Flood: समस्तीपुर में ग्रामीणों ने शांति नदी पर बनाया 250 फुट लंबा चचरी पुल, हर साल बारिश में बह जाता है यह पुल
Bihar Flood News: ग्रामीणों ने बताया कि करीब 250 फुट लंबे इस पुल को बनाने में 20 दिनों का समय लगा। गांव के ग्रामीणों ने ही इसके लिए दिन रात मेहनत की। पुल के निर्माण पर करीब तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं। उक्त राशि की ग्रामीणों ने अपने स्तर से व्यवस्था की।
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समस्तीपुर जिले के कल्याणपुर प्रखंड से गुजरने वाली शांति नदी पर बघला गांव के लोगों ने जज्बे का चचरी पुल बनाया है। मानसून शुरू होते ही शांति नदी में आई बाढ़ के कारण चकमहेसी और बघला गांव को जोड़ने वाले डायवर्जन के बह जाने से बघला के प्रखंड मुख्यालय से संपर्क भंग हो गया था। इसी स्थल पर नए पुल का भी निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन नदी में पानी आ जाने के बाद निर्माण कार्य को रोक दिया गया है। लोगों के समक्ष आवागमन के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बचा था, जिस कारण ग्रामीणों का कामकाज काफी प्रभावित हो रहा था।
बघला गांव निवासी पंकज कुमार ने बताया कि परेशानी को देखते हुए लोगों ने पंचायत प्रशासन से लेकर प्रखंड प्रशासन को भी मदद की गुहार लगाई। प्रखंड प्रशासन की ओर से नाव की व्यवस्था की गई। इसके बाद लोगों ने आपसी सहयोग कर चचरी का पुल बनाने का निर्णय लिया। ग्रामीणों द्वारा आपसी सहयोग से तीन लाख रुपये चंदे की वसूली की गई। फिर ग्रामीणों ने पुल बनाने में खुद मजदूर की भूमिका निभाई और करीब 20 दिनों की कड़ी मेहनत के बाद पुल का निर्माण कर लिया। अब लोगों ने बाइक और तीन चक्का ऑटो लेकर आवाजाही करनी शुरू कर दी है।
शांति नदी का डायवर्जन के बहने से इस इलाके के बघला, भरजा कनौजर, पड़ाव, कल्याणनगर, हत्था और माधोपुर आदि गांव की करीब 25 हजार से अधिक आबादी को आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। अब इस चचरी पुल के बन जाने से लोगों को बड़ी राहत मिली है। लोग बाइक और तीन चक्का वाहन से पुल पार कर ले रहे हैं। चचरी पुल मजबूत रहे, इसके लिए निर्माणाधीन पुल के पाये का भी सहारा लिया गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि करीब 250 फुट लंबे इस पुल को बनाने में 20 दिनों का समय लगा। गांव के ग्रामीणों ने ही इसके लिए दिन रात मेहनत की। पुल के निर्माण पर करीब तीन लाख रुपये खर्च हुए हैं। उक्त राशि की ग्रामीणों ने अपने स्तर से व्यवस्था की।
वहीं, अनुमंडल पदाधिकारी दिलीप कुमार ने कहा कि डायवर्जन के बह जाने से लोगों को दिक्कत हो रही थी। सरकारी स्तर पर नाव की व्यवस्था की गई थी, क्योंकि उक्त स्थल पर पुल का निर्माण कार्य चल रहा है। पानी घटने के बाद पुनः निर्माण कार्य शुरू किया जाएगा।