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बिहार: दो निर्दलीय MLC भाजपा में आए या पार्टी से लौटे? जानिए, बिहार में क्यों मचा बवाल, किसका क्या है कहना
Sun, 01 Nov 2026 01:13 PM IST
आदित्य आनंद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: आदित्य आनंद
Updated Sun, 01 Nov 2026 01:13 PM IST
सार
Bihar News : बिहार विधान परिषद के चुनाव में दो सीटों का सीधा नुकसान झेलने वाली भाजपा और मतगणना के बाद विजयी घोषित हुए दो निर्दलीय इस समय खबरों में हैं। दोनों निर्दलीय कल भाजपा के सदस्य बने, फिर मुकर गए। क्या है पूरा माजरा?
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दो निर्दलीय एमएलसी पर सियासी घमासान।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार विधान परिषद चुनाव के नतीजों के बाद प्रदेश की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से दूसरी बार निर्दलीय चुनाव जीतने वाले बंशीधर ब्रजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्वाचित निर्दलीय एमएलसी राहुल राज के भाजपा में शामिल होने को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। शनिवार को दोनों नेताओं के भाजपा में शामिल होने की खबर सामने आई थी। हालांकि, बंशीधर ब्रजवासी ने देर रात वीडियो जारी कर इससे इनकार किया। उन्होंने कहा कि वह मुख्यमंत्री से मिलने गए थे, भाजपा में शामिल नहीं हुए हैं। दूसरी ओर, राहुल राज ने स्पष्ट रूप से भाजपा की सदस्यता लेने की पुष्टि की है।
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राहुल राज ने कहा कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में वह शिक्षकों के हितों के लिए काम करेंगे। शिक्षकों की न्यायसंगत मांगों को शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के समक्ष उठाकर उन्हें पूरा कराने का प्रयास करेंगे। उन्होंने कहा कि अब वह पार्टी के साथ जुड़कर काम करेंगे।
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इस बीच, बंशीधर ब्रजवासी को लेकर भी अलग-अलग बयान सामने आए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी उन्हें साथ लेकर पार्टी कार्यालय पहुंचे थे। पार्टी कार्यालय में ब्रजवासी ने कहा था कि उन्होंने भाजपा की सदस्यता ले ली है। उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से अपने पुराने संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री उन्हें छोटे भाई की तरह मानते हैं और हमेशा बुलाते रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अकेले रहकर शिक्षकों के सभी काम नहीं करा सकते। हालांकि, देर रात जारी वीडियो में उन्होंने भाजपा में शामिल होने की बात से इनकार कर दिया। इससे उनकी राजनीतिक स्थिति को लेकर असमंजस पैदा हो गया है।
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इधर, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने इस मामले में सीधी बात नहीं कही। उन्होंने कहा कि अगर कोई कार्यालय में आएंगे तो हम लोग उनका स्वागत पार्टी का पट्टा पहना कर तो करेंगे ही न। उनका समर्थन भाजपा के साथ है।
मनोज झा बोले- दोनों एमएलसी को अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे
राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने भी दोनों निर्दलीय एमएलसी के भाजपा में शामिल होने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि एक दिन पहले दो निर्दलीय उम्मीदवार राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने जीत के बाद भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। मनोज झा ने कहा कि चुनाव में हर जाति और समुदाय ने अपना संदेश दिया है, इसके बावजूद तमाम तंत्र-मंत्र के बाद भाजपा केवल दो सीटें ही जीत पाई। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को जदयू को निपटाने की जल्दबाजी है। मनोज झा ने कहा कि वह बिहार विधान परिषद के सभापति से दोनों नवनिर्वाचित सदस्यों को अयोग्य घोषित करने की मांग करते हैं उन्होंने दावा किया कि नियमों के मुताबिक, निर्दलीय सदस्य के किसी राजनीतिक दल में शामिल होने पर उसकी सदस्यता अयोग्य घोषित की जा सकती है। इस मामले में वह चुनाव आयोग और विधान परिषद के सभापति से शिकायत भी करेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं की गई तो राजद आंदोलन करेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में मेगा रैली होने से ठीक एक दिन पहले दोनों निर्दलीय उम्मीदवारों को भाजपा में शामिल कराया गया। अगर मुख्यमंत्री इस तरह की बेईमानी को चलने देते हैं तो इसका फैसला जनता की अदालत में होगा।
आनंद पुष्कर ने भाजपा नेताओं पर उठाए सवाल
सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जदयू के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले और हार का सामना करने वाले आनंद पुष्कर ने इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा के बड़े नेताओं को घेरा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या गठबंधन धर्म का पालन करने की जिम्मेदारी सिर्फ जदयू की है? निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने वाले राहुल राज के भाजपा में शामिल होने पर उन्होंने सवाल खड़े किए हैं। उनका इशारा एनडीए के सहयोगी दलों के बीच आपसी राजनीतिक तालमेल और गठबंधन की मर्यादा की ओर है।
एक्सपर्ट ने किस नियम का दिया हवाला?
वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि भारतीय संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे 1985 में 52वें संविधान संशोधन के तहत जोड़ा गया था, के पैराग्राफ 2(2) में स्पष्ट प्रावधान है कि चुनाव जीतने के बाद कोई निर्दलीय सांसद, विधायक या विधान पार्षद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है, तो वह सदन की सदस्यता के लिए अयोग्य हो सकता है। निर्दलीय सदस्य सरकार बनाने या किसी गठबंधन को बाहर से समर्थन दे सकता है, सरकार के पक्ष में मतदान कर सकता है और मंत्री भी बन सकता है, बशर्ते वह किसी राजनीतिक दल की सदस्यता न ले। संविधान में इस नियम का कोई स्पष्ट अपवाद नहीं है। इसके बावजूद, तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीतने वाले बंशीधर बृजवासी और सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय विजयी हुए राहुल राज भाजपा में शामिल हो गए हैं। दोनों चाहें तो भाजपा को समर्थन दे सकते थे, लेकिन उन्होंने पार्टी की सदस्यता ही ग्रहण कर ली।