सर्वे: नीतीश की लोकप्रियता बढ़ी, महागठबंधन आगे
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बिहार चुनाव अपने चरम पर है। शब्दों- अपशब्दों को तीर छोड़े जा रहे हैं वहीं दूसरी ओर लगातार आ रहे चुनावी सर्वे भी नेताओं के माथे पर बल ला रहे हैं। हाल में इंडिया टुडे ग्रुप और सिसरो ने संयुक्त रुप से किए गए सर्वे जो गुरुवार को जारी किया गया है उसके मुताबिक भाजपा के नेतृत्व वाली राजग पर महागठबंधन को मामलू ही सही लेकिन बढ़त मिलेगी।।
इस सर्वे में दिलचस्प बात यह है कि सर्वे के पहले दौर में जहां जनता दल यूनाइटेड और बिहार के मौजूदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद का सबसे लोकप्रिय दावेदार बताया गया है वहीं दूसरे दौर में यह भी बताया गया कि सर्वेक्षण में शामिल लोगों का मानना है कि नीतीश कुमार अपेक्षाओं पर खरे उतरे हैं और कई जगह अपेक्षाओं के पार भी जा चुके हैं।
सर्वे का दौर बीते महीने संपन्न हुआ था जिसमें भाजपा के नेतृत्व वाले राजग को 125 सीटे दी गई थी वहीं महागठबंधन को 106 सीटे मिलने का अनुमान लगाया गया था।
नीतीश की लोकप्रियता में भी बढ़त
सर्वे का दौर बीते महीने संपन्न हुआ था जिसमें भाजपा के नेतृत्व वाले राजग
को 125 सीटें दी गई थी वहीं महागठबंधन को 106 सीटें मिलने का अनुमान लगाया
गया था। वहीं हाल ही में संपन्न सर्वे के दूसरे दौर में महागठबंधन को 122 सीटों के करीब मिलती हुई बताई जा रही है वही राजग को 111 सीट मिलने के आसार जताए जा रहे हैं।
इस सर्वे में सुशील कुमार मोदी, नीतीश कुमार और लालू प्रसाद यादव की लोकप्रियता रेटिंग का सर्वे भी किया गया है जिसमें नीतीश की लोकप्रियता की रेटिंग जो सितंबर 2015 में 29 थी वो अक्टूबर में बढ़कर 38 हो गई, वहीं भाजपा नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी की लोकप्रियता भी बढ़ी है लेकिन उसके बढ़ने की रफ्तार कम है। सितंबर 2015 में जहां उनकी लोकप्रियता रेटिंग 19 थी वहीं अक्टूबर में बढ़कर 22 हो गई है।
इन सबके बीच अगर लालू यादव की बात करे तो उनके चुनाव न लड़ने के बावजूद भी वो राजनीति में खासी उथल पुथल कर सकने में सक्षम हैं लेकिन उनकी लोकप्रियता इन दो नेताओं के सामने बढ़ने के बजाय घट गई है। सितंबर 2015 में लालू की लोकप्रियता का रेटिंग 12 थी लेकिन अक्टूबर में हुए सर्वे के दौरान यह रेटिंग घटकर 9 हो गई है।
युवाओं का झुकाव किसकी तरफ
सितंबर माह के प्रथम दौर में हुए सर्वे मुताबिक 43 प्रतिशत युवा भाजपा का समर्थन कर रहे थे लेकिन सर्वे के दूसरे दौर में यह घटकर 36 प्रतिशत पर आ गया है।
लेकिन राजग को सरकारी नौकरी वाले लोगों की ओर से खासा सपोर्ट मिल रहा है। सितंबर माह में 45 प्रतिशत सरकारी नौकरी करने वाले लोग भाजपा का समर्थन कर रहे थे लेकिन अक्टूबर माह में यह समर्थन बढ़कर 5 प्रतिशत बो गया है।