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Bihar News: दरभंगा के चचरी पुल के सहारे जीने को विवश है ग्रामीण, 2019 की बाढ़ में धराशायी हो गया था पुल
Thu, 14 Sep 2023 12:38 PM IST
लोकेंद्र सिंह चंपावत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दरभंगा
Published by: लोकेंद्र सिंह चंपावत
Updated Thu, 14 Sep 2023 12:38 PM IST
सार
दरभंगा के सिंहवाड़ा नगर पंचायत के छह से अधिक गांवों के लोग चचरी पुल के सहारे जीवन जीने को मजबूर है। ग्रामीण कई सालों से इस समस्या का सामना कर रहे है। जिले में 2019 में बाढ़ आने से पुल धराशायी हो गया था।
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पुल नहीं बनने से परेशान कई गांवों के लोग
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार के दरभंगा जिले के सिंहवाड़ा नगर पंचायत के दर्जन भर गांव के लोग चचरी के सहारे जीवन जीने को मजबूर है। एक तरफ जहां बिहार की सरकार अपने द्वारा किये गए विकास का ढिंढोरा पिटती है। लेकिन आज भी दरभंगा जिला के सिंहवारा प्रखंड के लोग चचरी पुल के सहारे ही आवागमन करने को मजबूर है। बतादे की वर्ष 2019 में आई बाढ़ ने इस इलाके के पुल को अपने साथ बहा कर ले गई थी।
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सिंघवारा नगर पंचायत सहित आसपास के छह से अधिक गांवों के लोग सहित सीमावर्ती क्षेत्र मुजफ्फरपुर जिला के कटरा प्रखंड के लोग नगर पंचायत सिंहवाड़ा में बने इस चचरी पुल के सहारे ही चलते हैं। बताया जाता है कि ठकनिया बांसवाड़ी होते हुए कटासा पंचायत के पैगंबरपुर तक जाने वाली पीएमजीएसवाई सड़क पर बना आरसीसी पुल वर्ष 2019 की बाढ़ में धराशायी हो गया। इस पथ पर आवागमन बहाल रखने के लिए चार वर्षों से लोग चचरी पुल बनाकर काम चला रहे हैं। मुजफ्फरपुर जिला के बेनीबाद से लेकर गंगिया तक बागमती नदी से उछले पानी बुधकारा तेहवाड़ा चौर होकर अधवाड़ा समूह की बूढनद नदी में इसी जगह मिलती है। जब बागमती नदी से तेजी से पानी आना शुरू होता है तो यहां पानी की रफ्तार बढ़ जाती है। ऐसी स्थिति में चचरी पुल के सहारे ही लोग चार महीने तक जीवन चलाते हैं।
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इस जगह से लगभग सौ मीटर की दूरी पर सिंहवाड़ा सीएचसी होने के बावजूद वहां तक मरीज को पहुंचाने के लिए पैगम्बरपुर, कटाशा पुल पारकर सिंहवाड़ा, लालपुर होते हुए सिंहवाड़ा अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। अधवाड़ा समूह के बुढ़नद नदी पर कटाशा में बना पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया है। निरीक्षण के दौरान बीडीओ और सीओ ने भी यहां खतरे की आशंका जताते हुए प्रतिवेदन जिले को भेजा है। इसके बावजूद पुल निर्माण के दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हो रही है और न हीं इस पुल पर भारी वाहन को जाने से रोकने के लिए विभाग ने कोई बोर्ड लगाया है। यही कारण है कि पिछले सप्ताह बालू नदी ट्रक पुल के किनारे धंस गई। जैसे-तैसे ट्रक को निकाला गया। एक तरफ चार वर्ष पहले टूटे पुल और दूसरी तरफ कटाशा में क्षतिग्रस्त हुए पुल के बीच कई पंचायतों का जीवन फंसा हुआ है।
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नगर पंचायत सिंहवाड़ा के मुख्य पार्षद प्रेम कुमार भगत और उप मुख्य पार्षद दीपू कुमार उर्फ छोटू सिंहा ने बताया कि लोगों की परेशानी को देखते हुए इस वर्ष निजी कोष, लोगों के सहयोग और श्रमदान से चचरी पुल का निर्माण कराया गया है।