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चाय की चुस्कियों से दिल में उतरने की कोशिश में मोदी
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 03 Oct 2013 12:31 PM IST
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गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मादी अब तक अपनी चाय बेचने की कहानी खुद सुना रहे थे, लेकिन अब पटना में चाय बेचने वाले उनके प्रचार का जरिया बन गए हैं।
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पटना के गांधी मैदान में नरेंद्र मोदी की रैली के प्रचार के लिए भाजपा ने एक अलग तरीका अपनाया है।
इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार पटना की चाय दुकानों पर मोदी से जुड़े सवाल पूछते बैनर्स लगाए गए हैं। इन बैनर्स में पूछा गया है कि क्या एक चाय बेचने वाला प्रधानमंत्री बन सकता है? अगर जवाब हां है, तो जो देखने व विचार करने के इच्छुक हैं, वो 27 अक्तूबर को गांधी मैदान में आएं।
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बैनर्स में गांधी मैदान में क्या होगा इसका जिक्र नहीं किया गया है। गांधी मैदान में मोदी 27 अक्तूबार को अपनी 'हुंकार रैली' के जरिए बिहार में चुनावी लड़ाई का आगाज करेंगे। भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार चुने जाने के बाद वह पहली बार बिहार की जनता को संबोधित करेंगे।
पिछड़ी जाति के वोटबैंक पर नजर
मोदी अपनी दिल्ली रैली और युवाओं के एक कार्यक्रम में अपनी चाय बेचने की कहानी का जिक्र कर चुके हैं। अब यहां बिहार में पिछड़ी जाति के बहुत बड़े वोटबैंक के लिए भाजपा एक 'चाय वाले के बेटे' की मोदी की छवि को भुनाने का प्रयास करेगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडे का कहना है कि भाजपा हर जगह अलग विचार के साथ जा रही है। 'नमो टी' पटना के लिए है। वे चाय बेचने वाले की यात्रा और उसकी आकांक्षाओं के बारे में बता रहे हैं।
मंडीरी में 'नामो टी' बेच रहे एक दुकानदार ने कहा कि चाय की दुकान एक ऐसी जगह है जहां समाज के सभी वर्गों के लोग आते हैं और राजनीति पर चर्चा करते हैं। बचपन में चाय बेचने वाले मोदी उनका प्रतिनिधित्व करते हैं।
जदयू ने उठाया सवाल
इस प्रचार से उत्साहित भाजपा युवा मोर्चा के महासचिव नीतिन नवीन कहना है कि लोग जल्द ही नरेंद्र मोदी से खुद को जोड़ लेते हैं। 'नमो टी' सफल होगी और इसका कड़वा स्वाद विरोधियों के मुंह में रह जाएगा।
वहीं, प्रचार के इस तरीके ने राज्य में सत्ताधारी दल जदयू की त्यौरियां चढ़ा दी हैं। पार्टी सांसद अली अनवर का कहना है कि नमो टी पीना स्वास्थ्य के लिए सही है या नहीं पहले यह देखना चाहिए।