फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Case Against lord Ram hearing in Court.

जब कोर्ट ने पूछा, 'राम ने सीता को जंगल भेजा तो सजा किसे दें?'

Tue, 02 Feb 2016 03:40 PM IST
Updated Tue, 02 Feb 2016 03:40 PM IST
विज्ञापन
Case Against lord Ram hearing in Court.

बिहार की सीतामढ़ी अदालत में सोमवार को माता सीता का परित्याग करने के मामले में भगवान राम के खिलाफ याचिका पर सुनवाई हुई। हालांकि बहुत सोच-विचार के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने इस याचिका को खारिज कर दिया।

विज्ञापन


आरोपियों की गैर मौजूदगी और गवाहों की कमी के कारण राम को कोर्ट से राहत तो मिल गई, लेकिन याचिकाकर्ता की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

सोमवार को विभिन्न संगठनों ने उन पर करीब आधा दर्जन मुकदमा दर्ज करा दिए हैं, जबकि सीतामढ़ी बार एसोसिएशन में याचिकाकर्ता वकील का लाइसेंस रद्द करने की मांग की है।
विज्ञापन

याचिकाकर्ता के लिए पैदा हुई मुश्किल

Case Against lord Ram hearing in Court.

सोमवार की सुबह खचाखच भरी अदालत में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामबिहारी के सामने याचिकाकर्ता ठाकुर चंदन सिंह ने दलील देनी शुरू की।

उन्होंने कहा कि मैंने सीता को न्याय दिलाने के लिए अर्जी लगाई है। मिथिला की बेटी सीता का कोई कसूर नहीं था, इसके बावजूद राजा राम ने उन्हें जंगल में क्यों भेजा। कोई पुरुष अपनी पत्नी को कैसे इतनी बड़ी सजा दे सकता है। राजा राम ने यह सोचा भी नहीं कि घनघोर जंगल में अकेली महिला कैसे रहेगी।

जवाब में जज ने पूछा, 'त्रेतायुग की घटना को लेकर आपने याचिका क्यों दायर की। इस घटना के लिए किसे सजा दिलाएंगे और कौन गवाही देगा। आपने केस में यह भी नहीं बताया है कि राम ने सीता को किस दिन घर से निकाला था और केस में दर्ज विवरण का आधार क्या है।'

मामले में दर्ज विवरण का कोई आधार नहीं है: कोर्ट

Case Against lord Ram hearing in Court.

इस पर वकील चंदन ने कहा कि मैंने सीता को न्याय दिलाने के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मैं अदालत से केवल सीता के लिए न्याय की भीख मांगता हूं। आप और हम, सब लोग राम, सीता और रामायण को एक दस्तावेज मानते हैं। मैंने अपने केस में रामायण की घटनाओं का विवरण दिया है।

चंदन सिंह ने तर्क दिया कि जब राजा राम ने सीता के साथ न्याय नहीं किया, तो इस कलियुग में महिलाओं को कैसे न्याय मिलेगा। अगर सीता को न्याय मिलता है, तो ब्रह्मांड की सारी महिलाओं को न्याय मिलेगा। वकील की दलील सुनने के बाद जज सोच में पड़ गए।

उन्होंने कहा कि मामले पर फैसला बाद में होगा। इसके बाद शाम को जब अदालत लगी, तो न्यायाधीश ने मामले को खारिज कर दिया। न्यायाधीश ने कहा कि मामले में दर्ज विवरण का कोई आधार नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed