तक रो रही। डेढ़ साल के बेटे को तो इंतजार ही रह जाएगा। इस हत्या के जिम्मेदार की पहचान पाठकों पर छोड़ते हुए 'अमर उजाला’ मृतक के चचेरे भाई सोनू मिश्रा की जुबानी पूरी कहानी सामने ला रहा है।

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ट्रेन से स्टेशन तक क्या हुआ, यह जानें
20 जुलाई को उज्ज्वल मिश्रा हैदराबाद से पटना निकले। 21 जुलाई को सामान्य तरीके से मोबाइल पर बात हुई। 22 को लड़खड़ाते हुए कॉल आया कि "बिहटा में खड़े हैं।” परिजन पक्का नहीं, लेकिन अंदाज लगा रहे कि ट्रेन में नशाखुरानी का शिकार होने के बाद यह कॉल आया था। पटना जीरो माइल से मोतिहारी के लिए बस पकड़ने के लिए घर वालों ने कहा। कुछ देर बाद मोबाइल बंद हो गया। (गायब होने के बाद मोबाइल लोकेशन बिहटा दिखा और फिर खगौल मयूर विहार देवी स्थान के बाद मोबाइल ऑफ हो गया।)
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बिहार पुलिस की तत्परता- अध्याय 1
अनहोनी की आशंका देख परिजनों ने अपने स्थानीय संग्रामपुर थाने में सनहा दिया और घर के कई लोग पटना में जहां-तहां खुद ढूंढ़ने में लग गए। फोटो दिखाकर बिहटा, खगौल से लेकर पटना तक खोजबीन शुरू कर दी। शनिवार 22 जुलाई से गायब हुए उज्ज्वल के बारे में गुरुवार 27 जुलाई को बिहार पुलिस के 112 नंबर से कॉल आया। 27 जुलाई को आए कॉल में बताया गया कि टीम 112 ने 22 जुलाई को महेंद्रू के पास उज्ज्वल को बरामद किया था। तीन-चार लोग पीट रहे थे तो टीम ने छुड़ाकर पीरबहोर थाने को सुपुर्द कर दिया। जब टीम 112 ने पटना के अशोक राजपथ पर पीरबहोर थाना के सुपुर्द किया था, उस समय उज्ज्वल के पास उनका मोबाइल और आधार कार्ड भी था। पीरबहोर पुलिस ने उज्ज्वल मिश्रा को पीएमसीएच में भर्ती करवा दिया। 22 को बरामद शख्स के बारे में 27 जुलाई को सूचना दी गई। अगर परिजनों का यह कहना सही है तो यह कितना बड़ा अपराध है?

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Drug robbery in Hyderabad-Patna train, Motihari Youth died due to negligence of Bihar Police and PMCH hospital
राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच की जिम्मेदारी भी समझिये - फोटो : अमर उजाला

पीएमसीएच की जिम्मेदारी- अध्याय 1
पीरबहोर पुलिस ने पहचान के दस्तावेज या मोबाइल के जरिए परिजनों तक सूचना नहीं पहुंचाई, लेकिन राज्य के सबसे बड़े अस्पताल पीएमसीएच में उज्ज्वल को भर्ती जरूर करा दिया। उज्ज्वल ने उस दिन या अगले दिन कब अस्पताल छोड़ दिया या उन्हें अस्पताल से भगा दिया गया, कुछ पता नहीं। परिजनों को अस्पताल में उज्ज्वल की एंट्री का वीडियो फुटेज दिखाया गया, लेकिन एग्जिट का नहीं।

