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Chandrayaan Landing : तीन बिहारियों के कारण हम करेंगे गर्व, जानें चंद्रयान 3 में हमारे युवाओं की भूमिका

Wed, 23 Aug 2023 04:48 PM IST
आदित्य आनंद न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया/ समस्तीपुर/ सीतामढ़ी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गया/ समस्तीपुर/ सीतामढ़ी Published by: आदित्य आनंद Updated Wed, 23 Aug 2023 04:48 PM IST
सार

Bihar News : अमेरिका तक हमारे चंद्रयान के लिए दुआएं हो रही हैं। ऐसे में बिहारियों के लिए और ज्यादा गौरवान्वित करने वाली बात है कि बिहार के तीन युवा भी देश के इस वैज्ञानिक मिशन में अहम भूमिका निभा रहे। जानिए, कौन हैं और क्या कर रहे?

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Chandrayaan 3: Bihar connection, Important role of young scientist of Sitamarhi, Gaya, Samastipur, Bihar News
चंद्रयान 3 - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

चंद्रयान-3 मिशन भारतीयों के लिए तो गर्व की बात है ही लेकिन इसके साथ-साथ आज बिहार भी गौरवान्वित हो रहा है। इसकी सफलता में बिहार के तीन युवा वैज्ञानिकों की अहम भूमिका है। समस्तीपुर के अमिताभ, सीतामढ़ी के रवि कुमार और गया के सुधांशु कुमार चंद्रयान 3 मिशन के हिस्सा बने हैं। चंद्रयान 3 की चांद पर सफलतापूर्वक लैंडिंग को लेकर पूरा देश उत्सुक है। इसरो (ISRO) के कई वैज्ञानिक इस पूरे कार्य में लगे हैं।  

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इसरो ने 14 जुलाई को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से अपने चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम के तीसरे संस्करण का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। चंद्रयान-3 चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। इससे पहले केवल तीन देश, चीन, रूस और अमेरिका ही अब तक चंद्रमा की सतह पर उतरने में सफल रहे हैं। भारत के मून मिशन चंद्रयान 3 के शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा के साउथ पोलर हिस्से में लैंडिंग होनी है। इस बीच पूजा-पाठ का दौर भी शुरू हो गया है। 
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लॉन्च व्हीकल बनाने की टीम में गया के सुधांशु भी शामिल
चंद्रयान 3 के लॉन्च व्हीकल बनाने की टीम में इसरो वैज्ञानिक सुधांशु कुमार भी शामिल हैं। लांच व्हीकल बनाने में कुल 30 लोगों की टीम थी जिसमें तीसरे वैज्ञानिक सुधांशु हैं। वह गया जिले के खरखूरा मोहल्ला के रहने वाले हैं। इसको लेकर घर वाले काफी गर्व महसूस कर रहे हैं। खासकर सुधांशु के मां-पिता बहुत ज्यादा उत्साहित हैं। उन्होंने मंगलवार को पूजा-पाठ भी किया। पिता महेंद्र प्रसाद अपने घर में ही आटा मिल चलाते हैं। उन्होंने बताया कि चंद्रयान 3 की लैंडिंग का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है वैसे-वैसे बेचैनी बढ़ रही है। सुधांशु के पिता ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे के रिजल्ट या उसकी नौकरी के लिए कभी पूजा-पाठ या दुआ नहीं मांगी। आज भगवान से बस यही प्रार्थना कर रहे हैं कि चंद्रयान 3 का सफलतापूर्वक चंद्रमा पर लैंडिंग हो। क्योंकि, इसके साथ मेरे बेटे का भी नाम जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि आज यह पूरे देश के लिए गौरव की बात है। साथ ही सुधांशु कुमार के माता-पिता ने घर के बाहर देवी-देवताओं की पूजा अर्चना भी की। उन्होंने कहा कि बस यही कामना कर रहे हैं कि आज चंद्रयान 3 की सफल लैंडिंग हो। वैज्ञानिक सुधांशु कुमार के पिता महेंद्र प्रसाद ने कहा कि सितंबर 2021 में सुधांशु ने इसरो में वैज्ञानिक के रूप में ज्वाइन किया था। वर्तमान में वह श्रीहरिकोटा में पदस्थापित हैं।

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Chandrayaan 3: Bihar connection, Important role of young scientist of Sitamarhi, Gaya, Samastipur, Bihar News
चंद्रयान 3 सफल लैडिंग की दुआ करते वैज्ञानिक अमिताभ के परिजन। - फोटो : अमर उजाला

ऑपरेशन डायरेक्टर की भूमिका निभा रहे समस्तीपुर के अमिताभ
भारत के अंतरिक्ष मिशन अभियान चंद्रयान तीन की सफल लॉन्चिंग कराने वाले बिहार के होनहारों ने वैज्ञानिको में से एक अमिताभ समस्तीपुर के कुबौलीराम गांव के रहने वाले हैं। अमिताभ ने चंद्रयान 3 की लॉन्चिंग में डिप्टी प्रोजेक्ट डायरेक्टर और ऑपरेशन डायरेक्टर की भूमिका निभाई। अमिताभ की इस भूमिका से गांव के लोगों में तो खुशी है कि देश स्तर पर भी अमिताभ की चर्चा हो रही है। अमिताभ चंद्रयान एक और दो के भी हिस्सा रहे हैं। गांव में पले बढे अमिताभ गांव के सरकारी विद्यालय से प्राइमरी, मिड्ल व हाई स्कूल की शिक्षा प्राप्त की। अमिताभ के पिता सेवानिवृत हेडमास्ट हैं। 87 वर्षीय राम चंद्र प्रसाद सिंह 84 वर्षीय पत्नी शैल्य देवी के साथ अकेले ही गांव में रहते हैं। माता-पिता अपने पुत्र की कामयाबी पर फुले नहीं समा रहे हैं। 

नेटवर्क सिक्योरिटी हैंडल कर रहे सीतामढ़ी के रवि
सीतामढ़ी जिले के पुपरी गांव निवासी रवि कुमार की प्रारंभिक शिक्षा सीतामढ़ी से हुई है। उन्होंने 2005 में दसवीं और 2007 में बारहवीं पास की। वह सीतामढ़ी के जवाहर नवोदय विद्यालय के छात्र रहे हैं। चंद्रयान 3 की लॉन्चिंग में रवि नेटवर्क सिक्योरिटी हैंडल कर रहे थे। इससे पहले वह चंद्रयान 2 के प्रक्षेपण में भी शामिल रहे थे। रिटायर्ड बैंक कर्मी अरुण कुमार चौधरी और मधुबाला चौधरी के पुत्र रवि कुमार वर्ष 2012 में भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईएसटी) त्रिवेंदरम से एवियोनिक्स में बीटेक पास कर इसरो से जुड़े। 

बेतिया के लालमणि और सारण रजत सिंह ने निभाई अहम भूमिका
इनके अलावा बेतिया के लालमणि और सारण के सिताबादियारा इलाके के रजत सिंह ने भी चंद्रयान 3 की सफलता में अहम भूमिका निभाई। लालमणि चंद्रयान 3 के डिजाइन और टाइमिंग की एनालिसिस टीम के सदस्य बने। लालमणि इसरो की हनीकॉमम्ब स्ट्रक्चर के हेड हैं। वहीं राजत सिंह चंद्रयान 3 को पृथ्वी की कक्षा में पहुंचाने वाले रॉकेट की कंट्रोलिंग टीम के सदस्य हैं। रजत 6 माह पहले ही इसरो से जुड़े हैं।

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