वोटिंग में हुई ऐसी घटना, जिसने सुनी वही चौंका
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बिहार के चुनावों में लोकतंत्र के विभिन्न रूप देखने को मिले, यहां हर कदम राजनीतिक दलों के बीच शब्दों की गरिमाएं गिरती दिखीं तो आदर्श आचार संहिता जैसे संवदेनशील मुद्दों को भी राजनीतिक दलों ने ताक पर रख दिया। लेकिन सियासतानों की इसी आपसी खींचतान में आम जनता ने लोकतंत्र की पूरी लाज रखी।
इसका ही परिणाम रहा कि शुरूआती चारों चरणों में वोटरों ने लोकतंत्र का महत्व समझते हुए जमकर मतदान तो किया ही अंतिम चरण में भी पूरी तन्मयता से अपनी जिम्मेदारी निभाई। गुरुवार को हुए पांचवे चरण में भी एक ऐसी ही घटना सामने आई जिसे देखकर लोकतंत्र के रक्षकों का सीना चौड़ा हो जाए।
वाक्या था सहरसा जिले के सोनवर्षा का जहां एक पिता का शव घर में छोड़कर बेटे ने पहले मतदान का फर्ज निभाया और उसके बाद पिता के शव को मुखाग्नि देकर पुत्र का फर्ज अदा किया।
गुरुवार सुबह हो गया था अचानक निधन
लोकतंत्र को प्रफुल्लित करती यह खबर आई सहरसा जिले के सोनवर्षा शहर से। जहां सोनवर्षा विधानसभा के लिए मतदान चल रहा था। इसी दौरान दुलार चन्द्र विश्वास के पिता मगन विश्वास का अल सुबह निधन हो गया। उनकी अचानक मौत से परिवार में कोहराम मच गया।
घर वाले उनके अंतिम संस्कार की तैयारियों में लग गए। इसी बीच सुबह हुई तो क्षेत्र में वोटिंग का बिगुल भी बज गया और लोग मतदान के लिए जाने लगे। यह देख दुलारचन्द्र अपने पिता मगन के शव को घर में ही छोड़कर अपने साथियों के साथ मतदान के लिए निकल गए।
लोगों ने पूछा तो कहा- पहले मतदान फिर मुखाग्नि। मतदान के प्रति उनका यह जज्बा देख हर कोई उनकी तारीफ करता नजर आया। बूथ नंबर 99 पर मतदान के बाद घर पहुंचे दुलारचन्द्र अपने पिता के शव को अंतिम संस्कार के लिए ले गए, जहां उन्होंने चिता को मुखाग्नि दी।
खास बात ये है कि दुलारचन्द्र विश्वास बिहार में उस पिछड़ा वर्ग से आते हैं जिसे मतदान के प्रति बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं माना जाता। लेकिन उनके इस जज्बे ने इन सारे कयासों को गलत साबित कर दिया।