बिहार पुलिस की तत्परता- अध्याय 2
उज्ज्वल ने जिंदगी बचाने का मौका दूसरी बार दिया। इस बार मुसल्लहपुर हाट में सड़क किनारे लोगों की भीड़ उन्हें घेरकर देख रही थी। स्कूटी से जा रही लॉ की एक छात्रा ने इस हालत में उन्हें देखा। पुलिस की जिप्सी भी उधर से गुजरी, मगर अनदेखी करते हुए निकल गई। भीड़ भले ही सिर्फ बात बनाती रही, छात्रा ने मानवता दिखाई। उसने उज्ज्वल को पीएमसीएच पहुंचा दिया। इस बार भी उज्ज्वल के परिजनों तक खबर नहीं पहुंची। यह वाकया भी 27 तारीख से पहले का है। परिजनों को जब 27 जुलाई को कॉल आया, तब सभी पीएमसीएच पहुंचे थे। उन्हें यहां पता चला कि वह तो 22 या 23 जुलाई को ही अस्पताल से खुद चले गए। पुलिस भले नहीं खोज रही थी या मुहर्रम की व्यस्तता बता रही थी, लेकिन परिजन फोटो दिखाकर ढूंढ़ने में व्यस्त थे। इसी दौरान फोटो देख मुसल्लहपुर हाट के पास उनके होने की जानकारी मिली। परिजनों ने हाथ जोड़ विनती करते हुए आसपास से CCTV फुटेज निकालकर उज्ज्वल को देखा। लॉ छात्रा की स्कूटी की पहचान करते हुए उसका नंबर निकाला। फिर उसके जरिए अस्पताल पहुंचे।

पीएमसीएच की जिम्मेदारी- अध्याय 2
लॉ छात्रा ने पीएमसीएच पहुंचाने की जानकारी दी तो परिजन 31 जुलाई को अस्पताल पहुंचे। यहां तस्वीर दिखाने पर पहचान हुई तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। बताया गया कि 24 जुलाई को ही उज्जवल को लॉ की छात्रा पहुंचा गई थी। कुछ ही घंटे बाद मौत हो गई। मौत के 72 घंटे तक इंतजार किया गया और फिर शव को लावारिस मानते हुए अंतिम संस्कार की प्रक्रिया कर दी गई। अस्पताल के पास उज्ज्वल के परिजनों को देने-दिखाने के लिए इलाज से जुड़े एक-दो पेपर थे, बस।

Drug robbery in Hyderabad-Patna train, Motihari Youth died due to negligence of Bihar Police and PMCH hospital
इस थाने में की गई जबरदस्त लापरवाही - फोटो : अमर उजाला

अब पीरबहोर थानाध्यक्ष ने जो कहा वह भी जानिये 
पीरबहोर थाना अध्यक्ष सबीह उल हक ने इस वाकये को लेकर 'अमर उजाला’ के सवाल पर कहा- “112 की टीम उज्ज्वल मिश्रा को लेकर आई थी और फिर उसी ने पीएमसीएच में भर्ती करवाया। 112 वालों ने शायद उसका मोबाइल थाने के मुंशी को दिया था। मोबाइल स्विच ऑफ भी था और लॉक भी। इस बारे में इससे ज्यादा जानकारी नहीं है।"

लुटेरों को दोष दें, सिस्टम को दोषी कहें या बदकिस्मती मानें
उज्ज्वल मिश्रा की 3 साल पहले शादी हुई थी। वह दो भाई और एक बहन में सबसे बड़े थे। परिजनों के अनुसार वह हैदराबाद में करीब 6-7 साल से रह रहे थे। कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट में काम करते थे। हैदराबाद से घर लौटने में आशंका है कि नशाखुरानी गिरोह का शिकार होने के बाद पटना में मोबाइल-पर्स छिनतई का भी शिकार हुए। रोते हुए परिजन कहते हैं कि ट्रेन या सड़क पर अपराधियों ने जो किया सो किया, पुलिस-अस्पताल के सरकारी सिस्टम ने भी मानवता नहीं दिखाई। जिम्मेदारी दिखाते हुए मोबाइल या आधार कार्ड के आधार पर परिजनों को तत्काल खबर पहुंचा दी जाती तो एक किसान पिता का बेटा नहीं ऐसे नहीं मरता। घर का इकलौता कमाऊ पूत मरता भी तो लाश लावारिस नहीं होती। बहन-भाई शायद आज राखी की खुशी-खुशी तैयारी करते होते। एक पत्नी की जिंदगी आज चल रही होती। डेढ़ साल का बच्चा पिता के आसपास खेल रहा होता। मंगलवार को उनके शव के बगैर उनका अंतिम संस्कार किया जा रहा है। उज्ज्वल के पिता उन्हें प्रतीकात्मक मुखाग्नि दे रहे हैं।

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