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न विकास हुआ न सुशासन, जाति की पटरी पर लौटा बिहार

Thu, 01 Oct 2015 05:37 PM IST
Updated Thu, 01 Oct 2015 05:37 PM IST
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BJP too changes policy for bihar election

भाजपा का विकास बनाम नीतीश का सुशासन के रूप में शुरू हुई बिहार विधानसभा चुनाव के मुद्दे की गाड़ी ने आखिरकार जाति की पटरी पकड़ ली है। संघ प्रमुख मोहन भागवत के आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत संबंधी बयान के बाद बदली सियासी परिस्थितियों से चिंतित भाजपा सतर्क हो गई है।

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नई रणनीति के तहत भाजपा न केवल लोकसभा चुनाव की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पिछड़ी जाति को नए सिरे से भुनाने की तैयारी में है, बल्कि विज्ञापनों में भी पीएम मोदी और अमित शाह के अलावा अन्य पिछड़े नेताओं को जगह देना शुरू किया है। इसके अलावा इसी रणनीति के तहत कल पार्टी ने पहली बार आधिकारिक रूप से चुनाव जीतने की स्थिति में किसी पिछड़ी जाति के नेता को ही मुख्यमंत्री बनाने की घोषणा की।
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उल्लेखनीय है कि चुनाव प्रचार की शुरुआत में ही राजद सुप्रीमो चुनावी महाभारत को अगड़ा बनाम पिछड़े का रूप देना चाहते थे। भाजपा जमीनी स्तर पर जातिगत समीकरण साधने की तैयारियों के बावजूद चुनाव प्रचार की गाड़ी को विकास के मुद्दे से नहीं उतरने देना चाहती थी। हालांकि अब भाजपा भी अंदरखाने स्वीकार कर रही है कि भागवत की आरक्षण की समीक्षा की मांग के बाद हालात में तेजी से बदलाव हुआ है।
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तीन तरह की रणनीति तैयार

BJP too changes policy for bihar election

नई परिस्थिति से निपटने के लिए भाजपा ने तीन तरह की रणनीति तैयार की है। पहली रणनीति लोकसभा चुनाव की तरह विधानसभा चुनाव में भी पीएम मोदी की पिछड़ी जाति के होने को जमकर प्रचारित कर इस वर्ग का वोट हासिल करना।

दूसरी रणनीति गठबंधन में पिछड़े और दलित बिरादरी के नेताओं सुशील मोदी, नंदकिशोर यादव, जीतनराम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और रामविलास पासवान जैसे नेताओं की जातिगत पृष्ठभूमि का जमकर प्रचार करना है। तीसरी रणनीति के तहत पार्टी की योजना पीएम मोदी के जरिए लालू के अगड़ा बनाम पिछड़ा के नारे का जवाब दिलाना है।

भविष्य में करीब डेढ़ दर्जन रैलियों को संबोधित करने वाले पीएम मोदी अब इसी रणनीति के तहत अपना भाषण विकास के ईदगिर्द तो रखेंगे, मगर अब प्रमुखता से अगड़ा बनाम पिछड़ा संबंधी राजद सुप्रीमो के नारे का विस्तृत जवाब भी देंगे।

शुरू में चुनाव प्रचार विकास केंद्रित होने का दावा करने वाली भाजपा भी अब मान रही है कि जैसे जैसे चुनाव प्रचार में तेजी आती जा रही है, वैसे-वैसे सुशासन, विकास जैसे मुद्दे नेपथ्य में जा रहे हैं। हालांकि पार्टी को भरोसा है कि पीएम मोदी के दूसरे दौर की रैलियां एक बार फिर से चुनाव प्रचार को विकास केंद्रित कर देंगी।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक संघ प्रमुख के बयान के बाद राजद सुप्रीमो को चुनाव प्रचार को अगड़ा बनाम पिछड़ा बनाने में सफलता हाथ लगी है। हालांकि पार्टी के लिए राहत की बात यह है कि राजग गठबंधन में बड़ी संख्या में पिछड़ी और दलित जातियों के महत्वपूर्ण पदों पर होने के कारण इस मोर्चे पर भी पार्टी महागठबंधन से दो-दो हाथ करने की स्थिति में है।

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