Bihar : साहित्यकार ने क्यों की 106 दिनों की पैदल यात्रा; गंगाजल लेकर 3300 किलोमीटर पैदल कौन चले साथ, अब लौटे
Sadbhavana Yatra : वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा के नेतृत्व में कांवरियों का जत्था गंगोत्री से कांवर में गंगाजल लेकर निकला। 106 दिनों की पैदल यात्रा करते हुए गणेश चतुर्थी के दिन रामेश्वरम शिवलिंग पर जलाभिषेक किया।
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गंगोत्री से रामेश्वरम तक 3300 किमी की पैदल यात्रा पूर्ण कर सद्भावना यात्रा समिति का सात सदस्यीय जत्था वापस दरभंगा पहुंचा है। ये सभी लोग वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा के नेतृत्व में कांवरियों के रूप में हिमालय स्थित गंगोत्री से बीते चार जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन कांवर में गंगाजल लेकर विश्व शान्ति एवं सद्भाव की स्थापना के उद्देश्य से 106 दिनों की पैदल यात्रा करते हुए द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक रामेश्वरम शिवलिंग का गणेश चतुर्थी के दिन जलाभिषेक किया। अपनी यात्रा पूरी कर दरभंगा लौटने पर विद्यापति सेवा संस्थान के तत्वावधान में आयोजित अभिनंदन समारोह में मिथिला पेंटिंग युक्त पाग, चादर एवं फूलों की माला भेंट कर महासचिव डॉ. बैद्यनाथ चौधरी बैजू ने स्वागत किया।
साहित्यकार के साथ ये लोग भी थे शामिल
इस दौरान हर-हर महादेव एवं हर-हर गंगे के जयघोष से विद्यापति सेवा संस्थान का पूरा कार्यालय परिसर भक्तिमय हो गया। वरिष्ठ साहित्यकार मणिकांत झा के नेतृत्व में कांवरियों के जत्थे ने हिमालय स्थित गंगोत्री से बीते चार जून को ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन कांवर में गंगाजल लेकर विश्व में शान्ति एवं सद्भाव की स्थापना के उद्देश्य से 106 दिनों की पैदल यात्रा करते हुए द्वादश ज्योतिर्लिंग में से एक रामेश्वरम शिवलिंग का गणेश चतुर्थी के दिन जलाभिषेक किया। सद्भावना पैदल कांवर यात्रा में मणिकांत झा के अतिरिक्त हरिना, झंझारपुर के चिरंजीव मिश्र, भीषम टोल, कछुआ के श्याम राय, रतवारा, मुजफ्फरपुर के आशुतोष कुमार एवं रंजीत कुमार झा सहित हरिनगर, सीतामढ़ी के सुदिष्ट ठाकुर एवं राजभर के लालवचन शामिल थे।
बिहार वासियों के लिए गौरव यात्रा
मणिकांत झा सद्भावना यात्रा समिति के संयोजक एवं वरिष्ठ साहित्यकार सह भारत निर्वाचन आयोग के दरभंगा जिला के आइकॉन हैं। इस मौके पर मणिकांत झा ने बताया कि यात्रा के क्रम में कांवर यात्री कई अद्भुत अनुभवों को संचित करते हुए मिथिला की कला-संस्कृति, सभ्यता और भाषा आदि को उन लोगों के बीच प्रचारित व प्रसारित करने के साथ ही वहां की कला-संस्कृति से परिचित हुए। कांवर यात्रियों का स्वागत करते हुए डॉ. बैजू ने कहा कि संपूर्ण विश्व में शांति एवं सद्भावना की स्थापना के उद्देश्य से की गई यह अभूतपूर्व पैदल कांवर यात्रा मां जानकी की मातृभूमि मिथिला सहित संपूर्ण बिहार वासियों के लिए गौरव यात्रा है।