Bihar: डीजीपी को फर्जी कॉल मामले पर भाजपा ने नीतीश सरकार को घेरा, संजय जायवाल ने की न्यायिक जांच की मांग
राज्य भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि सरकार को इस मामले में श्वेत पत्र लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी को पूरा सच पता होना चाहिए। हमारा मानना है कि इस तरह के दुस्साहसी धोखेबाज डीजीपी को कॉल करने से नहीं रुके होंगे। उन्होंने कई अन्य अधिकारियों, प्रमुख सचिवों और यहां तक कि मुख्य सचिव से भी संपर्क किया होगा। कौन जानता है, उन्होंने खुद मुख्यमंत्री को फोन किया हो?
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पटना हाई कोर्ट का फर्जी जज बनकर बिहार के डीजीपी को फोन करने के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। गुरुवार को भाजपा ने इसे मुद्दा बनाते हुए राज्य सरकार को आड़े हाथों लिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने गुरुवार को प्रेस कांफ्रेंस करके इस पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की। इतना ही नहीं, राज्य भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने भी नीतीश कुमार सरकार से बिहार के डीजीपी को फर्जी जज बनकर फोन करने के बाद हुए मामले के खुलसे में श्वेत पत्र लाने की भी मांग की है। इसके अलावा संजय जायसवाल ने कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था फेल हो गई है। उन्होंने नीतीश सरकार की शराबबंदी नीति पर भी सवाल खड़े किए। इस बीच, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने एक बयान जारी कर मामले की सीबीआई जांच की वकालत की है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने की श्वेत पत्र लाने की मांग
राज्य भाजपा अध्यक्ष संजय जायसवाल ने कहा कि सरकार को इस मामले में श्वेत पत्र लाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी को पूरा सच पता होना चाहिए। हमारा मानना है कि इस तरह के दुस्साहसी धोखेबाज डीजीपी को कॉल करने से नहीं रुके होंगे। उन्होंने कई अन्य अधिकारियों, प्रमुख सचिवों और यहां तक कि मुख्य सचिव से भी संपर्क किया होगा। कौन जानता है, उन्होंने खुद मुख्यमंत्री को फोन किया होगा। भाजपा नेता ने कहा कि अब चूंकि पुलिस महानिदेशक एस के सिंघल इसमें खुद फंस गए हैं, इसलिए मामले को सुलझाने में पुलिस की प्रभावशीलता संदिग्ध हो गई है।
पुलिस व्यवस्था पर उठाए सवाल
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने प्रदेश की पुलिस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि राज्य की पुलिस का हाल यह है कि एक फ्रॉड अपने आप को चीफ जस्टिस बताते हुए डीजीपी से अपना काम निकलवा लेता है और उन्हें पता तक नहीं चलता। उन्होंने कहा कि अगर डीजीपी का यह हाल है तो राज्य की पूरी पुलिस फोर्स का क्या हाल होगा। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि राज्य की सुरक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे है।
उन्होंने कहा कि यह राज्य के पुलिस प्रमुख की पेशेवर क्षमता और अखंडता पर भी सवालिया निशान लगाता है। जायसवाल ने कहा कि इसलिए मामले की जांच उच्च न्यायालय के एक मौजूदा न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एक समिति द्वारा की जानी चाहिए।
रिव्यू पिटीशन वापस लेने को लेकर तंज कसा
इस दौरान संजय जायसवाल ने प्रदेश के सीएम नीतीश कुमार पर शहरी स्थानीय निकाय चुनाव मामले में रिव्यू पिटीशन वापस लेने को लेकर तंज कसा। उन्होंने कहा कि अगर सरकार को समीक्षा याचिका वापस ही लेना था तो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की एक फौज क्यों नियुक्त की, जो हर पेशी के लिए सात अंकों की रकम वसूलते हैं? यदि राज्य के महाधिवक्ता किसी मामले में बहस नहीं कर सकते हैं तो उनका क्या फायदा?